होर्मुज को बायपास करेगा यूएई, नई तेल पाइपलाइन से दोगुनी होगी निर्यात क्षमता

यूएई होर्मुज जलडमरूमध्य को बायपास करने के लिए नई तेल पाइपलाइन पर काम कर रहा है, जिससे उसकी निर्यात क्षमता में बड़ा इजाफा होगा। यह परियोजना 2027 तक शुरू हो सकती है और वैश्विक तेल बाजार पर इसका महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है।

होर्मुज को बायपास करेगा यूएई, नई तेल पाइपलाइन से दोगुनी होगी निर्यात क्षमता

दि राइजिंग न्यूज |  15 मई 2026

यूएई का बड़ा ऊर्जा मास्टरप्लान सामने आया

संयुक्त अरब अमीरात ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए एक बड़ा मास्टरप्लान तैयार किया है। इस योजना के तहत यूएई होर्मुज जलडमरूमध्य को बायपास करने के लिए नई तेल पाइपलाइन पर तेजी से काम कर रहा है। वर्तमान में होर्मुज मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा संभालता है, लेकिन क्षेत्रीय तनाव के कारण यह रूट कई बार बाधित हुआ है। इसी वजह से यूएई अब वैकल्पिक और सुरक्षित निर्यात मार्ग विकसित कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। इससे वैश्विक तेल बाजार में यूएई की भूमिका और मजबूत हो सकती है।


नई पाइपलाइन से दोगुनी होगी निर्यात क्षमता

रिपोर्ट के अनुसार नई पाइपलाइन परियोजना पूरी होने के बाद यूएई की तेल निर्यात क्षमता में बड़ा इजाफा होगा। अभी मौजूदा हबशान से फुजैरा तक की पाइपलाइन रोजाना लगभग 1.8 मिलियन बैरल तेल की क्षमता रखती है। नई परियोजना के जुड़ने के बाद इस क्षमता में और वृद्धि होने की संभावना है। इसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की सप्लाई स्थिरता पर पड़ेगा। फुजैरा पहले से ही एक प्रमुख तेल भंडारण और निर्यात केंद्र के रूप में जाना जाता है। नई योजना इसे और मजबूत वैश्विक ऊर्जा हब में बदल सकती है।


होर्मुज जलमार्ग को क्यों माना जाता है अहम

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है। वैश्विक तेल व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है। लेकिन क्षेत्रीय संघर्ष और तनाव के कारण इस मार्ग पर अक्सर खतरे की स्थिति बनी रहती है। हाल ही में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने इस मार्ग की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। अगर यह मार्ग बाधित होता है तो वैश्विक तेल कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल सकता है। इसी जोखिम को देखते हुए यूएई ने वैकल्पिक रास्ता बनाने का निर्णय लिया है।


परियोजना कब तक होगी पूरी

यूएई सरकार ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना को तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए हैं। अबू धाबी के क्राउन प्रिंस ने संबंधित ऊर्जा कंपनी को काम में तेजी लाने को कहा है। अनुमान लगाया जा रहा है कि यह नई पाइपलाइन वर्ष 2027 तक शुरू हो सकती है। इसके शुरू होते ही यूएई को होर्मुज जलमार्ग पर निर्भरता काफी कम हो जाएगी। इससे तेल निर्यात अधिक सुरक्षित और स्थिर हो जाएगा। साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में आपूर्ति बाधित होने का जोखिम भी कम होगा।


विशेषज्ञों की राय और वैश्विक असर

ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना वैश्विक तेल बाजार में बड़ा बदलाव ला सकती है। यूएई का यह कदम उसकी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है। इससे देश की निर्यात क्षमता बढ़ेगी और वैश्विक बाजार में पकड़ मजबूत होगी। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच यह एक रणनीतिक निर्णय है। आने वाले समय में यह परियोजना तेल आपूर्ति श्रृंखला को अधिक सुरक्षित बना सकती है। साथ ही वैश्विक ऊर्जा राजनीति पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है।