राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा रद्द: 11 साल बाद फिर सामने आया प्रश्नपत्र लीक कांड, परीक्षा व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल

राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा 2026 को प्रश्नपत्र लीक की आशंका के बाद रद्द कर दिया गया है। 22 लाख से अधिक विद्यार्थियों से जुड़ी इस परीक्षा के रद्द होने से देशभर में हड़कंप मच गया है। 11 साल पहले हुई पूर्व चिकित्सीय प्रवेश परीक्षा लीक घटना के बाद भी व्यवस्था में सुधार नहीं होने पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा रद्द: 11 साल बाद फिर सामने आया प्रश्नपत्र लीक कांड, परीक्षा व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल

दि राइजिंग न्यूज डेस्क |  13 मई 2026

देश की सबसे बड़ी चिकित्सीय प्रवेश परीक्षा को अचानक रद्द किए जाने के बाद लाखों अभ्यर्थियों और अभिभावकों के बीच भारी नाराजगी और चिंता का माहौल है। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी द्वारा लिया गया यह फैसला केवल एक परीक्षा रद्द करने तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि यह देश की परीक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। करोड़ों युवाओं के भविष्य से जुड़ी इस परीक्षा में प्रश्नपत्र लीक की आशंका सामने आने के बाद सरकार और जांच एजेंसियां सक्रिय हो गई हैं। अब 11 साल बाद एक बार फिर वैसी ही स्थिति बनना यह साबित करता है कि देश की परीक्षा प्रणाली में अब भी कई गंभीर कमियां मौजूद हैं। लाखों विद्यार्थियों की मेहनत के बीच प्रश्नपत्र माफियाओं का सक्रिय होना व्यवस्था की विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल माना जा रहा है।


कैसे सामने आया पूरा मामला

राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी को पहली बार 7 मई को इस परीक्षा में गड़बड़ी की जानकारी मिली थी। जांच के दौरान एक ऐसी पीडीएफ फाइल सामने आई जो संदेश माध्यमों पर तेजी से फैल रही थी। इस फाइल में मौजूद कई प्रश्न वास्तविक परीक्षा के प्रश्नों से मेल खाते पाए गए। शुरुआती जांच के बाद एजेंसी ने मामले को तुरंत जांच एजेंसियों के हवाले कर दिया। जांच में सामने आया कि यह तथाकथित अनुमानित प्रश्नपत्र कई राज्यों में फैलाया गया था। राजस्थान के कोचिंग केंद्रों और कुछ विद्यार्थियों के बीच इसे बड़ी रकम लेकर बेचे जाने की बात भी सामने आई। पुलिस और विशेष जांच दल ने कई लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि यह केवल स्थानीय स्तर का मामला नहीं बल्कि एक बड़ा संगठित गिरोह हो सकता है।


प्रश्नपत्र लीक का जाल कैसे फैला

जांच एजेंसियों के अनुसार यह पूरा मामला एक कथित अनुमानित प्रश्नपत्र से शुरू हुआ। यह दस्तावेज मोबाइल संदेश माध्यमों और विभिन्न समूहों में कई बार साझा किया गया था। जांच में पाया गया कि इस दस्तावेज के सैकड़ों प्रश्न वास्तविक परीक्षा से मेल खाते थे। इनमें जीव विज्ञान और रसायन विज्ञान के प्रश्न सबसे अधिक बताए जा रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार इस लीक का संबंध राजस्थान के कुछ कोचिंग केंद्रों और बाहर पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों से जुड़ा हुआ है। जांच में यह भी सामने आया कि इस कथित प्रश्नपत्र को हजारों से लेकर लाखों रुपये तक में बेचा गया। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आखिर वास्तविक प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले इन लोगों तक कैसे पहुंचा।


राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने क्यों उठाया बड़ा कदम

राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने स्पष्ट कहा है कि परीक्षा प्रक्रिया पूरी तरह प्रभावित हो चुकी थी और इसे जारी रखना ईमानदार विद्यार्थियों के साथ अन्याय होता। एजेंसी का कहना है कि यदि ऐसे हालात में परीक्षा परिणाम जारी किए जाते तो लाखों मेहनती अभ्यर्थियों का भरोसा टूट जाता। इसी कारण परीक्षा को पूरी तरह रद्द करने का कठिन फैसला लिया गया। अधिकारियों ने यह भी कहा कि इस बार किसी भी प्रकार की लापरवाही या समझौते की गुंजाइश नहीं छोड़ी जाएगी। एजेंसी ने इसे शून्य सहनशीलता की नीति बताया है। हालांकि परीक्षा रद्द होने के बाद लाखों विद्यार्थियों में मानसिक दबाव और अनिश्चितता बढ़ गई है। कई छात्र अब दोबारा परीक्षा की तैयारी को लेकर चिंता में हैं।


2015 की घटना से क्यों नहीं लिया गया सबक

वर्ष 2015 में अखिल भारतीय पूर्व चिकित्सीय प्रवेश परीक्षा को भी प्रश्नपत्र लीक के कारण रद्द करना पड़ा था। उस समय कुछ आरोपी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के जरिए परीक्षा में नकल कराने की कोशिश करते पकड़े गए थे। सर्वोच्च न्यायालय ने परीक्षा की पवित्रता बनाए रखने के लिए दोबारा परीक्षा कराने का आदेश दिया था  उस घटना के बाद उम्मीद की जा रही थी कि देश की परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह सुरक्षित बनाया जाएगा। लेकिन अब 11 साल बाद फिर उसी तरह का मामला सामने आने से यह सवाल उठ रहा है कि आखिर सुधारों को पूरी तरह लागू क्यों नहीं किया गया। शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि केवल समितियां बनाना काफी नहीं, बल्कि उनकी सिफारिशों को जमीन पर लागू करना सबसे जरूरी है।


सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद कैसे हुआ लीक

राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने दावा किया था कि इस बार परीक्षा के लिए कई आधुनिक सुरक्षा उपाय अपनाए गए थे। परीक्षा केंद्रों पर जैविक पहचान जांच, निगरानी कैमरे, संकेत अवरोधक उपकरण और प्रश्नपत्र ले जाने के लिए विशेष सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई थी। इसके बावजूद प्रश्नपत्र बाहर पहुंचना सुरक्षा व्यवस्था की बड़ी विफलता माना जा रहा है   जब तक परीक्षा पूरी तरह संगणक आधारित नहीं होगी, तब तक इस तरह की घटनाओं का खतरा बना रहेगा। कई शिक्षा विशेषज्ञ वर्षों से मांग कर रहे हैं कि इतनी बड़ी परीक्षा को अलग-अलग चरणों में संगणक माध्यम से कराया जाए ताकि प्रश्नपत्र लीक की संभावना कम हो सके।


लाखों विद्यार्थियों के भविष्य पर असर

इस परीक्षा में देशभर के 22 लाख से अधिक विद्यार्थियों ने भाग लिया था। अधिकांश अभ्यर्थी कई वर्षों से इस परीक्षा की तैयारी कर रहे थे। अचानक परीक्षा रद्द होने से विद्यार्थियों के बीच मानसिक तनाव और भविष्य को लेकर असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है। कई छात्र और अभिभावक अब परीक्षा प्रणाली में भरोसे की कमी महसूस कर रहे हैं  लगातार प्रश्नपत्र लीक की घटनाएं मेहनती विद्यार्थियों के मनोबल को तोड़ती हैं। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के छात्र सबसे अधिक प्रभावित होते हैं, क्योंकि वे वर्षों की मेहनत और खर्च के बाद ऐसी परिस्थितियों का सामना करते हैं। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी हुई है कि दोबारा परीक्षा कब कराई जाएगी और क्या इस बार निष्पक्षता सुनिश्चित हो पाएगी।


अब आगे क्या होगा

राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी जल्द ही दोबारा परीक्षा की नई तारीखों की घोषणा कर सकती है। एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि विद्यार्थियों को दोबारा आवेदन करने या अतिरिक्त शुल्क देने की जरूरत नहीं होगी। पुराने प्रवेश पत्र और पंजीकरण विवरण ही मान्य रहेंगे। इससे विद्यार्थियों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। वहीं केंद्रीय जांच एजेंसी अब पूरे मामले की गहराई से जांच करेगी। जांच का उद्देश्य केवल आरोपियों को पकड़ना नहीं बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए मजबूत व्यवस्था तैयार करना भी बताया जा रहा है। देशभर के विद्यार्थी और अभिभावक अब उम्मीद कर रहे हैं कि इस बार केवल बयान नहीं बल्कि ठोस सुधार देखने को मिलेंगे।