विंध्याचल में रावण दहन के बाद पुतला लूटने की परंपरा:मिर्जापुर के लोग मानते हैं कि इसके अंश से बुरी आत्माएं और खटमल दूर रहते हैं
देशभर में विजयादशमी पर रावण के पुतले का दहन किया जाता है, लेकिन मां विंध्यवासिनी के धाम विंध्याचल में परंपरा कुछ अलग है। यहां रावण का पुतला जलाने के बजाय उसके टुकड़े कर लोग घर ले जाते हैं। अस्पताल रोड पर भगवान राम के बाण और हनुमान की गदा के प्रहार से रावण का पुतला गिरते ही लोग उसे लेने के लिए टूट पड़ते हैं। देखते ही देखते पुतला टुकड़ों में बंट जाता है और लोग उसके हिस्से अपने साथ ले जाते हैं। स्थानीय मान्यता है कि रावण के पुतले का अंश घर में रखने से भूत-प्रेत, पिशाच और चुड़ैल जैसी बाधाएं दूर रहती हैं। यह भी मान्यता है कि पुतले का टुकड़ा घर में रखने से चारपाई में खटमल नहीं लगते। आयोजक मंडल के राजेश मिश्र के अनुसार, आदिशक्ति मां विंध्यवासिनी की नगरी में शिव भक्त रावण का पुतला जलाने की परंपरा नहीं है। मान्यता है कि भगवान राम ने रावण का वध कर उसे मोक्ष प्रदान किया था। ऐसे में उसका बार-बार पुतला दहन करना उचित नहीं माना जाता। इसी मान्यता के चलते यहां रावण का पुतला जलाने के बजाय उसे गिराकर उसके टुकड़े घर ले जाने की परंपरा निभाई जाती है। राम के बाण और हनुमान की गदा से होता है रावण वध विंध्याचल की दशहरा रामलीला में पवनपुत्र हनुमान रावण पर गदा से प्रहार करते हैं, जबकि भगवान राम बाणों की वर्षा कर उसका वध करते हैं। रावण के धराशायी होते ही वहां मौजूद लोग पुतले को अपने कब्जे में लेने के लिए आगे बढ़ते हैं। कुछ ही देर में पुतला टुकड़ों में बंट जाता है। लोग इन टुकड़ों को अपने घर ले जाने के लिए उत्साहित नजर आते हैं। घर में टुकड़ा रखने से नकारात्मक शक्तियां दूर होने की मान्यता स्थानीय निवासी अजय कुमार के अनुसार, रावण के पुतले का हिस्सा घर में रखने की परंपरा वर्षों से चली आ रही है। लोगों की मान्यता है कि इससे नकारात्मक शक्तियों और दुष्ट आत्माओं का प्रभाव नहीं पड़ता। हालांकि, ये स्थानीय लोकविश्वास हैं, जिनका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इसके बावजूद परंपरा के प्रति लोगों की आस्था बनी हुई है। महाज्ञानी रावण की कथा देती है अधर्म से दूर रहने का संदेश रावण को महाज्ञानी ब्राह्मण और भगवान शिव का उपासक माना जाता है। ज्ञान और शक्ति का धनी होने के बावजूद उसने अन्याय और अधर्म का रास्ता चुना, जिसके कारण उसका अंत हुआ। विंध्याचल में रावण के पुतले को जलाने के बजाय उसके टुकड़े किए जाने की परंपरा दशहरा उत्सव को अलग पहचान देती है। रावण की कथा यह संदेश भी देती है कि ज्ञान और शक्ति होने के बावजूद अन्याय का मार्ग विनाश की ओर ले जाता है।
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