रिजल्ट में देरी से भड़के अभ्यर्थी! लखनऊ में आयोग दफ्तर का घेराव, बोले- अब आर-पार की लड़ाई

होम्योपैथिक फार्मासिस्ट भर्ती 2024 का परिणाम जारी न होने से नाराज अभ्यर्थियों ने लखनऊ में आयोग कार्यालय का घेराव किया। युवाओं ने जल्द परिणाम घोषित करने की मांग करते हुए बड़ा आंदोलन करने की चेतावनी दी है।

रिजल्ट में देरी से भड़के अभ्यर्थी! लखनऊ में आयोग दफ्तर का घेराव, बोले- अब आर-पार की लड़ाई

दि राइजिंग न्यूज़ | लखनऊ | 22 मई 2026

उत्तर प्रदेश में युवाओं के रोजगार का मुद्दा एक बार फिर सड़कों पर दिखाई देने लगा है। होम्योपैथिक फार्मासिस्ट भर्ती 2024 का अंतिम परिणाम जारी न होने से नाराज अभ्यर्थियों ने शुक्रवार को राजधानी लखनऊ में बड़ा प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने गोमतीनगर स्थित उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग कार्यालय का घेराव कर जल्द परिणाम घोषित करने की मांग उठाई।प्रदर्शन कर रहे युवाओं का कहना है कि दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया कई महीने पहले पूरी हो चुकी है, लेकिन इसके बावजूद आयोग अब तक अंतिम चयन सूची जारी नहीं कर पाया है। इससे हजारों अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में लटक गया है और युवाओं में भारी नाराजगी फैलती जा रही है।

आयोग के खिलाफ युवाओं में बढ़ा गुस्सा

सुबह से ही बड़ी संख्या में अभ्यर्थी आयोग कार्यालय के बाहर जुटने लगे थे। हाथों में तख्तियां और नारे लिखे पोस्टर लेकर पहुंचे युवाओं ने आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। अभ्यर्थियों का आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया में अनावश्यक देरी की जा रही है, जिससे युवाओं का मानसिक और आर्थिक शोषण हो रहा है।प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सामान्य परिस्थितियों में इतनी लंबी देरी नहीं होनी चाहिए। उनका आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया को लेकर लगातार असमंजस की स्थिति बनी हुई है, जिससे युवाओं का भरोसा कमजोर पड़ता जा रहा है।

8 महीने से इंतजार में बैठे अभ्यर्थी

अभ्यर्थियों के अनुसार दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया करीब आठ महीने पहले पूरी हो चुकी थी। इसके बाद उम्मीद थी कि जल्द अंतिम परिणाम जारी कर दिया जाएगा, लेकिन अब तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई। इसी वजह से युवाओं का धैर्य टूटने लगा है।कई अभ्यर्थियों ने बताया कि लगातार इंतजार के कारण वे न तो दूसरी नौकरियों की तैयारी कर पा रहे हैं और न ही भविष्य की कोई ठोस योजना बना पा रहे हैं। इससे उनके करियर पर सीधा असर पड़ रहा है और मानसिक दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।

आर्थिक और पारिवारिक दबाव से परेशान युवा

प्रदर्शन में शामिल कई अभ्यर्थियों ने बताया कि लंबे समय से भर्ती प्रक्रिया पूरी न होने के कारण परिवार और समाज का दबाव भी बढ़ रहा है। ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आने वाले युवाओं के लिए यह स्थिति और ज्यादा कठिन हो चुकी है।अभ्यर्थियों का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में उन्होंने कई साल लगाए हैं। ऐसे में परिणाम में देरी उनके आत्मविश्वास को तोड़ रही है। कई युवाओं ने मानसिक तनाव और अवसाद जैसी समस्याओं का भी जिक्र किया।

मिशन रोजगार पर उठाए सवाल

अभ्यर्थियों ने सरकार की रोजगार नीति का हवाला देते हुए कहा कि जब युवाओं को रोजगार देने के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, तो फिर भर्ती प्रक्रियाओं में इतनी देरी क्यों हो रही है। युवाओं ने मांग की कि सरकार और आयोग इस भर्ती को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करें।प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यह केवल परीक्षा का परिणाम नहीं बल्कि हजारों परिवारों के भविष्य से जुड़ा मामला है। अगर समय रहते परिणाम घोषित नहीं किया गया तो युवाओं का भरोसा पूरी तरह टूट सकता है।

बड़े आंदोलन की चेतावनी

अभ्यर्थियों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि अगर जल्द अंतिम परिणाम जारी नहीं किया गया तो आंदोलन को और बड़ा किया जाएगा। फिलहाल प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से किया गया, लेकिन युवाओं का कहना है कि अब वे और इंतजार करने की स्थिति में नहीं हैं।राजधानी लखनऊ में हुए इस प्रदर्शन ने एक बार फिर प्रदेश में लंबित भर्तियों और युवाओं की नाराजगी को सामने ला दिया है। आने वाले दिनों में आयोग की ओर से क्या फैसला लिया जाता है, इस पर हजारों अभ्यर्थियों की नजरें टिकी हुई हैं।

युवाओं में बढ़ रहा भर्ती प्रक्रिया को लेकर अविश्वास

अभ्यर्थियों का कहना है कि भर्ती परीक्षाओं और परिणामों में लगातार हो रही देरी से युवाओं का सरकारी व्यवस्थाओं पर भरोसा कमजोर पड़ता जा रहा है। कई प्रतियोगी छात्र वर्षों तक तैयारी करने के बाद भी समय पर नियुक्ति नहीं मिलने से निराश हो रहे हैं। उनका मानना है कि अगर भर्ती प्रक्रिया तय समय सीमा में पूरी हो तो युवाओं का भविष्य सुरक्षित हो सकता है।

विपक्ष को मिला सरकार पर हमला करने का मुद्दा

भर्ती परिणाम में देरी का मामला अब राजनीतिक रंग भी पकड़ता दिखाई दे रहा है। विपक्षी दल इसे युवाओं के साथ अन्याय बताते हुए सरकार को घेरने की तैयारी में हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि रोजगार और भर्ती का मुद्दा आने वाले समय में प्रदेश की राजनीति में बड़ा विषय बन सकता है।