मिसाइल हमलों के बीच कच्चे तेल में बड़ा उछाल, महंगाई बढ़ने का खतरा

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है। बंदर अब्बास पोर्ट पर अमेरिकी हमले और ईरानी पलटवार के बाद दुनिया में युद्ध और महंगाई का डर बढ़ गया है।

मिसाइल हमलों के बीच कच्चे तेल में बड़ा उछाल, महंगाई बढ़ने का खतरा

दि राइजिंग न्यूज़। नई दिल्ली। 29 मई 2026

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। दोनों देशों के बीच हुए ताबड़तोड़ हमलों के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ा उछाल देखने को मिला है। हालात ऐसे बनते दिख रहे हैं कि दुनिया एक बार फिर बड़े युद्ध और वैश्विक आर्थिक संकट के खतरे के बीच खड़ी नजर आ रही है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते संघर्ष का असर अब सीधे दुनिया की अर्थव्यवस्था पर दिखाई देने लगा है। खासकर तेल आयात करने वाले देशों में चिंता का माहौल बन गया है।


बंदर अब्बास पोर्ट पर अमेरिकी हमला

रिपोर्ट्स के मुताबिक बुधवार रात अमेरिका ने ईरान के अहम बंदर अब्बास पोर्ट पर हवाई हमला किया। बताया जा रहा है कि अमेरिकी सेना ने कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए मिसाइल और ड्रोन अटैक किए। अमेरिकी कार्रवाई के बाद ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने भी पलटवार का दावा किया है। ईरानी सेना ने कहा कि अमेरिकी एयरबेस को निशाना बनाकर जवाबी हमला किया गया है। हालांकि अब तक किसी बड़े नुकसान की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन दोनों देशों के बीच बढ़ता तनाव पूरी दुनिया को डरा रहा है।


कच्चे तेल की कीमतों में बड़ा उछाल

अमेरिका-ईरान संघर्ष का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर दिखाई दिया। पिछले कुछ दिनों से गिर रही क्रूड ऑयल की कीमतें अचानक तेजी से ऊपर चढ़ गईं। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत करीब 4 फीसदी उछलकर 98 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई, जबकि डब्ल्यूटीआई क्रूड भी 92 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया। हालांकि कीमतें अभी 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे हैं, लेकिन विशेषज्ञ मान रहे हैं कि अगर तनाव और बढ़ा तो तेल की कीमतों में बड़ा विस्फोट हो सकता है।


भारत समेत कई देशों पर बढ़ेगा असर

तेल की कीमतों में उछाल का सबसे ज्यादा असर उन देशों पर पड़ता है जो आयातित तेल पर निर्भर हैं। भारत अपनी जरूरत का 80 फीसदी से ज्यादा कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है। ऐसे में अगर तेल की कीमतें लगातार बढ़ती हैं तो पेट्रोल-डीजल महंगा हो सकता है। इसके साथ ही ट्रांसपोर्ट, खाद्य पदार्थ और रोजमर्रा की चीजों की कीमतों में भी बड़ा असर देखने को मिल सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि मिडिल ईस्ट में युद्ध जैसी स्थिति बनने पर वैश्विक महंगाई फिर से बेकाबू हो सकती है।


पाकिस्तान की कोशिशें भी बेअसर

रिपोर्ट्स के अनुसार पाकिस्तान समेत कई देशों ने अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता कराने की कोशिश की, लेकिन अब तक कोई बड़ी सफलता नहीं मिल पाई है। दोनों देशों की ओर से लगातार आक्रामक बयानबाजी और सैन्य कार्रवाई ने हालात को और ज्यादा खतरनाक बना दिया है। अमेरिका और ईरान का यह टकराव सिर्फ दो देशों का विवाद नहीं रह गया है, बल्कि अब इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा पर दिखाई देने लगा है।सबसे बड़ी चिंता यह है कि अगर यह संघर्ष लंबा चला तो दुनिया एक नए तेल संकट और भारी महंगाई की चपेट में आ सकती है। भारत जैसे देशों के लिए आने वाले दिन बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हो सकते हैं।