टीएमसी का अभेद्य किला भी दरका! फाल्टा में ममता बनर्जी को बड़ा झटका, अभिषेक का गढ़ भी खतरे में

पश्चिम बंगाल की फाल्टा विधानसभा सीट पर तृणमूल कांग्रेस की पकड़ कमजोर पड़ती नजर आ रही है। जहांगीर खान के चुनाव से हटने के बाद भाजपा और वामदल के बीच सीधी टक्कर बन गई है, जिससे ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी की चिंता बढ़ गई है।

टीएमसी का अभेद्य किला भी दरका! फाल्टा में ममता बनर्जी को बड़ा झटका, अभिषेक का गढ़ भी खतरे में

दि राइजिंग न्यूज़ | कोलकाता | 22 मई 2026

पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस के लिए बड़ा झटका सामने आता दिखाई दे रहा है। लंबे समय से पार्टी का मजबूत गढ़ मानी जाने वाली फाल्टा विधानसभा सीट अब टीएमसी के हाथ से फिसलती नजर आ रही है। यह सीट डायमंड हार्बर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है, जहां से ममता बनर्जी के भतीजे और तृणमूल कांग्रेस के बड़े नेता अभिषेक बनर्जी सांसद हैं। ऐसे में फाल्टा में बदलते राजनीतिक समीकरणों ने पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है।फाल्टा सीट पर वर्षों से तृणमूल कांग्रेस की मजबूत पकड़ मानी जाती रही है। स्थानीय राजनीति में प्रभाव रखने वाले नेता जहांगीर खान को इस पकड़ की सबसे बड़ी वजह माना जाता था। लेकिन चुनावी मैदान से उनके अचानक हटने के बाद पूरा माहौल बदल गया। अब इलाके में तृणमूल कांग्रेस की सक्रियता बेहद कमजोर दिखाई दे रही है और विपक्षी दल लगातार मजबूत होते नजर आ रहे हैं।

कुछ ही दिनों में बदल गया पूरा चुनावी माहौल

दूसरे चरण के मतदान के दौरान फाल्टा विधानसभा क्षेत्र में तृणमूल कांग्रेस का दबदबा साफ दिखाई दे रहा था। पूरे इलाके में पार्टी के झंडे, पोस्टर और कार्यकर्ताओं की भारी मौजूदगी देखी जा रही थी। लेकिन मतदान के कुछ ही दिनों बाद हालात पूरी तरह बदल गए और इलाके में विपक्षी दलों की सक्रियता बढ़ती दिखाई देने लगी।स्थानीय लोगों के मुताबिक अब कई इलाकों में तृणमूल कांग्रेस के झंडे तक नजर नहीं आ रहे हैं। राजनीतिक जानकार इसे जनता के बदलते रुख का संकेत मान रहे हैं। माना जा रहा है कि जहांगीर खान के चुनाव से हटने के बाद पार्टी की संगठनात्मक ताकत कमजोर पड़ गई है।

जहांगीर खान के हटते ही कमजोर पड़ी टीएमसी

फाल्टा क्षेत्र में जहांगीर खान को बेहद प्रभावशाली नेता माना जाता था। उनकी पकड़ स्थानीय स्तर पर काफी मजबूत थी और यही वजह थी कि तृणमूल कांग्रेस यहां लगातार मजबूत स्थिति में बनी रही। लेकिन चुनाव से अचानक हटने के बाद उन्होंने खुद को भी सार्वजनिक गतिविधियों से दूर कर लिया।स्थानीय सूत्रों का दावा है कि मतदान के दिन भी जहांगीर खान कहीं नजर नहीं आए। लोगों का कहना है कि चुनाव मैदान छोड़ने के बाद से ही उन्होंने राजनीतिक गतिविधियों से दूरी बना ली है। इससे पार्टी कार्यकर्ताओं में भी भ्रम और नाराजगी का माहौल बन गया।

अभिषेक बनर्जी के करीबी माने जाते हैं खान

जहांगीर खान को अभिषेक बनर्जी का बेहद करीबी माना जाता रहा है। डायमंड हार्बर क्षेत्र में उनकी मजबूत पकड़ के चलते ही तृणमूल कांग्रेस को पिछले लोकसभा चुनाव में भारी बढ़त मिली थी। वर्ष 2024 के चुनाव में इस क्षेत्र में पार्टी को रिकॉर्ड समर्थन मिला था।लेकिन जैसे ही खान ने चुनाव से नाम वापस लिया, तृणमूल कांग्रेस ने तुरंत खुद को उनसे अलग दिखाने की कोशिश शुरू कर दी। पार्टी नेताओं ने इसे उनका निजी फैसला बताया। हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस फैसले का सीधा असर टीएमसी की चुनावी स्थिति पर पड़ा है।

पुनर्मतदान में भारी मतदान ने बढ़ाई हलचल

फाल्टा विधानसभा सीट पर गुरुवार को पुनर्मतदान कराया गया, जिसमें बड़ी संख्या में मतदाताओं ने हिस्सा लिया। चुनाव आयोग के अनुसार यहां 86 प्रतिशत से अधिक मतदान दर्ज किया गया। मतदान के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे और केंद्रीय बलों की भारी तैनाती रही।दरअसल पहले चरण के मतदान के दौरान कई मतदान केंद्रों से गड़बड़ी की शिकायतें सामने आई थीं। आरोप लगाया गया था कि मतदान मशीनों के साथ छेड़छाड़ की कोशिश हुई। विवाद बढ़ने के बाद चुनाव आयोग ने मामले को गंभीर मानते हुए पुनर्मतदान कराने का फैसला लिया था।

भाजपा और वामदल के बीच सीधी लड़ाई

जहांगीर खान के चुनाव से हटने के बाद फाल्टा सीट पर मुकाबला पूरी तरह बदल गया है। अब यहां मुख्य टक्कर भारतीय जनता पार्टी और वामदल समर्थित उम्मीदवारों के बीच मानी जा रही है। भारतीय जनता पार्टी की ओर से देबांग्शु पांडा मैदान में हैं, जबकि मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने शंभूनाथ कुर्मी को उम्मीदवार बनाया है।कांग्रेस की ओर से अब्दुर रज्जाक मोल्ला भी चुनाव मैदान में मौजूद हैं, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुकाबला मुख्य रूप से भाजपा और वामदल के बीच सिमटता दिखाई दे रहा है। तृणमूल कांग्रेस की कमजोर होती स्थिति ने विपक्षी दलों का उत्साह बढ़ा दिया है।

पहले भी झटके झेल चुकी हैं ममता बनर्जी

फाल्टा सीट पर संकट के बीच ममता बनर्जी को हाल के वर्षों में कई बड़े राजनीतिक झटके लग चुके हैं। इससे पहले भवानीपुर सीट पर भी उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। वहां भारतीय जनता पार्टी के नेता शुभेंदु अधिकारी ने उन्हें बड़े अंतर से हराया था।वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव में भी ममता बनर्जी को नंदीग्राम सीट पर हार झेलनी पड़ी थी। लगातार सामने आ रही चुनावी चुनौतियों ने तृणमूल कांग्रेस की रणनीति और संगठन दोनों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब फाल्टा सीट के बदलते समीकरण बंगाल की राजनीति में बड़ा संदेश दे रहे हैं।