सीट नहीं मिली तो फैलाई बम की अफवाह

लखनऊ के ऐशबाग रेलवे स्टेशन पर ट्रेन में सीट न मिलने से नाराज एक युवक ने बम होने की झूठी सूचना फैला दी। अफवाह के बाद स्टेशन पर अफरा-तफरी मच गई। जांच में सूचना फर्जी मिलने पर पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।

सीट नहीं मिली तो फैलाई बम की अफवाह

दि राइजिंग न्यूज़ | लखनऊ | 16 जून 2026

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के ऐशबाग रेलवे स्टेशन पर उस समय हड़कंप मच गया जब एक यात्री ने ट्रेन में बम होने की अफवाह फैला दी। सूचना मिलते ही रेलवे प्रशासन, आरपीएफ और स्थानीय पुलिस की टीमें सक्रिय हो गईं और स्टेशन परिसर में सुरक्षा जांच शुरू कर दी गई।

जांच के बाद निकली सूचना फर्जी

अधिकारियों ने ट्रेन और स्टेशन परिसर की गहन तलाशी ली। बम निरोधक दस्ते और सुरक्षा एजेंसियों ने कई घंटों तक जांच की, लेकिन कहीं भी कोई संदिग्ध वस्तु या विस्फोटक नहीं मिला। इसके बाद स्पष्ट हो गया कि बम की सूचना पूरी तरह झूठी थी।

आरोपी यात्री गिरफ्तार

जांच के दौरान पुलिस ने सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान कर उसे हिरासत में लिया। पूछताछ में सामने आया कि युवक ट्रेन में सीट न मिलने से नाराज था। गुस्से में उसने बम होने की झूठी सूचना देकर रेलवे प्रशासन को भ्रमित करने की कोशिश की।

स्टेशन पर मची अफरा तफरी

अफवाह फैलते ही यात्रियों में दहशत का माहौल बन गया। कई लोग प्लेटफॉर्म छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर भागने लगे। सुरक्षा एजेंसियों को तत्काल कार्रवाई करनी पड़ी, जिससे कुछ समय के लिए रेलवे संचालन भी प्रभावित हुआ।

रेलवे और पुलिस ने दी चेतावनी

रेलवे अधिकारियों ने कहा कि बम या किसी अन्य सुरक्षा खतरे से जुड़ी झूठी सूचना देना गंभीर अपराध है। ऐसी हरकतें न केवल सुरक्षा एजेंसियों के संसाधनों की बर्बादी करती हैं, बल्कि हजारों यात्रियों की जान को भी खतरे में डाल सकती हैं।

कानूनी कार्रवाई शुरू

पुलिस ने आरोपी के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। अधिकारियों का कहना है कि झूठी सूचना फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति ऐसी गैरजिम्मेदाराना हरकत करने का साहस न कर सके।

सुरक्षा व्यवस्था पर फिर जोर

घटना के बाद रेलवे सुरक्षा एजेंसियों ने यात्रियों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत अधिकारियों को दें, लेकिन अफवाह फैलाने से बचें। रेलवे का कहना है कि यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और ऐसे मामलों में शून्य सहनशीलता की नीति अपनाई जाएगी।