क्या 'एंटी-धुरंधर' है 'मैं वापस आऊंगा'
इम्तियाज अली की फिल्म मैं वापस आऊंगा को सोशल मीडिया पर कुछ यूज़र्स ने “एंटी-धुरंधर” बताकर बहस छेड़ दी है। फिल्म को लेकर यह दावा किया जा रहा है कि यह पाकिस्तान के प्रति नरम रुख दिखाती है, जबकि फिल्म की कहानी बंटवारे के दर्द और बिछड़े प्रेम की भावनात्मक दास्तान पर आधारित है। इसी मुद्दे पर ऑनलाइन बहस तेज हो गई है।
दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 21 जून 2026
सोशल मीडिया पर शुरू हुई नई बहस
इम्तियाज अली की नई फिल्म मैं वापस आऊंगा को लेकर सोशल मीडिया पर एक नई बहस छिड़ गई है। कुछ यूज़र्स और कॉमेडियन विक्रमजीत सिंह ने इसे “एंटी-धुरंधर” फिल्म बताकर चर्चा को और तेज कर दिया है। इसके बाद फिल्म को लेकर पक्ष और विपक्ष में राय बंट गई है।
‘धुरंधर’ बनाम ‘मैं वापस आऊंगा’ की तुलना
बहस तब और बढ़ी जब धुरंधर के समर्थकों ने इस टिप्पणी को फिल्म के खिलाफ माना। कई लोगों ने दोनों फिल्मों की तुलना करते हुए इसे विचारधारा का टकराव बताया, हालांकि आलोचकों का कहना है कि यह तुलना फिल्म की कहानी को गलत तरीके से पेश कर रही है।
फिल्म की कहानी बंटवारे की पृष्ठभूमि पर
फिल्म मैं वापस आऊंगा एक 95 वर्षीय व्यक्ति की कहानी दिखाती है, जो अपने अधूरे प्रेम और बंटवारे के दर्द को याद करता है। कहानी में पाकिस्तान की मौजूदा राजनीति नहीं, बल्कि बंटवारे के समय उजड़े परिवारों की भावनाएं दिखाई गई हैं।
किरदारों के जरिए प्रेम और दर्द की कहानी
फिल्म में सिख लड़के और मुस्लिम लड़की की प्रेम कहानी को केंद्र में रखा गया है, जो बंटवारे के कारण अधूरी रह जाती है। फिल्म धर्म से अधिक इंसानी भावनाओं और खोए हुए रिश्तों की त्रासदी को दिखाती है।
सोशल मीडिया पर गलतफहमी का असर
कई लोगों ने फिल्म को सिर्फ सोशल मीडिया पोस्ट्स के आधार पर जज किया, जिससे गलतफहमी और विवाद बढ़ गया। फिल्म देखने से पहले ही उस पर राय बना लेने की प्रवृत्ति पर भी सवाल उठ रहे हैं।
फिल्मकार की दृष्टि पर बहस
इम्तियाज अली की फिल्मों को हमेशा भावनात्मक और मानवीय दृष्टिकोण के लिए जाना जाता है। इस फिल्म में भी उन्होंने बंटवारे को राजनीतिक नजरिए से नहीं बल्कि व्यक्तिगत दर्द की कहानी के रूप में दिखाने की कोशिश की है।
निष्कर्ष की ओर बढ़ता विवाद
फिलहाल यह विवाद सोशल मीडिया तक सीमित है, लेकिन फिल्म को लेकर राय दो हिस्सों में बंटी हुई है। एक तरफ इसे संवेदनशील कहानी माना जा रहा है, तो दूसरी तरफ इसे “एंटी-धुरंधर” टैग देकर आलोचना की जा रही है।