लेबनान पर हमलों से भड़का इजरायल
इजरायल और लेबनान के बीच संघर्ष एक बार फिर तेज हो गया है। चार इजरायली सैनिकों की मौत के बाद इजरायल के नेताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। जवाबी हवाई हमलों में लेबनान में कई लोगों की जान गई है, जबकि अमेरिका-ईरान समझौते पर भी संकट के बादल मंडराने लगे हैं।
दि राइजिंग न्यूज़ | येरूशलम | 20 जून 2026
इजरायल और लेबनान के बीच फिर भड़का संघर्ष
मध्य पूर्व में शांति की कोशिशों के बीच इजरायल और लेबनान के बीच संघर्ष एक बार फिर तेज हो गया है। बीती रात हुई भीषण झड़पों और हमलों में इजरायल के चार सैनिकों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हुए हैं। इसके जवाब में इजरायल ने दक्षिणी लेबनान के विभिन्न इलाकों में बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए, जिनमें कम से कम 18 लोगों की मौत और 33 लोगों के घायल होने की खबर है।
हिज्बुल्लाह के हमले से बढ़ा तनाव
रिपोर्टों के अनुसार ईरान समर्थित संगठन हिज्बुल्लाह ने इजरायली सैन्य ठिकानों और सैनिकों को निशाना बनाते हुए कई हमले किए। इनमें ड्रोन और मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया। इजरायल का कहना है कि यह हाल के महीनों में हिज्बुल्लाह द्वारा किए गए सबसे बड़े हमलों में से एक है।संघर्ष का सबसे बड़ा केंद्र लितानी नदी के उत्तर में स्थित अली अल-ताहेर पहाड़ी क्षेत्र रहा, जहां दोनों पक्षों के बीच भारी लड़ाई हुई।
लेबनान में भारी तबाही
इजरायली हवाई हमलों का सबसे अधिक असर दक्षिणी लेबनान के कई कस्बों और गांवों में देखा गया। टायर शहर के पास स्थित हारौफ गांव में भारी तबाही हुई, जहां कई इमारतें क्षतिग्रस्त हो गईं।स्थानीय अधिकारियों के अनुसार मलबे में अभी भी कई लोगों के फंसे होने की आशंका है। राहत और बचाव कार्य भी लगातार हो रही बमबारी के कारण प्रभावित हो रहे हैं।
बेन-ग्वीर का विवादित बयान
चार सैनिकों की मौत के बाद इजरायल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-ग्वीर ने बेहद कड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि इजरायल को अब सीमित जवाबी कार्रवाई से आगे बढ़कर आतंकवादी ढांचे को पूरी तरह समाप्त करना चाहिए।सोशल मीडिया पर जारी अपने बयान में उन्होंने कहा कि इजरायली नागरिकों पर हुए हमलों का जवाब सख्ती से दिया जाना चाहिए। उनके इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई बहस छेड़ दी है।
अमेरिका-ईरान समझौते पर खतरा
यह संघर्ष ऐसे समय में बढ़ा है जब हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए एक महत्वपूर्ण समझौता हुआ था। इस समझौते का उद्देश्य क्षेत्रीय संघर्षों को सीमित करना और व्यापक युद्ध की संभावना को रोकना था।लेबनान में बढ़ती हिंसा इस समझौते को कमजोर कर सकती है और क्षेत्र में फिर से अस्थिरता बढ़ा सकती है।
फ्रांस ने अमेरिका से की अपील
फ्रांस ने अमेरिका से आग्रह किया है कि वह इजरायल पर दबाव बनाए ताकि लेबनान में सैन्य कार्रवाई कम हो सके। फ्रांसीसी अधिकारियों का मानना है कि लगातार बढ़ते हमले पूरे क्षेत्र को बड़े युद्ध की ओर धकेल सकते हैं।यूरोपीय देशों ने भी दोनों पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के रास्ते पर लौटने की अपील की है।
अमेरिका और इजरायल के बीच मतभेद
संघर्ष के बीच अमेरिका और इजरायल के संबंधों में भी मतभेद उभरकर सामने आए हैं। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने संकेत दिया कि क्षेत्रीय हालात को संभालने के लिए सभी पक्षों को अधिक जिम्मेदारी दिखानी होगी।युद्ध को लेकर वॉशिंगटन और तेल अवीव की रणनीतियों में अंतर दिखाई दे रहा है, जिससे कूटनीतिक चुनौतियां बढ़ सकती हैं।
दक्षिणी लेबनान में सैन्य मौजूदगी पर विवाद
इजरायल ने संकेत दिया है कि वह दक्षिणी लेबनान में अपनी सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना चाहता है। इजरायली नेतृत्व का कहना है कि यह कदम उत्तरी इजरायल को संभावित हमलों से सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक है।वहीं लेबनान और कई अंतरराष्ट्रीय पक्ष इसे क्षेत्रीय संप्रभुता से जुड़ा मुद्दा मान रहे हैं।
ईरान ने बातचीत के संकेत दिए
ईरान के सर्वोच्च नेतृत्व की ओर से भी हालात पर प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने संवाद और कूटनीतिक प्रयासों के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि बातचीत का अर्थ आत्मसमर्पण नहीं होता।विश्लेषकों का मानना है कि ईरान क्षेत्रीय तनाव कम करने के लिए बातचीत का रास्ता खुला रखना चाहता है, हालांकि उसके सहयोगी संगठनों की गतिविधियां स्थिति को जटिल बना रही हैं।
सीजफायर की उम्मीद बरकरार
तनाव के बावजूद कूटनीतिक स्तर पर संघर्ष विराम को लेकर प्रयास जारी हैं। अमेरिकी और क्षेत्रीय मध्यस्थों की मदद से दोनों पक्षों के बीच बातचीत की संभावनाएं बनी हुई हैं।हालांकि जमीनी हालात अभी भी बेहद संवेदनशील बने हुए हैं और आने वाले दिनों में यह तय होगा कि क्षेत्र शांति की ओर बढ़ता है या फिर संघर्ष और अधिक व्यापक रूप लेता है।