अभिषेक बनर्जी को हाईकोर्ट से राहत, लेकिन ‘गॉडफादर’ बयान पर अदालत ने लगाई कड़ी फटकार

तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी को विवादित ‘गॉडफादर’ बयान मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट से अंतरिम राहत मिली है। हालांकि अदालत ने उनके बयान को गैरजिम्मेदाराना बताते हुए कड़ी फटकार लगाई और कहा कि एक सांसद को ऐसी भाषा का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। मामले ने पश्चिम बंगाल की राजनीति को फिर गर्मा दिया है।

अभिषेक बनर्जी को हाईकोर्ट से राहत, लेकिन ‘गॉडफादर’ बयान पर अदालत ने लगाई कड़ी फटकार

दि राइजिंग न्यूज़ | कोलकाता | 21 मई 2026

तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद अभिषेक बनर्जी को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के खिलाफ दिए गए विवादित बयान के मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट से बड़ी राहत जरूर मिली, लेकिन अदालत ने उनके बयान पर कड़ी नाराजगी भी जताई। अदालत ने पश्चिम बंगाल पुलिस को फिलहाल उनके खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई करने से रोक दिया है, लेकिन साथ ही यह भी साफ कहा कि एक सांसद और बड़े राजनीतिक दल के महासचिव को इस तरह की गैरजिम्मेदाराना भाषा का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद यह मामला अब राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है।

अदालत ने कार्रवाई पर लगाई रोक

कलकत्ता हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान पश्चिम बंगाल पुलिस को निर्देश दिया कि 31 जुलाई तक अभिषेक बनर्जी के खिलाफ कोई दंडात्मक कदम न उठाया जाए। अदालत ने यह अंतरिम राहत कुछ शर्तों के साथ दी है। न्यायालय ने कहा कि अभिषेक बनर्जी को जांच में पूरा सहयोग करना होगा और किसी भी जांच प्रक्रिया से बचने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि बिना पूर्व अनुमति के विदेश यात्रा की इजाजत नहीं होगी। इसके अलावा यदि उन्हें कहीं यात्रा करनी हो तो जांच अधिकारी को कम से कम 48 घंटे पहले सूचना देना अनिवार्य रहेगा। अदालत का मानना है कि जांच प्रक्रिया प्रभावित नहीं होनी चाहिए।

गॉडफादर बयान पर अदालत की सख्त टिप्पणी

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने अभिषेक बनर्जी के बयान पर कड़ी नाराजगी जाहिर की। अदालत ने पूछा कि एक सांसद और बड़े राजनीतिक दल के नेता होने के बावजूद वह इस तरह की भाषा का इस्तेमाल कैसे कर सकते हैं। न्यायालय ने कहा कि चुनाव जैसे संवेदनशील समय में ऐसे बयान माहौल को और ज्यादा तनावपूर्ण बना सकते हैं।अदालत ने यह भी कहा कि पश्चिम बंगाल का राजनीतिक इतिहास चुनावी हिंसा और तनाव से जुड़ा रहा है। ऐसे में नेताओं को ज्यादा जिम्मेदारी और संयम दिखाने की जरूरत है। न्यायालय ने टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर इस बयान के बाद हालात बिगड़ जाते तो स्थिति बेहद गंभीर हो सकती थी।

 चुनावी रैली के बयान से बढ़ा विवाद

पूरा मामला पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले दिए गए एक भाषण से जुड़ा हुआ है। चुनावी रैली के दौरान अभिषेक बनर्जी ने कहा था कि वह देखेंगे कि चुनाव परिणाम आने के बाद कौन उन्हें बचाने आता है और दिल्ली से कौन उनका ‘गॉडफादर’ बनकर सामने आता है। विपक्ष ने आरोप लगाया कि यह टिप्पणी सीधे केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को निशाना बनाकर की गई थी।इसके बाद विपक्षी दलों और भाजपा नेताओं ने इस बयान को धमकी भरा और भड़काऊ बताते हुए कड़ी आलोचना की। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि इस तरह की भाषा से राजनीतिक हिंसा भड़क सकती थी और विपक्षी कार्यकर्ताओं में डर का माहौल बन सकता था।

 अदालत में बचाव पक्ष ने क्या कहा

अभिषेक बनर्जी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बंद्योपाध्याय अदालत में पेश हुए। उन्होंने दावा किया कि उनके मुवक्किल के खिलाफ राजनीतिक दुर्भावना के तहत मामला दर्ज किया गया है। उनका कहना था कि सत्ता परिवर्तन के बाद जानबूझकर इस मामले को उछाला गया और इसे राजनीतिक हथियार बनाया जा रहा है।बचाव पक्ष ने अदालत में यह भी तर्क दिया कि बयान के बाद किसी प्रकार की हिंसा नहीं हुई और शिकायतकर्ता ने भी किसी प्रत्यक्ष घटना का उल्लेख नहीं किया है। इसलिए इस मामले में आपराधिक कार्रवाई का आधार कमजोर माना जाना चाहिए।

अदालत ने वकील को भी सुनाई खरी-खरी

सुनवाई के दौरान अदालत ने केवल अभिषेक बनर्जी ही नहीं बल्कि उनके वकील को भी सख्त शब्दों में टिप्पणी सुनाई। अदालत ने कहा कि यह केवल कानूनी तकनीकी मामला नहीं बल्कि सार्वजनिक जिम्मेदारी से जुड़ा विषय है। न्यायालय ने दोहराया कि नेताओं के शब्दों का समाज पर गहरा असर पड़ता है।अदालत ने कहा कि लोकतंत्र में राजनीतिक मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन सार्वजनिक मंचों से ऐसी भाषा का इस्तेमाल उचित नहीं माना जा सकता। हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद अब यह मामला राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बन चुका है।

 बंगाल की राजनीति में फिर बढ़ा तनाव

इस पूरे घटनाक्रम के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। भारतीय जनता पार्टी लगातार तृणमूल कांग्रेस पर हमला बोल रही है, जबकि तृणमूल इसे राजनीतिक प्रतिशोध बता रही है। दोनों दलों के बीच बयानबाजी लगातार तेज होती जा रही है।राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह विवाद और ज्यादा बढ़ सकता है। अदालत की टिप्पणी ने इस मामले को केवल कानूनी विवाद तक सीमित नहीं रहने दिया बल्कि इसे राजनीतिक मर्यादा और लोकतांत्रिक जिम्मेदारी की बहस में बदल दिया है।