संसद में दो-तिहाई बहुमत की तैयारी! डीएमके को एनडीए के करीब लाने में जुटी भाजपा
तमिलनाडु में सत्ता परिवर्तन के बाद डीएमके और भाजपा के बीच बढ़ती राजनीतिक नजदीकियों की चर्चा तेज हो गई है। सूत्रों के अनुसार भाजपा संसद में दो-तिहाई बहुमत मजबूत करने के लिए डीएमके को एनडीए के करीब लाने की रणनीति पर काम कर रही है। इससे राष्ट्रीय राजनीति में बड़े बदलाव की अटकलें तेज हो गई हैं।
दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 22 मई 2026
संसद में दो-तिहाई बहुमत के मिशन में जुटी भाजपा
देश की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी बदलाव देखने को मिल सकता है। केंद्र की सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी अब संसद में दो-तिहाई बहुमत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए दक्षिण भारत की राजनीति पर बड़ा दांव खेलती दिखाई दे रही है। सूत्रों के अनुसार भाजपा की नजर अब तमिलनाडु की बड़ी क्षेत्रीय पार्टी द्रविड़ मुनेत्र कषगम पर टिकी हुई है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि डीएमके को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के करीब लाने की कोशिशें तेज हो गई हैं।तमिलनाडु में हालिया सत्ता परिवर्तन के बाद राज्य की राजनीति पूरी तरह बदल चुकी है। अभिनेता से नेता बने थलपति विजय की पार्टी सत्ता में आ चुकी है और डीएमके अब विपक्ष की भूमिका में पहुंच गई है। इसी बदले राजनीतिक समीकरण के बीच दिल्ली की राजनीति में नए गठबंधन की संभावनाएं भी तेजी से चर्चा में हैं।
कांग्रेस से दूरी बनाकर नए समीकरण की ओर डीएमके
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के बाद डीएमके ने कांग्रेस से अपने रिश्ते लगभग खत्म कर दिए हैं। लोकसभा में भी कई मुद्दों पर डीएमके ने कांग्रेस से अलग रुख अपनाया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस की कमजोर होती स्थिति और बदलते राष्ट्रीय समीकरणों को देखते हुए डीएमके अब नई रणनीति पर काम कर रही है।सूत्रों के मुताबिक डीएमके नेतृत्व अब केंद्र सरकार के साथ टकराव की राजनीति से दूरी बनाना चाहता है। पार्टी के भीतर यह भावना मजबूत हो रही है कि भविष्य की राजनीति में राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत साझेदारी अधिक फायदेमंद साबित हो सकती है। यही कारण है कि भाजपा और डीएमके के बीच संवाद बढ़ने की खबरें सामने आ रही हैं।
भाजपा की नजर राज्यसभा और बड़े विधेयकों पर
मोदी सरकार के रणनीतिकारों का मानना है कि अगर डीएमके जैसे बड़े दल का समर्थन मिल जाता है तो संसद के उच्च सदन में सरकार की स्थिति और मजबूत हो सकती है। भाजपा लंबे समय से ऐसे सहयोगियों की तलाश में है जो बड़े विधेयकों और संवैधानिक संशोधनों के समय उसका समर्थन कर सकें।राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि भाजपा यह संदेश देना चाहती है कि वह केवल उत्तर भारत की पार्टी नहीं बल्कि पूरे देश में मजबूत राजनीतिक साझेदारी बनाने में सक्षम है। दक्षिण भारत में विस्तार की रणनीति के तहत तमिलनाडु को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बीजेडी और वाईएसआर कांग्रेस जैसी रणनीति पर काम
सूत्रों के अनुसार भाजपा डीएमके के साथ वही रणनीति अपनाना चाहती है जो पहले बीजेडी, वाईएसआर कांग्रेस और बीआरएस जैसे दलों के साथ अपनाई गई थी। इन दलों ने कई राष्ट्रीय मुद्दों पर केंद्र सरकार का समर्थन किया था, जबकि वे औपचारिक रूप से गठबंधन का हिस्सा नहीं थे।भाजपा को उम्मीद है कि डीएमके भी मुद्दों के आधार पर सहयोग की नीति अपना सकती है। हालांकि अभी तक दोनों दलों की ओर से किसी औपचारिक समझौते की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन लगातार बढ़ती राजनीतिक मुलाकातों ने अटकलों को और तेज कर दिया है।
थलपति विजय की एंट्री से बदला तमिलनाडु का समीकरण
तमिलनाडु की राजनीति में अभिनेता थलपति विजय की एंट्री ने पूरे राज्य का सियासी गणित बदल दिया है। उनकी पार्टी ने सत्ता हासिल कर पारंपरिक दलों को बड़ा झटका दिया है। डीएमके के सत्ता से बाहर होने के बाद पार्टी अब अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर नई रणनीति तैयार कर रही है। सत्ता से बाहर होने के बाद डीएमके राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए नए सहयोगियों की तलाश कर सकती है। ऐसे में भाजपा के साथ बढ़ती नजदीकियां भविष्य में बड़े राजनीतिक बदलाव का संकेत मानी जा रही हैं।
विपक्षी राजनीति पर पड़ सकता है बड़ा असर
अगर डीएमके और भाजपा के बीच किसी प्रकार की राजनीतिक समझ बनती है तो इसका असर पूरे विपक्षी गठबंधन पर पड़ सकता है। कांग्रेस के लिए यह सबसे बड़ा झटका माना जाएगा क्योंकि दक्षिण भारत में डीएमके लंबे समय से उसका प्रमुख सहयोगी रही है।राजनीतिक जानकारों का कहना है कि आने वाले महीनों में संसद और राष्ट्रीय राजनीति में कई नए समीकरण देखने को मिल सकते हैं। फिलहाल दिल्ली से लेकर चेन्नई तक इसी संभावित राजनीतिक बदलाव की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है।