सौरव-रांका को याद कर भावुक हुए अभिजीत दीपके, समर्थकों से बोले- अहिंसा का रास्ता न छोड़ें

अभिजीत दीपके ने जेल में बंद सौरव दास और आशुतोष रांका को याद करते हुए समर्थकों से त्योहार परिवार के साथ मनाने, साथियों को याद रखने और अहिंसा के रास्ते पर चलते हुए आवाज उठाते रहने की अपील की। इस बीच, दिल्ली पुलिस ने संबंधित मामले को अपराध शाखा को सौंप दिया है।

Oct 20, 2026 - 14:19
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सौरव-रांका को याद कर भावुक हुए अभिजीत दीपके, समर्थकों से बोले- अहिंसा का रास्ता न छोड़ें

दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 20 अक्टूबर 2026

कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने जेल में बंद अपने सहयोगियों सौरव दास और आशुतोष रांका को याद करते हुए समर्थकों से भावुक अपील की है। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से त्योहार अपने परिवार के साथ मनाने और अपने प्रियजनों का ख्याल रखने को कहा। साथ ही उन्होंने अहिंसा, प्रेम और करुणा के रास्ते पर चलते हुए अपनी आवाज उठाते रहने का संदेश दिया। इस बीच, दिल्ली पुलिस ने दोनों सहयोगियों से जुड़े एक मामले को अपराध शाखा को सौंप दिया है।

सौरव दास और आशुतोष रांका को याद कर भावुक हुए अभिजीत दीपके

कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने अपने सहयोगियों सौरव दास और आशुतोष रांका के जेल में होने पर भावुक प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि उनकी आंखों में आंसू किसी डर की वजह से नहीं, बल्कि अपने साथियों के प्रति लगाव के कारण हैं। दीपके ने दोनों को अपना भाई बताते हुए कहा कि उनकी गैरमौजूदगी उन्हें परेशान कर रही है। उनके इस संदेश के जरिए समर्थकों से भावनात्मक रूप से जुड़े रहने और आंदोलन के दौरान मानवीय संवेदनाओं को बनाए रखने की अपील की गई।

प्रदर्शनकारियों से परिवार के साथ त्योहार मनाने की अपील

अभिजीत दीपके ने अपने समर्थकों और स्वयंसेवकों से अपील की कि वे आने वाले त्योहार अपने परिवार के साथ मनाएं। उन्होंने कहा कि परिवार के आसपास रहना और अपनों का ख्याल रखना भी जरूरी है। दीपके के मुताबिक, किसी उद्देश्य के लिए आवाज उठाते समय अपने परिवार और निजी जीवन की जिम्मेदारियों को नहीं भूलना चाहिए। उन्होंने समर्थकों से सौरव दास और आशुतोष रांका को भी याद रखने की अपील की, क्योंकि उनके अनुसार दोनों इस समय अपने परिवारों के साथ त्योहार नहीं मना सकेंगे।

‘हम पीछे नहीं हटेंगे’, अहिंसा के रास्ते पर चलने का संदेश

दीपके ने अपने संदेश में कहा कि भावुकता कमजोरी नहीं, बल्कि उनकी ताकत है। उन्होंने भरोसा जताया कि सौरव और आशुतोष जेल से बाहर आने के बाद भी मुस्कान के साथ अपने विचारों पर कायम रहेंगे। उन्होंने महात्मा गांधी के अहिंसा और प्रेम के सिद्धांतों का उल्लेख करते हुए समर्थकों से अपील की कि वे किसी भी परिस्थिति में हिंसा का रास्ता न अपनाएं। उनके मुताबिक, विरोध के दौरान नफरत के बजाय प्रेम और करुणा बनाए रखना जरूरी है।

समर्थकों से बोले- नफरत नहीं, प्रेम और करुणा बनाए रखें

अभिजीत दीपके ने कहा कि विरोध के दौरान उकसावे की परिस्थितियां पैदा हो सकती हैं, लेकिन समर्थकों को संयम नहीं खोना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिन लोगों से वैचारिक मतभेद हैं, उनके जैसा व्यवहार अपनाना आंदोलन के उद्देश्यों के विपरीत होगा। दीपके ने अपने साथियों के साथ निजी जुड़ाव का जिक्र करते हुए बताया कि उनका एक समूह है, जिसमें वे आपस में संदेश और हास्य से जुड़ी सामग्री साझा करते थे। उन्होंने कहा कि दोनों साथियों की गैरमौजूदगी उन्हें खल रही है, लेकिन इसके बावजूद अहिंसा और प्रेम के सिद्धांतों को नहीं छोड़ना चाहिए।

सौरव दास और आशुतोष रांका से जुड़े मामले की जांच अपराध शाखा को

इस बीच, समाचार में दी गई जानकारी के अनुसार, दिल्ली पुलिस ने सौरव दास और आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत दो दिन बढ़ाए जाने के बाद उनसे जुड़े अनधिकृत प्रवेश के मामले को अपराध शाखा को स्थानांतरित कर दिया। पुलिस सूत्रों के हवाले से यह जानकारी सामने आई है। मामले की जांच के दौरान संबंधित घटनाक्रम और आरोपों से जुड़े तथ्यों की पड़ताल की जाएगी। जांच स्थानांतरित किए जाने का अर्थ अपने आप में आरोपों का साबित होना नहीं है।

अलग-अलग थानों में दर्ज प्राथमिकी में क्या आरोप हैं

उपलब्ध विवरण के मुताबिक, कनॉट प्लेस थाने में दर्ज एक प्राथमिकी में लोक सेवक के आदेश की अवहेलना, अनधिकृत प्रवेश और आपराधिक साजिश से संबंधित आरोप शामिल किए गए हैं। वहीं, संसद मार्ग थाने में दर्ज दूसरी प्राथमिकी में लोक सेवक के काम में बाधा डालने, चोट पहुंचाने, हमला करने और समान मंशा से जुड़े आरोपों का उल्लेख है। ये आरोप प्राथमिकी में दर्ज धाराओं से संबंधित हैं और इनकी सत्यता का निर्धारण जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से होगा। संबंधित व्यक्तियों की कानूनी स्थिति और मामले की आगे की कार्रवाई के बारे में आधिकारिक जानकारी महत्वपूर्ण रहेगी।

आंदोलन के समर्थकों के लिए दीपके का क्या संदेश है

अभिजीत दीपके के संदेश का मुख्य जोर अपने साथियों के प्रति एकजुटता बनाए रखने, परिवारों की देखभाल करने और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने पर है। उन्होंने समर्थकों से कहा कि त्योहारों के दौरान भी जेल में बंद साथियों को याद रखें, लेकिन अपने परिवारों की खुशियों और जिम्मेदारियों को नजरअंदाज न करें। साथ ही उन्होंने आंदोलन के दौरान संयम और अहिंसा बनाए रखने पर जोर दिया। उनके इस संदेश के बाद मामले में पुलिस की जांच और दोनों सहयोगियों की न्यायिक स्थिति पर आगे की जानकारी महत्वपूर्ण होगी।

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