अमेरिका में एच-वन-बी वीजा नियमों में बड़ा बदलाव प्रस्तावित, विदेशी कर्मचारियों के वेतन में तीस प्रतिशत तक बढ़ोतरी संभव
अमेरिका में एच वन बी वीजा धारकों के लिए न्यूनतम वेतन में लगभग तीस प्रतिशत तक बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा गया है। इस कदम का उद्देश्य घरेलू रोजगार को मजबूत करना बताया जा रहा है। इसका सीधा असर भारतीय आईटी कंपनियों, स्टार्टअप्स और तकनीकी पेशेवरों पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे वैश्विक टेक हायरिंग पैटर्न में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
दि राइजिंग न्यूज डेस्क | 13 मई 2026
अमेरिका में विदेशी कर्मचारियों के लिए काम करने की शर्तों को लेकर बड़ा बदलाव प्रस्तावित किया गया है। अमेरिकी श्रम विभाग ने एक नया मसौदा जारी किया है जिसमें न्यूनतम वेतन में लगभग तीस प्रतिशत तक वृद्धि की बात कही गई है। यह नियम मुख्य रूप से एच-वन-बी वीजा धारकों पर लागू होगा। इसका उद्देश्य अमेरिकी नागरिकों की नौकरी की सुरक्षा को मजबूत करना बताया जा रहा है। साथ ही विदेशी कर्मचारियों को कम वेतन पर रखने की प्रवृत्ति को रोकना भी इसका लक्ष्य है।
एंट्री लेवल कर्मचारियों पर सबसे अधिक असर
नए प्रस्ताव के अनुसार शुरुआती स्तर पर काम करने वाले विदेशी कर्मचारियों के वेतन में सबसे ज्यादा वृद्धि होगी। पहले जिन कर्मचारियों को लगभग तिहत्तर हजार डॉलर वार्षिक मिलते थे, उन्हें अब लगभग सत्तानवे हजार डॉलर तक वेतन देना होगा। मध्यम और वरिष्ठ स्तर के कर्मचारियों के वेतन में भी महत्वपूर्ण बढ़ोतरी प्रस्तावित है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे विदेशी कंपनियों की भर्ती लागत काफी बढ़ जाएगी और नई नौकरियों के अवसर सीमित हो सकते हैं।
भारतीय आईटी कंपनियों पर आर्थिक दबाव बढ़ने की आशंका
इस प्रस्ताव का सीधा असर भारत की बड़ी आईटी कंपनियों पर पड़ सकता है। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, इन्फोसिस और विप्रो जैसी कंपनियों के लिए अमेरिका में कर्मचारियों को नियुक्त करना महंगा हो जाएगा। इससे उनके लाभ मार्जिन पर दबाव बढ़ सकता है। कंपनियां इस अतिरिक्त खर्च को ग्राहकों पर डाल सकती हैं या फिर स्थानीय अमेरिकी कर्मचारियों की भर्ती को प्राथमिकता दे सकती हैं। इससे भारतीय पेशेवरों के लिए अवसरों में कमी आने की संभावना जताई जा रही है।
भारतीय छात्रों और नए पेशेवरों के लिए चुनौती
नए नियम लागू होने के बाद भारतीय छात्रों और शुरुआती स्तर के कामगारों के लिए अमेरिका में नौकरी पाना कठिन हो सकता है। छोटे और मध्यम स्तर के उद्यम इतनी अधिक वेतन लागत वहन करने में सक्षम नहीं होंगे। हालांकि उच्च कौशल वाले और पहले से कार्यरत पेशेवरों को अपेक्षाकृत लाभ मिल सकता है क्योंकि कंपनियां उन्हें बनाए रखने के लिए वेतन बढ़ा सकती हैं। फिर भी नई भर्ती के अवसर सीमित होने की आशंका बनी हुई है।
प्रस्ताव पर मिश्रित प्रतिक्रिया, आगे चर्चा जारी
इस प्रस्ताव पर विभिन्न पक्षों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। समर्थकों का मानना है कि यह कदम वेतन प्रणाली में सुधार लाएगा और लंबे समय से स्थिर न्यूनतम वेतन ढांचे को अपडेट करेगा। वहीं आलोचकों का कहना है कि इससे विदेशी प्रतिभा की भर्ती महंगी हो जाएगी और कंपनियां भर्ती में कटौती कर सकती हैं। यह मसौदा अभी सार्वजनिक राय प्रक्रिया में है और अंतिम निर्णय आने में समय लग सकता है।