संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान की बोलती बंद, देश ने कश्मीर मुद्दे पर दिया करारा जवाब, काबुल हमले की भी दिलाई याद

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत ने पाकिस्तान को कश्मीर मुद्दे पर घेरते हुए करारा जवाब दिया। भारत ने पाकिस्तान को आतंक और नरसंहार फैलाने वाला देश बताते हुए काबुल अस्पताल हमले और 1971 के अत्याचारों की याद दिलाई।

संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान की बोलती बंद, देश ने कश्मीर मुद्दे पर दिया करारा जवाब, काबुल हमले की भी दिलाई याद

दि राइजिंग न्यूज  | 21 मई 2026

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में एक बार फिर पाकिस्तान को भारत के कड़े और तीखे जवाब का सामना करना पड़ा। ‘सशस्त्र संघर्षों में नागरिकों की सुरक्षा’ विषय पर आयोजित वार्षिक बैठक के दौरान पाकिस्तान ने एक बार फिर कश्मीर मुद्दा उठाने की कोशिश की, लेकिन भारत ने उसी मंच से उसे करारा जवाब देते हुए पूरी दुनिया के सामने पाकिस्तान के आतंकवाद और हिंसा वाले चेहरे को बेनकाब कर दिया। बैठक के दौरान पाकिस्तान की ओर से जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाया गया। इसके जवाब में संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि हरीश पर्वथनेनी ने दोटूक शब्दों में कहा कि पाकिस्तान को भारत के आंतरिक मामलों में दखल देने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि जिस देश का इतिहास नरसंहार, आतंकवाद और हिंसा से भरा पड़ा हो, वह मानवाधिकार और शांति की बात करे, यह बेहद हास्यास्पद है।

हमारे देश ने पाकिस्तान को आतंकवाद पर घेरा

भारत ने पाकिस्तान पर आरोप लगाया कि वह अपनी घरेलू विफलताओं और राजनीतिक अस्थिरता से दुनिया का ध्यान हटाने के लिए लगातार भारत विरोधी एजेंडा चलाता है। भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि पाकिस्तान लंबे समय से आतंकवाद को बढ़ावा देता आया है और सीमा पार आतंक फैलाना उसकी पुरानी नीति रही है। भारत ने कहा कि पाकिस्तान केवल झूठे प्रचार और दुष्प्रचार के जरिए अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सहानुभूति हासिल करने की कोशिश करता है, लेकिन दुनिया अब उसकी सच्चाई को समझ चुकी है।

कश्मीर पर भारत का साफ संदेश

हमारे देश ने संयुक्त राष्ट्र में स्पष्ट किया कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और आंतरिक हिस्सा है। भारत ने कहा कि पाकिस्तान बार-बार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कश्मीर मुद्दा उठाकर माहौल खराब करने की कोशिश करता है, लेकिन उसे हर बार करारा जवाब मिलता है। भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि पाकिस्तान को पहले अपने देश में मानवाधिकारों की स्थिति सुधारने और आतंकवादी संगठनों पर कार्रवाई करने की जरूरत है, बजाय इसके कि वह भारत पर बेबुनियाद आरोप लगाए।

काबुल अस्पताल हमले का भी उठाया मुद्दा

हमारे देश ने इस दौरान मार्च महीने में अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में हुए अस्पताल हमले का भी जिक्र किया। भारत ने कहा कि रमजान जैसे पवित्र महीने में पाकिस्तान द्वारा किए गए हवाई हमले में सैकड़ों निर्दोष नागरिकों की मौत हुई थी। भारतीय प्रतिनिधि ने संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि इस हमले में 269 लोगों की जान चली गई थी जबकि 122 लोग घायल हुए थे। उन्होंने कहा कि किसी अस्पताल को निशाना बनाना मानवता और अंतरराष्ट्रीय कानून दोनों के खिलाफ अपराध है। भारत ने यह भी कहा कि हमला उस समय हुआ जब लोग नमाज पढ़कर मस्जिदों से बाहर निकल रहे थे। ऐसे हमले यह दिखाते हैं कि पाकिस्तान मानवता और शांति के सिद्धांतों का कितना सम्मान करता है।

पाकिस्तान को बताया पाखंडी देश

हमारे देश ने पाकिस्तान को पाखंडी बताते हुए कहा कि जो देश खुद अपने नागरिकों पर बम बरसाता हो और आतंकवादी संगठनों को संरक्षण देता हो, वह अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवाधिकारों की दुहाई नहीं दे सकता।

भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि पाकिस्तान का इतिहास खुद उसके अपराधों की गवाही देता है। उन्होंने 1971 के ऑपरेशन सर्चलाइट का जिक्र करते हुए कहा कि उस दौरान पूर्वी पाकिस्तान, जो अब बांग्लादेश है, वहां पाकिस्तानी सेना द्वारा बड़े पैमाने पर अत्याचार किए गए थे। भारत ने कहा कि लाखों निर्दोष लोगों की हत्या, महिलाओं के साथ अत्याचार और मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन पाकिस्तान के इतिहास का काला अध्याय हैं, जिन्हें दुनिया कभी नहीं भूल सकती।

अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान की बढ़ी मुश्किलें

भारत के तीखे और तथ्यों पर आधारित जवाब के बाद संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान की स्थिति असहज दिखाई दी। कई देशों ने भी आतंकवाद और नागरिकों पर हमलों को लेकर चिंता जताई। भारत ने स्पष्ट कर दिया कि आतंकवाद को समर्थन देने वाले देशों को अब दुनिया के सामने जवाब देना होगा। भारत ने कहा कि वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होकर कार्रवाई करना बेहद जरूरी है।

दुनिया को दिया बड़ा संदेश

हमारे देश ने संयुक्त राष्ट्र के मंच से यह संदेश देने की कोशिश की कि आतंकवाद और हिंसा को किसी भी हालत में उचित नहीं ठहराया जा सकता। भारत ने कहा कि जो देश आतंकवाद को नीति के रूप में इस्तेमाल करते हैं, उन्हें अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने जवाबदेह बनाया जाना चाहिए। भारत के इस सख्त रुख को अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में एक मजबूत संदेश के तौर पर देखा जा रहा है, जिसमें साफ संकेत दिया गया कि भारत अब हर मंच पर पाकिस्तान को उसके आतंकवादी चेहरे की याद दिलाता रहेगा।