सीएनजी के बढ़े दामों ने महाराष्ट्र में मचाई हलचल, मुंबई से पुणे तक जनता पर बढ़ा महंगाई का बोझ
महाराष्ट्र में सीएनजी की कीमतों में दो रुपये प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी कर दी गई है। मुंबई, ठाणे और नवी मुंबई में नया रेट ८४ रुपये प्रति किलोग्राम हो गया है, जबकि पुणे और आसपास के क्षेत्रों में कीमत ९२ रुपये २५ पैसे पहुंच गई है। इससे परिवहन और आम जनता के खर्च बढ़ने की आशंका है।
दि राइजिंग न्यूज डेस्क | 14 मई 2026
महाराष्ट्र में एक बार फिर महंगाई ने आम जनता की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। महानगर गैस लिमिटेड द्वारा सीएनजी की कीमतों में अचानक बढ़ोतरी किए जाने के बाद लाखों लोगों के मासिक बजट पर सीधा असर पड़ने वाला है। मुंबई महानगर क्षेत्र समेत राज्य के कई बड़े शहरों में नई दरें लागू कर दी गई हैं। इस फैसले के बाद वाहन चालकों, नौकरीपेशा लोगों, छोटे कारोबारियों और सार्वजनिक परिवहन पर निर्भर यात्रियों में चिंता का माहौल दिखाई दे रहा है। लगातार बढ़ती महंगाई के बीच ईंधन की कीमतों में यह इजाफा लोगों की आर्थिक परेशानियों को और बढ़ा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसका असर आने वाले दिनों में बाजार और परिवहन व्यवस्था दोनों पर दिखाई देगा।
सीएनजी की कीमत में अचानक दो रुपये की बढ़ोतरी
महानगर गैस लिमिटेड ने सीएनजी की कीमतों में प्रति किलोग्राम दो रुपये की बढ़ोतरी की है। इसके बाद मुंबई, ठाणे, नवी मुंबई और आसपास के क्षेत्रों में अब सीएनजी की नई कीमत ८४ रुपये प्रति किलोग्राम हो गई है। इससे पहले इन इलाकों में सीएनजी ८२ रुपये प्रति किलोग्राम की दर से मिल रही थी। नई दरें १४ मई की मध्य रात्रि से लागू कर दी गई हैं। अचानक हुए इस बदलाव के बाद वाहन चालकों को अब हर बार गैस भरवाने पर पहले से ज्यादा पैसा खर्च करना पड़ेगा। खासतौर पर वे लोग ज्यादा प्रभावित होंगे जो रोजाना लंबी दूरी तय करते हैं और जिनकी आमदनी सीमित है।
मुंबई में टैक्सी और ऑटो चालकों की बढ़ी चिंता
मुंबई महानगर क्षेत्र में बड़ी संख्या में टैक्सी, ऑटो और निजी वाहन सीएनजी पर चलते हैं। लोग इसे पेट्रोल और डीजल की तुलना में सस्ता और किफायती विकल्प मानते थे, लेकिन लगातार बढ़ती कीमतों ने अब इस धारणा को कमजोर कर दिया है। टैक्सी और ऑटो चालकों का कहना है कि पहले ही यात्रियों की संख्या में कमी और बढ़ती महंगाई ने उनकी कमाई पर असर डाला है। अब ईंधन महंगा होने के कारण उनकी बचत और कम हो जाएगी। कई वाहन चालकों ने साफ कहा कि अगर कीमतों में इसी तरह बढ़ोतरी होती रही तो किराया बढ़ाना उनकी मजबूरी बन जाएगा। इससे आम यात्रियों की जेब पर भी अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।
पुणे और औद्योगिक इलाकों में भी महंगा हुआ सफर
मुंबई के अलावा पुणे, पिंपरी-चिंचवड, चाकन, तलेगांव और हिंजेवाड़ी जैसे बड़े औद्योगिक और तकनीकी क्षेत्रों में भी सीएनजी की कीमतें बढ़ा दी गई हैं। इन क्षेत्रों में अब सीएनजी की नई कीमत ९२ रुपये २५ पैसे प्रति किलोग्राम हो गई है। इन इलाकों में लाखों कर्मचारी रोजाना निजी और सार्वजनिक वाहनों से सफर करते हैं। सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों, कारखानों और औद्योगिक इकाइयों में काम करने वाले लोगों के लिए यह बढ़ोतरी सीधे जेब पर असर डालने वाली साबित हो सकती है। कई लोगों का कहना है कि पहले से ही किराया, बिजली, भोजन और अन्य जरूरी खर्च तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे में परिवहन खर्च का बढ़ना मध्यम वर्ग के लिए बड़ी चिंता का कारण बन सकता है।
सार्वजनिक परिवहन पर भी पड़ सकता है असर
विशेषज्ञों का मानना है कि सीएनजी की कीमतों में हुई यह बढ़ोतरी केवल वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहेगी। आने वाले दिनों में इसका असर सार्वजनिक परिवहन सेवाओं पर भी देखने को मिल सकता है। महाराष्ट्र के कई शहरों में सार्वजनिक बसें, टैक्सी और ऑटो सीएनजी से संचालित होते हैं। ऐसे में परिचालन खर्च बढ़ने के बाद किराए में बढ़ोतरी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। अगर किराए बढ़ते हैं तो रोजाना काम पर जाने वाले कर्मचारियों, विद्यार्थियों और छोटे व्यापारियों को अतिरिक्त आर्थिक दबाव झेलना पड़ सकता है। इससे आम आदमी की मासिक बचत पर भी असर पड़ सकता है।
व्यापार और माल ढुलाई पर बढ़ेगा बोझ
सीएनजी महंगी होने का असर व्यापार और माल ढुलाई क्षेत्र पर भी दिखाई देने की संभावना है। कई छोटे और मध्यम स्तर के मालवाहक वाहन सीएनजी से चलते हैं। ईंधन की कीमत बढ़ने से माल ढुलाई की लागत बढ़ जाएगी, जिसका असर बाजार में सामानों की कीमतों पर पड़ सकता है। व्यापारियों का कहना है कि पहले से ही बाजार में मांग कमजोर बनी हुई है और महंगाई के कारण कारोबार प्रभावित हो रहा है। अब परिवहन खर्च बढ़ने से छोटे व्यापारियों और दुकानदारों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में सब्जियां, फल, दूध और अन्य जरूरी सामान भी महंगे हो सकते हैं।
आम जनता पर बढ़ता जा रहा महंगाई का दबाव
आम जनता का कहना है कि सीएनजी को इसलिए चुना गया था क्योंकि यह पेट्रोल और डीजल की तुलना में सस्ता ईंधन माना जाता था। लेकिन पिछले कुछ समय में इसकी कीमतों में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिली है। इससे लोगों को अब यह चिंता सताने लगी है कि अगर यही स्थिति बनी रही तो सीएनजी और पारंपरिक ईंधन के बीच कीमतों का अंतर काफी कम हो जाएगा। कई परिवारों का मासिक बजट पहले से ही दबाव में है और अब ईंधन खर्च बढ़ने से घरेलू आर्थिक स्थिति और खराब हो सकती है। खासतौर पर नौकरीपेशा और निम्न आय वर्ग के लोगों पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ने की संभावना है।
अंतरराष्ट्रीय हालात का पड़ रहा असर
ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्राकृतिक गैस की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक ऊर्जा संकट के कारण गैस की आपूर्ति और कीमत दोनों प्रभावित हो रही हैं। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाले बदलावों का सीधा असर घरेलू कीमतों पर पड़ता है। महानगर गैस लिमिटेड ने भी कीमत बढ़ाने के पीछे गैस खरीद लागत और आपूर्ति खर्च में बढ़ोतरी को प्रमुख कारण बताया है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर वैश्विक हालात जल्द नहीं सुधरे तो आने वाले समय में और बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
क्या आने वाले दिनों में और बढ़ सकते हैं दाम
ऊर्जा बाजार पर नजर रखने वाले जानकारों का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए ईंधन की कीमतों में आगे भी उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। अगर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्राकृतिक गैस की कीमतें बढ़ती रहीं तो उपभोक्ताओं पर और आर्थिक बोझ डाला जा सकता है। हालांकि आम जनता को उम्मीद है कि सरकार और ईंधन कंपनियां राहत देने के लिए कोई कदम उठा सकती हैं। लोगों की मांग है कि लगातार बढ़ती महंगाई के बीच ईंधन कीमतों को नियंत्रित करना बेहद जरूरी है ताकि आम आदमी को कुछ राहत मिल सके। फिलहाल महाराष्ट्र में सीएनजी की नई दरों ने लोगों की चिंता जरूर बढ़ा दी है