बंदरों के बहाने गहनों की गुत्थी
उत्तर प्रदेश के लखीमपुर में थाने के मालखाने से गायब हुए सोने के आभूषणों का मामला चर्चा में है। पुलिस ने दावा किया कि बारिश के बाद छत पर सुखाई गई पोटली को बंदरों ने फाड़ दिया और गहने गायब हो गए। अदालत ने इस दावे पर सवाल उठाए हैं और मामले में कई विसंगतियां सामने आई हैं।
दि राइजिंग न्यूज़ | लखीमपुर | 20 जून 2026
थाने के मालखाने से गायब हुए आभूषण
उत्तर प्रदेश के लखीमपुर जिले से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां थाने के मालखाने में सुरक्षित रखे गए सोने के आभूषणों के गायब होने को लेकर पुलिस और अदालत के बीच सवालों का सिलसिला जारी है। पुलिस ने अदालत को बताया कि बारिश के कारण भीग गई एक पोटली को सुखाने के लिए छत पर रखा गया था, जहां बंदरों ने उसे फाड़ दिया और आभूषण बिखर गए। बाद में गहने नहीं मिल सके।
दहेज हत्या के पुराने मुकदमे से जुड़ा मामला
यह पूरा मामला वर्ष 2007 में दर्ज एक दहेज हत्या के मुकदमे से जुड़ा हुआ है। मामले में जब अदालत ने आरोपी पति को बरी कर दिया तो उसने अपने परिवार के आभूषण वापस लेने के लिए आवेदन किया। इसी दौरान मालखाने में जमा अंगूठी, नथ, चूड़ियां और हार के बारे में जानकारी मांगी गई। जवाब में पुलिस ने दावा किया कि वर्ष 2013 में हुई एक घटना के दौरान ये आभूषण गायब हो गए थे।
अदालत ने जताई कहानी पर शंका
जिला अदालत ने पुलिस की दलील पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अदालत ने कहा कि सोने के आभूषणों को बारिश के बाद सुखाने के लिए छत पर रखने का तर्क तर्कसंगत नहीं लगता क्योंकि सोना पानी से खराब नहीं होता। अदालत ने यह भी कहा कि यदि मालखाने में अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य भी मौजूद थे तो उन्हें भी खुले में रखना गंभीर लापरवाही मानी जाएगी।
जांच में सामने आईं कई विसंगतियां
मामले की जांच के दौरान रिकॉर्ड में दर्ज नामों और पुलिस के हालिया बयानों में अंतर सामने आया है। अदालत के आदेश में जिन मालखाना प्रभारियों का उल्लेख किया गया, उनके नाम पुलिस द्वारा बाद में जारी जानकारी से मेल नहीं खाते। इससे पूरे मामले की पारदर्शिता पर सवाल उठने लगे हैं।
पुलिस ने दाखिल की समापन रिपोर्ट
पुलिस ने अब इस मामले में समापन रिपोर्ट दाखिल करते हुए कहा है कि उस समय के संबंधित मालखाना प्रभारी की मृत्यु हो चुकी है और इतने पुराने मामले की विस्तृत जांच संभव नहीं है। हालांकि इस दावे को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं क्योंकि रिकॉर्ड में अलग-अलग नाम सामने आए हैं।
पीड़ित पक्ष ने उठाए गंभीर प्रश्न
पीड़ित परिवार की ओर से कहा गया है कि मामले में लगातार अलग-अलग कहानियां सामने आ रही हैं। परिवार का आरोप है कि वास्तविक जिम्मेदार लोगों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। उनका कहना है कि न तो उन्हें आभूषणों का मुआवजा मिला और न ही मामले में संतोषजनक कार्रवाई हुई।
स्वतंत्र जांच की उठी मांग
जब किसी मामले में पुलिस रिकॉर्ड और आधिकारिक बयानों में अंतर दिखाई दे तो स्वतंत्र जांच आवश्यक हो जाती है। विशेषज्ञों ने कहा कि मालखाने में रखी गई वस्तुओं का पूरा रिकॉर्ड होना चाहिए और यदि आभूषण गायब हुए हैं तो जिम्मेदार लोगों की पहचान की जानी चाहिए।
प्रशासनिक जवाबदेही पर बहस
इस पूरे प्रकरण ने पुलिस मालखानों की सुरक्षा व्यवस्था और जवाबदेही को लेकर नई बहस छेड़ दी है। सवाल यह भी उठ रहा है कि यदि न्यायालय के आदेश के बाद भी मामले की स्पष्ट तस्वीर सामने नहीं आ रही है तो आम नागरिकों के भरोसे पर इसका क्या असर पड़ेगा। फिलहाल यह मामला कानूनी और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना हुआ है।