भारत में होने वाला ब्रिक्स सम्मेलन क्यों बना दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक चर्चा रूस-चीन-भारत की तिकड़ी पर टिकी वैश्विक नजर

भारत में होने वाला ब्रिक्स सम्मेलन 2026 वैश्विक राजनीति का बड़ा केंद्र बनता जा रहा है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के शामिल होने की संभावना के बीच पूरी दुनिया की नजर भारत पर टिकी है। यह सम्मेलन वैश्विक शक्ति संतुलन और नई अंतरराष्ट्रीय रणनीति के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।

भारत में होने वाला ब्रिक्स सम्मेलन क्यों बना दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक चर्चा  रूस-चीन-भारत की तिकड़ी पर टिकी वैश्विक नजर

दि राइजिंग न्यूज  | नई दिल्ली 20  मई 2026

भारत में होने जा रहा है दुनिया का बड़ा रणनीतिक सम्मेलन

भारत इस वर्ष दुनिया के सबसे प्रभावशाली बहुपक्षीय मंचों में से एक ब्रिक्स सम्मेलन की मेजबानी करने जा रहा है। वर्ष 2026 में आयोजित होने वाला यह सम्मेलन केवल एक सामान्य अंतरराष्ट्रीय बैठक नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे बदलते वैश्विक शक्ति संतुलन का बड़ा संकेत माना जा रहा है।इस सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के शामिल होने की संभावना ने पूरी दुनिया का ध्यान भारत की ओर खींच दिया है। यदि तीनों देशों के नेता एक मंच पर दिखाई देते हैं, तो यह अंतरराष्ट्रीय राजनीति में बड़ा संदेश माना जाएगा।

क्यों खास माना जा रहा है यह सम्मेलन

ब्रिक्स समूह दुनिया की उन बड़ी अर्थव्यवस्थाओं का मंच है जो पश्चिमी देशों के प्रभाव से अलग अपनी आर्थिक और रणनीतिक ताकत को मजबूत करना चाहती हैं। भारत, रूस और चीन इस समूह के सबसे प्रभावशाली सदस्य माने जाते हैं।भारत में होने वाले सम्मेलन में इन देशों के बीच मजबूत तालमेल दिखाई देता है, तो यह वैश्विक राजनीति के नए दौर की शुरुआत का संकेत हो सकता है। खासतौर पर ऐसे समय में जब दुनिया कई युद्धों और आर्थिक तनावों से गुजर रही है।

रूस और भारत के रिश्ते लगातार मजबूत

भारत और रूस के बीच दशकों पुराने रणनीतिक और रक्षा संबंध रहे हैं। रूस लंबे समय से भारत को रक्षा उपकरण, लड़ाकू विमान और मिसाइल प्रणाली उपलब्ध कराता रहा है। अब दोनों देश संयुक्त उत्पादन और तकनीकी सहयोग को भी तेजी से आगे बढ़ा रहे हैं।राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पश्चिमी दबाव के बावजूद भारत ने रूस के साथ अपने संबंधों को संतुलित तरीके से बनाए रखा है। यही वजह है कि आने वाले सम्मेलन में दोनों देशों की साझेदारी पर दुनिया की खास नजर रहने वाली है।

 चीन के साथ बदलते रिश्तों पर भी नजर

पूर्वी लद्दाख विवाद के बाद भारत और चीन के रिश्तों में काफी तनाव आ गया था। सीमा पर कई बार सैन्य टकराव जैसी स्थिति बनी और दोनों देशों के संबंधों में दूरी दिखाई दी।लेकिन हाल के महीनों में बातचीत और कूटनीतिक प्रयासों के जरिए तनाव कम करने की कोशिशें तेज हुई हैं। इसी वजह से अब यह संभावना जताई जा रही है कि भारत में होने वाला सम्मेलन दोनों देशों के रिश्तों में नई शुरुआत का संकेत दे सकता है।

रक्षा मंत्रियों की बैठक से मिले संकेत

हाल ही में किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन की बैठक के दौरान भारत, रूस और चीन के रक्षा मंत्रियों के बीच अलग-अलग बातचीत हुई थी। इन बैठकों को भविष्य के बड़े राजनीतिक संकेत के रूप में देखा गया।इन बैठकों में सीमा विवाद को नियंत्रित करने और सहयोग बढ़ाने पर सकारात्मक चर्चा हुई। यही कारण है कि अब ब्रिक्स सम्मेलन को लेकर उम्मीदें और ज्यादा बढ़ गई हैं।

दुनिया क्यों देख रही है भारत की ओर

भारत आज ऐसी स्थिति में पहुंच चुका है जहां वह पश्चिमी देशों के साथ भी मजबूत संबंध बनाए हुए है और रूस तथा चीन जैसे देशों के साथ भी संवाद जारी रखे हुए है। यही भारत की स्वतंत्र और संतुलित विदेश नीति की सबसे बड़ी पहचान मानी जा रही है।राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि भारत अब केवल क्षेत्रीय शक्ति नहीं रहा, बल्कि वैश्विक रणनीति तय करने वाले प्रमुख देशों में शामिल हो चुका है। ब्रिक्स सम्मेलन इसकी सबसे बड़ी झलक साबित हो सकता है।

डॉलर पर निर्भरता कम करने की तैयारी

ब्रिक्स देशों के बीच स्थानीय मुद्रा में व्यापार बढ़ाने और नए भुगतान तंत्र बनाने पर भी चर्चा चल रही है। माना जा रहा है कि सम्मेलन में इस मुद्दे को गंभीरता से उठाया जा सकता है।यदि ऐसा होता है तो यह वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव माना जाएगा। कई विशेषज्ञ इसे अमेरिकी डॉलर के प्रभाव को चुनौती देने की दिशा में बड़ा कदम मान रहे हैं।

पाकिस्तान के लिए बढ़ सकती है चिंता

भारत, रूस और चीन की बढ़ती नजदीकी को पाकिस्तान के लिए भी चिंता की नजर से देखा जा रहा है। पाकिस्तान लंबे समय से चीन को अपना सबसे करीबी सहयोगी मानता रहा है।लेकिन यदि चीन भारत के साथ रिश्ते सुधारने की दिशा में आगे बढ़ता है, तो इससे क्षेत्रीय राजनीति में पाकिस्तान की स्थिति कमजोर हो सकती है। यही कारण है कि इस सम्मेलन पर इस्लामाबाद की भी करीबी नजर बनी हुई है।

 क्या बदल सकता है वैश्विक शक्ति संतुलन

भारत, रूस और चीन के नेता सम्मेलन के दौरान अलग बैठक करते हैं, तो यह दुनिया को बड़ा राजनीतिक संदेश देगा। इससे यह संकेत जाएगा कि वैश्विक शक्ति अब केवल अमेरिका और पश्चिमी देशों तक सीमित नहीं रह गई है।ब्रिक्स सम्मेलन आने वाले समय में दुनिया की नई आर्थिक और राजनीतिक दिशा तय करने वाला मंच बन सकता है। ऐसे में भारत में होने वाला यह सम्मेलन केवल कूटनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि वैश्विक राजनीति के भविष्य का संकेत माना जा रहा है।