शादी के तीन महीने बाद नवविवाहिता की संदिग्ध मौत, पिता को रोते हुए किया था फोन- ‘पापा मुझे बचा लो’
अमरोहा में शादी के तीन महीने बाद नवविवाहिता पुष्पेंद्री की संदिग्ध मौत ने सनसनी फैला दी। परिवार ने दहेज के लिए हत्या का आरोप लगाया है। मौत से पहले युवती ने पिता को फोन कर जान बचाने की गुहार लगाई थी।
दि राइजिंग न्यूज | अमरोहा | 21 मई 2026
उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले से एक बेहद दर्दनाक और दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहां शादी के महज तीन महीने बाद एक नवविवाहिता की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। मृतका की पहचान 19 वर्षीय पुष्पेंद्री के रूप में हुई है। परिवार का आरोप है कि दहेज की मांग को लेकर ससुराल पक्ष लगातार उसे प्रताड़ित कर रहा था। घटना से पहले युवती ने अपने पिता को फोन कर रोते हुए कहा था, “पापा मुझे यहां से ले जाओ, ये लोग मुझे मार देंगे।” कुछ ही घंटों बाद उसकी मौत की खबर परिवार तक पहुंच गई।
दहेज की मांग को लेकर होता था उत्पीड़न
मायके पक्ष के अनुसार पुष्पेंद्री की शादी इसी साल 13 फरवरी को गजरौला क्षेत्र के गांव खुमावली निवासी युवक से हुई थी। शादी के बाद से ही ससुराल पक्ष द्वारा करीब दस लाख रुपये की अतिरिक्त दहेज मांगने का दबाव बनाया जा रहा था। आरोप है कि मांग पूरी न होने पर पुष्पेंद्री के साथ मारपीट और मानसिक उत्पीड़न किया जाता था। परिवार का कहना है कि कई बार बेटी ने प्रताड़ना की जानकारी दी थी, लेकिन समाज और रिश्ते बचाने की वजह से मामला शांत कराने की कोशिश की जाती रही।
मौत से पहले पिता को किया भावुक फोन
परिजनों ने बताया कि घटना वाले दिन शाम करीब साढ़े छह बजे पुष्पेंद्री ने अपने पिता को फोन किया था। फोन पर वह लगातार रो रही थी और जान बचाने की गुहार लगा रही थी। उसने कहा था कि अगर तुरंत उसे वहां से नहीं ले जाया गया तो ससुराल वाले उसे मार देंगे। परिवार अभी कुछ समझ पाता, उससे पहले सूचना मिली कि पुष्पेंद्री का शव फंदे से लटका मिला है। इसके बाद परिवार में कोहराम मच गया और गांव में तनाव फैल गया।
हत्या कर आत्महत्या दिखाने का आरोप
मायके पक्ष ने ससुराल वालों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। परिवार का कहना है कि पहले पुष्पेंद्री की हत्या की गई और बाद में पूरे मामले को आत्महत्या दिखाने के लिए शव को फंदे पर लटका दिया गया। परिजनों ने आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग को लेकर मौके पर हंगामा भी किया। कई घंटों तक पुलिस और परिवार के बीच बहस होती रही। बाद में अधिकारियों के समझाने के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।
घटना के बाद फरार हुआ ससुराल पक्ष
बताया जा रहा है कि घटना के बाद से ससुराल पक्ष के कई लोग घर छोड़कर फरार हो गए हैं। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। क्षेत्र के वरिष्ठ अधिकारी और फोरेंसिक टीम ने मौके पर पहुंचकर साक्ष्य जुटाए हैं। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल गांव में पुलिस बल तैनात किया गया है ताकि किसी तरह का तनाव न बढ़े।
दहेज और घरेलू हिंसा पर फिर उठे सवाल
इस घटना ने एक बार फिर दहेज प्रथा और महिलाओं के खिलाफ घरेलू हिंसा जैसे गंभीर मुद्दों को सामने ला दिया है। समाज में लगातार जागरूकता अभियान चलाने के बावजूद दहेज के लिए प्रताड़ना और महिलाओं की मौत के मामले रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि केवल कानून सख्त होने से समस्या खत्म नहीं होगी, बल्कि समाज की सोच बदलने की भी जरूरत है। पुष्पेंद्री की मौत ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है।
पुलिस पर भी उठ रहे सवाल
घटना के बाद स्थानीय लोगों और परिजनों ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। परिवार का आरोप है कि अगर पहले की शिकायतों को गंभीरता से लिया जाता तो शायद पुष्पेंद्री की जान बचाई जा सकती थी। ग्रामीणों का कहना है कि दहेज प्रताड़ना की घटनाओं में अक्सर पीड़ित पक्ष की शिकायतों को नजरअंदाज कर दिया जाता है। अब इस मामले के सामने आने के बाद पुलिस पर तेजी से कार्रवाई करने का दबाव बढ़ गया है।
महिलाओं की सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता
इस घटना ने एक बार फिर महिलाओं की सुरक्षा और दहेज प्रताड़ना को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि समाज में आज भी कई महिलाएं घरेलू हिंसा और मानसिक उत्पीड़न का शिकार हो रही हैं, लेकिन डर और सामाजिक दबाव के कारण खुलकर सामने नहीं आ पातीं। ऐसे मामलों में समय रहते मदद और कानूनी सुरक्षा मिलना बेहद जरूरी माना जा रहा है।
प्रशासन पर सख्त कार्रवाई का दबाव
घटना के बाद प्रशासन पर आरोपियों को जल्द गिरफ्तार करने का दबाव बढ़ गया है। परिवार और स्थानीय लोग लगातार मांग कर रहे हैं कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों को कड़ी सजा दी जाए। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। मामले को लेकर इलाके में राजनीतिक और सामाजिक संगठनों की सक्रियता भी बढ़ती दिखाई दे रही है।