पेट्रोल की जगह लेगा इथेनॉल

केंद्र सरकार ने E100 यानी 100 प्रतिशत इथेनॉल ईंधन को कानूनी मंजूरी दे दी है। सरकार का दावा है कि इससे कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम होगी, किसानों की आय बढ़ेगी और प्रदूषण में कमी आएगी। हालांकि इसके व्यापक उपयोग के लिए विशेष वाहनों और नए बुनियादी ढांचे की आवश्यकता होगी।

पेट्रोल की जगह लेगा इथेनॉल

दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 17 जून 2026

पेट्रोल की जगह लेगा इथेनॉल

भारत में ऊर्जा क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए केंद्र सरकार ने E100 ईंधन को कानूनी मंजूरी दे दी है। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने इसकी जानकारी देते हुए कहा कि अब देश में 100 प्रतिशत इथेनॉल आधारित ईंधन के उपयोग का रास्ता साफ हो गया है। E100 ऐसा ईंधन है जिसमें लगभग पूरी तरह इथेनॉल का उपयोग किया जाता है और इसमें पारंपरिक पेट्रोल नहीं मिलाया जाता। इथेनॉल का उत्पादन गन्ना, मक्का, चावल और कृषि अपशिष्ट जैसी सामग्री से किया जाता है। वर्तमान में देश में E20 ईंधन का उपयोग किया जा रहा है, जिसमें 20 प्रतिशत इथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल शामिल होता है।

ऊर्जा आयात पर निर्भरता घटाने की तैयारी

सरकार का मानना है कि E100 ईंधन के व्यापक उपयोग से भारत की विदेशी कच्चे तेल पर निर्भरता कम हो सकती है। देश अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयातित तेल से पूरा करता है, जिससे वैश्विक बाजार में कीमतों के उतार-चढ़ाव का सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम के कारण अब तक कच्चे तेल के आयात में एक लाख करोड़ रुपये से अधिक की बचत हुई है। साथ ही किसानों को अतिरिक्त आय के रूप में लगभग 80 हजार करोड़ रुपये का लाभ मिलने का दावा किया गया है।

किसानों को मिलेगा लाभ

 इथेनॉल उत्पादन बढ़ने से गन्ना, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों की मांग में वृद्धि होगी। इससे किसानों की आमदनी बढ़ सकती है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।सरकार लंबे समय से इथेनॉल आधारित ईंधन को बढ़ावा देने की नीति पर काम कर रही है। इसी रणनीति के तहत अब E100 को भी मंजूरी दी गई है।

फ्लेक्स फ्यूल वाहनों की बढ़ेगी संख्या

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि आने वाले महीनों में कई प्रमुख वाहन निर्माता कंपनियां फ्लेक्स फ्यूल तकनीक से लैस वाहन बाजार में उतारेंगी। हाल ही में कुछ कंपनियों ने ऐसे वाहनों के प्रोटोटाइप भी पेश किए हैं जो उच्च इथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन पर चल सकते हैं। nफ्लेक्स फ्यूल वाहन ऐसे विशेष इंजन से लैस होते हैं जो विभिन्न अनुपात में इथेनॉल और पेट्रोल मिश्रण वाले ईंधन का उपयोग कर सकते हैं। E100 के लिए विशेष रूप से डिजाइन किए गए वाहनों की आवश्यकता होगी।

क्या पेट्रोल को पूरी तरह बदल पाएगा E100

विशेषज्ञों के अनुसार सैद्धांतिक रूप से E100 पेट्रोल का विकल्प बन सकता है, लेकिन यह बदलाव तत्काल संभव नहीं है। देश की सड़कों पर मौजूद अधिकांश वाहन E20 या सामान्य पेट्रोल के लिए डिजाइन किए गए हैं। उन्हें सीधे E100 पर नहीं चलाया जा सकता। इसके लिए इंजन, फ्यूल पंप, इंजेक्टर और फ्यूल लाइन में तकनीकी बदलाव आवश्यक होते हैं। यही कारण है कि E100 का उपयोग फिलहाल सीमित स्तर पर ही संभव माना जा रहा है।

माइलेज और तकनीकी चुनौतियां

इथेनॉल की ऊर्जा घनत्व पेट्रोल की तुलना में कम होती है। इसका अर्थ है कि समान दूरी तय करने के लिए अधिक ईंधन की आवश्यकता पड़ सकती है। इसी वजह से वाहन मालिकों ने E20 ईंधन के उपयोग के बाद माइलेज में कमी की शिकायतें भी दर्ज कराई हैं।  E100 के उपयोग के लिए व्यापक तकनीकी तैयारी और उपभोक्ता जागरूकता आवश्यक होगी।

पेट्रोल पंपों पर भी होगा बदलाव

E100 के सफल क्रियान्वयन के लिए देशभर में ईंधन वितरण व्यवस्था को भी उन्नत करना होगा। पेट्रोल पंपों पर अलग-अलग प्रकार के इथेनॉल मिश्रित ईंधन उपलब्ध कराने के लिए नए भंडारण और वितरण तंत्र विकसित करने होंगे। इसके साथ ही कर्मचारियों को प्रशिक्षण देना होगा ताकि उपभोक्ताओं को उनके वाहन के अनुरूप सही ईंधन उपलब्ध कराया जा सके।

पर्यावरण के लिए भी फायदेमंद

इथेनॉल आधारित ईंधन को पारंपरिक जीवाश्म ईंधन की तुलना में अधिक पर्यावरण अनुकूल माना जाता है। इसके उपयोग से कार्बन उत्सर्जन कम करने में मदद मिल सकती है, जिससे वायु प्रदूषण पर नियंत्रण पाने में सहायता मिलेगी।यदि उत्पादन क्षमता, बुनियादी ढांचा और वाहन तकनीक से जुड़ी चुनौतियों का समाधान कर लिया जाता है तो E100 भारत के ऊर्जा क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकता है। आने वाले वर्षों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह ईंधन देश की परिवहन व्यवस्था में कितनी बड़ी भूमिका निभाता है।