प्रधानमंत्री की अपील का बड़ा असर, आरपीजी समूह ने बदली कार्य व्यवस्था, घर से काम और विदेशी यात्राओं में कटौती
आरपीजी समूह के अध्यक्ष हर्ष गोयनका ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बचत और आत्मनिर्भरता की अपील के बाद अपनी कंपनियों की कार्य नीति में बड़ा बदलाव किया है। नई व्यवस्था के तहत घर से काम, विदेशी यात्राओं में कटौती, डिजिटल बैठकों को बढ़ावा और विद्युत वाहनों के उपयोग जैसे फैसले लागू किए गए हैं।
दि राइजिंग न्यूज | 14 मई 2026
देश में लगातार बढ़ती आर्थिक चुनौतियों, ईंधन संकट और वैश्विक अस्थिरता के बीच अब बड़े उद्योग समूह भी खर्चों में कटौती और संसाधनों की बचत की दिशा में बड़े फैसले लेते दिखाई दे रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हाल ही में देशवासियों से सादगी अपनाने, ईंधन की बचत करने और अनावश्यक खर्चों से बचने की अपील के बाद इसका असर अब कॉरपोरेट जगत में भी देखने को मिल रहा है। देश के दिग्गज उद्योगपति और आरपीजी समूह के अध्यक्ष हर्ष गोयनका ने अपने समूह की सभी कंपनियों के लिए नई कार्य व्यवस्था लागू करने का ऐलान किया है। इस नई नीति के तहत विदेशी यात्राओं में भारी कटौती, घर से काम को बढ़ावा, सार्वजनिक परिवहन के उपयोग और डिजिटल माध्यमों को प्राथमिकता देने जैसे कई बड़े कदम शामिल किए गए हैं। उद्योग जगत में इस फैसले को आर्थिक अनुशासन और जिम्मेदार कारोबारी सोच की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में कई अन्य बड़ी कंपनियां भी इसी प्रकार की नीतियां लागू कर सकती हैं।
घर से काम की व्यवस्था को दी जाएगी नई ताकत
हर्ष गोयनका ने अपने समूह की कंपनियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जिन कर्मचारियों का काम डिजिटल माध्यम से आसानी से किया जा सकता है, उन्हें अनावश्यक रूप से कार्यालय बुलाने से बचा जाए। कंपनी का मानना है कि घर से काम करने की व्यवस्था केवल कर्मचारियों की सुविधा तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे कंपनियों के बड़े स्तर पर होने वाले खर्चों में भी कमी लाई जा सकती है। कार्यालयों में बिजली, रखरखाव, परिवहन और अन्य संचालन संबंधी खर्चों को कम करने में यह व्यवस्था मददगार साबित हो सकती है। इसके अलावा कर्मचारियों को रोजाना लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी, जिससे समय और ईंधन दोनों की बचत होगी। कंपनी का यह भी कहना है कि आधुनिक तकनीक और तेज संचार माध्यमों के कारण अब अधिकांश कार्यालयी काम बिना किसी बाधा के दूरस्थ तरीके से संचालित किए जा सकते हैं। इसी कारण समूह ने नई कार्य नीति में घर से काम करने की व्यवस्था को विशेष महत्व दिया है।
विदेशी यात्राओं में कटौती से खर्चों पर लगेगी लगाम
आरपीजी समूह ने अब विदेश यात्राओं को लेकर बेहद सख्त नीति अपनाने का फैसला किया है। नई व्यवस्था के अनुसार अब केवल उन्हीं कर्मचारियों और अधिकारियों को विदेश यात्रा की अनुमति दी जाएगी, जिनकी यात्रा अत्यधिक आवश्यक मानी जाएगी। कंपनी का मानना है कि डिजिटल माध्यमों के जरिए अंतरराष्ट्रीय बैठकों, व्यापारिक चर्चाओं और साझेदारी से जुड़े अधिकतर कार्य आसानी से किए जा सकते हैं। विदेश यात्राओं पर होने वाला खर्च किसी भी बड़े उद्योग समूह के लिए एक बड़ी लागत माना जाता है, जिसमें हवाई टिकट, होटल, परिवहन और अन्य सुविधाओं पर भारी रकम खर्च होती है। मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों में कंपनी इन खर्चों को कम करके संसाधनों का बेहतर उपयोग करना चाहती है।
घरेलू हवाई यात्राओं पर भी लागू हुई सख्ती
केवल विदेशी यात्राओं ही नहीं बल्कि देश के भीतर होने वाली हवाई यात्राओं को लेकर भी आरपीजी समूह ने नई सख्त नीति लागू की है। कंपनी ने अपने अधिकारियों और कर्मचारियों से कहा है कि घरेलू उड़ानों का उपयोग केवल बेहद जरूरी परिस्थितियों में ही किया जाए। सामान्य बैठकों, समीक्षा कार्यक्रमों और छोटे कार्यों के लिए अब डिजिटल माध्यमों को प्राथमिकता दी जाएगी। कंपनी का कहना है कि छोटी दूरी की यात्राओं पर होने वाला खर्च भी लंबे समय में बहुत बड़ा आर्थिक बोझ बन जाता है। इसके अलावा बार-बार हवाई यात्रा करने से ईंधन की खपत और कार्बन उत्सर्जन भी बढ़ता है, जिसका असर पर्यावरण पर पड़ता है। समूह का मानना है कि तकनीक के प्रभावी इस्तेमाल से इन यात्राओं की जरूरत को काफी हद तक कम किया जा सकता है और इससे समय व धन दोनों की बचत होगी।
आभासी बैठकों को बनाया जाएगा प्राथमिक विकल्प
आरपीजी समूह ने अब अंतर-शहरी बैठकों और बड़े सम्मेलनों को भी डिजिटल माध्यम में बदलने का फैसला किया है। पहले जिन बैठकों के लिए कर्मचारियों और अधिकारियों को अलग-अलग शहरों में यात्रा करनी पड़ती थी, अब उन्हें वीडियो संवाद और ऑनलाइन माध्यम से आयोजित किया जाएगा। कंपनी का मानना है कि आधुनिक तकनीक ने संचार व्यवस्था को इतना मजबूत बना दिया है कि बिना आमने-सामने मिले भी महत्वपूर्ण निर्णय लिए जा सकते हैं। इससे कर्मचारियों का उत्पादक समय बचेगा और यात्रा के कारण होने वाली थकान भी कम होगी। इसके अलावा यात्रा, होटल और अन्य व्यवस्थाओं पर होने वाला अतिरिक्त खर्च भी घटेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले वर्षों में डिजिटल बैठकों की यह संस्कृति बड़े उद्योग समूहों में सामान्य कार्य व्यवस्था का हिस्सा बन सकती है।
पर्यावरण संरक्षण को भी बनाया गया प्राथमिक लक्ष्य
हर्ष गोयनका ने नई कार्य नीति में पर्यावरण संरक्षण को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया है। समूह ने फैसला किया है कि अब जितनी भी नई गाड़ियां खरीदी जाएंगी या किराये पर ली जाएंगी, वे केवल विद्युत या मिश्रित ईंधन आधारित होंगी। कंपनी का कहना है कि पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता कम करना समय की सबसे बड़ी जरूरत बन चुकी है। लगातार बढ़ते प्रदूषण और जलवायु संकट के बीच उद्योग जगत की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। विद्युत वाहनों के इस्तेमाल से कार्बन उत्सर्जन कम होगा और पर्यावरण संरक्षण में सकारात्मक योगदान मिलेगा। कंपनी को उम्मीद है कि इस फैसले से अन्य उद्योग समूह भी प्रेरित होंगे और हरित ऊर्जा की दिशा में बड़े कदम उठाएंगे।
कर्मचारियों को सार्वजनिक परिवहन अपनाने की सलाह
आरपीजी समूह ने अपने कर्मचारियों को निजी वाहनों के बजाय सार्वजनिक परिवहन और साझा वाहन व्यवस्था का उपयोग करने की सलाह दी है। कर्मचारियों को बस, मेट्रो और सामूहिक यात्रा व्यवस्था अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा ताकि ईंधन की बचत हो सके। कंपनी का मानना है कि बड़ी संख्या में लोग यदि निजी वाहनों के बजाय साझा परिवहन का इस्तेमाल करें तो शहरों में बढ़ते यातायात दबाव को कम किया जा सकता है। इससे प्रदूषण में कमी आने के साथ-साथ कर्मचारियों के व्यक्तिगत खर्चों में भी राहत मिलेगी। समूह ने यह भी कहा है कि भविष्य में कार्यालय आने-जाने के लिए नई साझा परिवहन योजनाएं भी शुरू की जा सकती हैं। इस कदम को पर्यावरण और आर्थिक बचत दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
तकनीक के जरिए कंपनी खर्चों में लाई जाएगी कमी
हर्ष गोयनका ने कहा है कि अब कंपनियों को पारंपरिक कार्यशैली से आगे बढ़कर तकनीक आधारित व्यवस्था अपनानी होगी। उन्होंने आंतरिक समीक्षा, नियुक्ति प्रक्रिया, सामान्य बैठकों और प्रशिक्षण कार्यक्रमों को अधिक से अधिक डिजिटल माध्यम से संचालित करने पर जोर दिया है। कंपनी का मानना है कि तकनीक के इस्तेमाल से न केवल समय की बचत होगी बल्कि प्रशासनिक खर्चों में भी भारी कमी लाई जा सकेगी। कागजी कामकाज कम होने से पर्यावरण को भी फायदा मिलेगा और प्रक्रियाएं अधिक तेज तथा पारदर्शी बन सकेंगी। आने वाले समय में कंपनी अधिकतर कार्यों को ऑनलाइन माध्यम में बदलने की दिशा में काम करेगी। विशेषज्ञों के अनुसार यह मॉडल भविष्य की आधुनिक कार्य व्यवस्था का उदाहरण बन सकता है।
प्रधानमंत्री की अपील के बाद उद्योग जगत में बढ़ी सक्रियता
हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से सादगी अपनाने, संसाधनों की बचत करने और अनावश्यक खर्चों से बचने की अपील की थी। उन्होंने लोगों से कहा था कि विदेशी यात्राओं से बचें, ईंधन का सीमित उपयोग करें और देश को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने में अपनी भूमिका निभाएं। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा था कि आत्मनिर्भर भारत का सपना तभी पूरा होगा जब हर नागरिक और हर संस्था जिम्मेदारी के साथ संसाधनों का उपयोग करेगी। माना जा रहा है कि हर्ष गोयनका द्वारा उठाए गए ये कदम उसी राष्ट्रीय सोच का समर्थन हैं। उद्योग जगत में इस फैसले को सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है और संभावना जताई जा रही है कि आने वाले समय में अन्य बड़े उद्योग समूह भी इसी प्रकार की नीतियां लागू कर सकते हैं।