उत्तराखंड चुनावी रण दिलचस्प

उत्तराखंड विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। भारतीय जनता पार्टी सत्ता की हैट्रिक लगाने की तैयारी में है, जबकि कांग्रेस बेरोजगारी, पलायन और भर्ती घोटालों जैसे मुद्दों पर सरकार को घेर रही है। उत्तराखंड क्रांति दल भी क्षेत्रीय मुद्दों के सहारे अपनी सियासी जमीन मजबूत करने में जुटा है।

उत्तराखंड चुनावी रण दिलचस्प

दि राइजिंग न्यूज़ | देहरादून | 20 जून 2026

उत्तराखंड में चुनावी माहौल गरमाया

उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज हो गई हैं। चुनाव में अब एक वर्ष से भी कम समय बचा है और सभी प्रमुख राजनीतिक दल अपनी रणनीतियों को अंतिम रूप देने में जुट गए हैं। सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी का लक्ष्य लेकर मैदान में उतर रही है, जबकि कांग्रेस दस वर्षों से चले आ रहे राजनीतिक सूखे को समाप्त करने की कोशिश कर रही है। वहीं उत्तराखंड क्रांति दल भी राज्य आंदोलन से जुड़े मुद्दों को लेकर अपनी मौजूदगी मजबूत करने में जुटा है।

सत्ता की हैट्रिक पर भाजपा की नजर

भारतीय जनता पार्टी ने वर्ष 2022 में राज्य के राजनीतिक इतिहास में पहली बार लगातार दूसरी बार सरकार बनाकर नया रिकॉर्ड बनाया था। अब पार्टी तीसरी बार सत्ता हासिल कर नया इतिहास रचने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में पार्टी विकास कार्यों, धार्मिक पर्यटन, समान नागरिक संहिता और आधारभूत ढांचे के विस्तार को प्रमुख उपलब्धियों के रूप में जनता के बीच रख रही है।पार्टी ने उन विधानसभा क्षेत्रों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया है जहां पिछले चुनाव में उसे हार का सामना करना पड़ा था। वरिष्ठ नेताओं और जनप्रतिनिधियों को इन क्षेत्रों में भेजकर संगठन को मजबूत करने और जनता से संवाद बढ़ाने की रणनीति अपनाई जा रही है।

कांग्रेस ने खोला मोर्चा

मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस इस बार पूरी आक्रामकता के साथ चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है। पार्टी बेरोजगारी, भर्ती परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक, पहाड़ों से बढ़ते पलायन, स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति और अंकिता भंडारी हत्याकांड जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठा रही है।प्रदेश नेतृत्व लगातार जनसंपर्क अभियान चला रहा है और कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने में जुटा है। हालांकि संगठनात्मक ढांचे को लेकर पार्टी के भीतर चुनौतियां भी बनी हुई हैं। इसके बावजूद कांग्रेस नेतृत्व का दावा है कि जनता परिवर्तन चाहती है और आगामी चुनाव में इसका लाभ पार्टी को मिलेगा।

क्षेत्रीय दल भी दिखा रहा ताकत

उत्तराखंड क्रांति दल भी इस चुनाव में अपनी भूमिका मजबूत करने के प्रयास में है। पार्टी स्थायी राजधानी, मूल निवास और सख्त भू-कानून जैसे मुद्दों को लेकर जनता के बीच पहुंच रही है। दल का कहना है कि राज्य निर्माण के मूल उद्देश्यों को अभी तक पूरी तरह लागू नहीं किया गया है और इन्हीं सवालों को वह चुनावी विमर्श के केंद्र में लाना चाहता है।पार्टी नेतृत्व का दावा है कि कई विधानसभा क्षेत्रों में उसका जनाधार बढ़ रहा है और युवा, महिलाएं तथा पूर्व सैनिक बड़ी संख्या में उसके साथ जुड़ रहे हैं।

कुमाऊं और गढ़वाल पर सबकी नजर

उत्तराखंड की राजनीति में कुमाऊं और गढ़वाल दोनों क्षेत्रों की निर्णायक भूमिका रहती है। पिछले चुनाव में भाजपा को दोनों क्षेत्रों में बढ़त मिली थी, जबकि कांग्रेस ने कुछ इलाकों में कड़ी टक्कर दी थी। इस बार भी दोनों दल इन क्षेत्रों में पूरी ताकत झोंक रहे हैं।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव परिणाम काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगा कि कौन सा दल इन क्षेत्रों की स्थानीय समस्याओं और जनभावनाओं को बेहतर ढंग से समझकर जनता तक पहुंचा पाता है।

मुद्दों पर होगी सीधी टक्कर

भाजपा जहां विकास, स्थिर नेतृत्व और मजबूत संगठन को अपनी ताकत मान रही है, वहीं कांग्रेस सरकार की नीतियों और प्रशासनिक फैसलों को लेकर सवाल उठा रही है। दूसरी ओर उत्तराखंड क्रांति दल राज्य के मूल मुद्दों को केंद्र में रखकर जनता का समर्थन जुटाने का प्रयास कर रहा है।

दिलचस्प होने जा रही चुनावी जंग

राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार आगामी विधानसभा चुनाव राज्य के हालिया इतिहास के सबसे रोचक चुनावों में से एक हो सकते हैं। भाजपा के सामने सत्ता विरोधी माहौल की चुनौती होगी, जबकि कांग्रेस को अपनी संगठनात्मक एकजुटता साबित करनी होगी। वहीं क्षेत्रीय दलों का प्रदर्शन भी कई सीटों पर परिणामों को प्रभावित कर सकता है।आने वाले महीनों में चुनावी अभियान और तेज होगा तथा उत्तराखंड की जनता तय करेगी कि सत्ता की बागडोर एक बार फिर भाजपा के हाथ में रहेगी या राज्य में राजनीतिक बदलाव का नया अध्याय लिखा जाएगा।