देश में पेट्रोल-डीजल की कमी की अफवाहों पर सरकार का बड़ा बयान, जानें कितने दिनों का तेल भंडार मौजूद

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईंधन बचत अपील के बाद देशभर में पेट्रोल-डीजल की कमी और कीमत बढ़ने की चर्चाओं के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा बयान दिया है। सरकार के अनुसार भारत के पास 60 दिनों का कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का भंडार मौजूद है, जबकि एलपीजी का 45 दिनों का स्टॉक उपलब्ध है। सरकार ने लोगों से पैनिक बाइंग न करने की अपील की है।

देश में पेट्रोल-डीजल की कमी की अफवाहों पर सरकार का बड़ा बयान, जानें कितने दिनों का तेल भंडार मौजूद

दि राइजिंग न्यूज डेस्क | 11z मई 2026

प्रधानमंत्री की अपील के बाद देशभर में बढ़ी बेचैनी

नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया अपील के बाद देशभर में पेट्रोल-डीजल को लेकर चिंता का माहौल बन गया है। सोशल मीडिया से लेकर पेट्रोल पंपों तक लोगों के बीच यह चर्चा तेज हो गई कि आने वाले दिनों में ईंधन की कीमतें बढ़ सकती हैं या कहीं सप्लाई पर असर न पड़ जाए। कुछ राज्यों में लोगों ने एहतियात के तौर पर अतिरिक्त पेट्रोल-डीजल भरवाना भी शुरू कर दिया। हालात ऐसे बने कि केंद्र सरकार को सामने आकर स्थिति स्पष्ट करनी पड़ी। सरकार ने साफ शब्दों में कहा है कि देश में पेट्रोल, डीजल और गैस की कोई कमी नहीं है और नागरिकों को घबराने की जरूरत नहीं है।


सरकार ने बताया- देश में कितना ईंधन मौजूद

पेट्रोलियम सचिव नीरज मित्तल ने सोमवार को मीडिया को जानकारी देते हुए कहा कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा पूरी तरह मजबूत है। उन्होंने बताया कि मौजूदा समय में देश के पास पर्याप्त मात्रा में ईंधन भंडार मौजूद है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल ईंधन की राशनिंग लागू करने या सप्लाई सीमित करने जैसी कोई योजना नहीं है।सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल ईंधन की राशनिंग लागू करने या सप्लाई सीमित करने जैसी कोई योजना नहीं है। 

सरकारी आंकड़ों के अनुसार भारत के पास इस समय—

● 60 दिनों का कच्चे तेल का भंडार

● 60 दिनों का प्राकृतिक गैस भंडार

● 45 दिनों का एलपीजी भंडार


आखिर प्रधानमंत्री मोदी ने क्या कहा था

दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को हैदराबाद में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान देशवासियों से ईंधन के इस्तेमाल में सावधानी बरतने और इसकी खपत कम करने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि दुनिया तेजी से बदल रही है और वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट जैसी परिस्थितियां बन सकती हैं। ऐसे में भारत को ऊर्जा बचत की दिशा में गंभीरता से काम करना होगा।  प्रधानमंत्री की इस अपील के बाद कई लोगों ने इसे संभावित संकट का संकेत मान लिया। सोशल मीडिया पर यह चर्चा शुरू हो गई कि सरकार भविष्य में पेट्रोल-डीजल महंगा कर सकती है या सप्लाई प्रभावित हो सकती है। यही वजह रही कि कई जगहों पर पैनिक बाइंग जैसी स्थिति देखने को मिली।


लोगों में डर क्यों बढ़ा

दरअसल, इस समय दुनिया के कई हिस्सों में तनाव बढ़ा हुआ है। पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष और समुद्री मार्गों पर बढ़ते खतरे की वजह से वैश्विक तेल बाजार प्रभावित हो रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात और बिगड़ते हैं, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं। इसका सीधा असर भारत जैसे देशों पर पड़ता है, क्योंकि भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। इसी कारण प्रधानमंत्री की अपील के बाद लोगों ने आशंका जतानी शुरू कर दी कि कहीं भविष्य में पेट्रोल-डीजल की उपलब्धता प्रभावित न हो जाए।


किन देशों से तेल खरीद रहा है भारत

भारत ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी तेल आयात नीति में बड़ा बदलाव किया है। पहले भारत की निर्भरता मुख्य रूप से मध्य-पूर्वी देशों पर थी, लेकिन अब भारत कई देशों से तेल खरीद रहा है।

भारत इन देशों से खरीद रहा है तेल—

  • रूस

  • अमेरिका

  • ब्राजील

  • गुयाना

  • नाइजीरिया

  • अंगोला

  • सऊदी अरब

  • इराक

रूस इस समय भारत का सबसे बड़ा कच्चा तेल सप्लायर बन चुका है। रूस से रियायती दरों पर तेल मिलने से भारत को काफी राहत मिली है।


भारत के लिए क्यों अहम है तेल आयात में विविधता

विशेषज्ञों के अनुसार यदि किसी एक क्षेत्र में युद्ध या तनाव बढ़ता है, तो वहां से तेल सप्लाई प्रभावित हो सकती है। ऐसे में जिन देशों की निर्भरता केवल एक क्षेत्र पर होती है, उन्हें भारी संकट का सामना करना पड़ता है। भारत ने इसी खतरे को देखते हुए अलग-अलग देशों से तेल खरीदना शुरू किया। इसका फायदा यह हुआ कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य या लाल सागर जैसे महत्वपूर्ण मार्ग प्रभावित होते हैं, तब भी भारत के पास अन्य विकल्प मौजूद रहते हैं।


क्या आने वाले समय में महंगा होगा पेट्रोल-डीजल

हालांकि सरकार ने फिलहाल राहत की बात कही है, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ती रहीं, तो आने वाले महीनों में भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ सकते हैं। सरकारी तेल कंपनियां इस समय कीमतों को नियंत्रित रखने की कोशिश कर रही हैं। लेकिन वैश्विक बाजार में लंबे समय तक अस्थिरता बनी रही, तो इसका असर भारतीय बाजार पर पड़ना लगभग तय माना जा रहा है।


क्या देश में ईंधन संकट आ सकता है

ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान स्थिति को देखते हुए भारत में तुरंत किसी बड़े ईंधन संकट की संभावना नहीं है। देश के पास पर्याप्त भंडार मौजूद है और सरकार लगातार नए स्रोतों से आयात सुनिश्चित कर रही है। हालांकि यदि वैश्विक तनाव लंबे समय तक जारी रहता है, तो कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।


सरकार ने जनता से क्या अपील की

केंद्र सरकार ने नागरिकों से कहा है कि—

  • अफवाहों पर भरोसा न करें

  • घबराकर पेट्रोल-डीजल जमा न करें

  • जरूरत के अनुसार ही ईंधन खरीदें

  • ऊर्जा बचत की आदत अपनाएं

सरकार का कहना है कि देश में सप्लाई पूरी तरह सामान्य है और सभी तेल कंपनियां लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।


वैश्विक तनाव और तेल बाजार में अनिश्चितता के बीच भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में पेट्रोल-डीजल और गैस का पर्याप्त भंडार मौजूद है। फिलहाल किसी प्रकार की कमी या राशनिंग की स्थिति नहीं है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय हालात को देखते हुए भविष्य में कीमतों में बदलाव संभव है, इसलिए सरकार ऊर्जा बचत और जिम्मेदार इस्तेमाल पर जोर दे रही है।