15 साल की लम्हा ने तैराकी में जीते 3 गोल्ड:जालौन में मां बोली- बेटी के सपनों के लिए 7 साल पहले छोड़ी थी नौकरी, अब साकार हुआ सपना
जालौन जिले के कोंच नगर की 15 वर्षीय तैराक लम्हा प्रशांत अरजरिया ने मध्य प्रदेश के ग्वालियर स्थित तरण पुष्कर में 6 से 10 अक्टूबर तक आयोजित होने वाली 70वीं एसजीएफआई मध्य प्रदेश राज्य तैराकी प्रतियोगिता में लम्हा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए तीन स्वर्ण पदक अपने नाम किए। उन्होंने 50 मीटर, 100 मीटर और 200 मीटर ब्रेस्टस्ट्रोक स्पर्धाओं में पहला स्थान हासिल किया। कम उम्र में लगातार मिल रही इन सफलताओं ने उनकी प्रतिभा और मजबूत इरादों को एक नई पहचान दी है। बेटी की प्रतिभा को पहचानकर उसे राष्ट्रीय स्तर का खिलाड़ी बनाने के लिए मां डॉ. अमृता अरजरिया ने करीब सात साल पहले अपनी नौकरी छोड़ दी। बेटी की ट्रेनिंग को ही अपना लक्ष्य बनाया और अब लम्हा ने अपनी उपलब्धियों से मां के इस त्याग को सम्मान दिलाना शुरू कर दिया है। छह साल की उम्र में शुरू किया सफर लम्हा ने महज छह वर्ष की उम्र में तैराकी शुरू की थी। शुरुआत में यह शौक था, लेकिन धीरे-धीरे यही उनका जुनून बन गया। नियमित अभ्यास, अनुशासन और प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया। अब तक वह तैराकी में करीब 30 पदक जीत चुकी हैं। स्कूल स्तर की राज्य प्रतियोगिताओं में उनके नाम पांच स्वर्ण, तीन रजत और तीन कांस्य पदक दर्ज हैं। लम्हा इससे पहले ओडिशा के भुवनेश्वर में आयोजित राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में मध्य प्रदेश का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। राष्ट्रीय मंच पर अपनी प्रतिभा दिखाने के बाद अब राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में तीन स्वर्ण पदक जीतना उनके खेल सफर की एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है। मां ने नौकरी छोड़ी, बेटी के सपनों को बनाया अपना लक्ष्य लम्हा की सफलता के पीछे उनकी मेहनत के साथ मां डॉ. अमृता अरजरिया का त्याग और समर्पण भी अहम है। बेटी को तैराकी में आगे बढ़ाने और उसे बेहतर खिलाड़ी बनाने के लिए डॉ. अमृता ने करीब सात साल पहले नौकरी छोड़ने का फैसला किया। इसके बाद उन्होंने अपना अधिकतर समय बेटी के प्रशिक्षण, अभ्यास और खेल को निखारने में लगाया।
एक ओर बेटी पूल में पसीना बहाती रही, तो दूसरी ओर मां ने उसके सपनों को पूरा करने के लिए हर संभव प्रयास किया। यह सफर केवल पदक जीतने का नहीं, बल्कि विश्वास, धैर्य और परिवार के सहयोग से लक्ष्य हासिल करने का भी है। रोज चार घंटे अभ्यास, पढ़ाई पर भी पूरा ध्यान लम्हा के प्रशिक्षण में उनके कोच सचिन पाल की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। वह रोजाना सुबह और शाम करीब दो-दो घंटे अभ्यास करती हैं। इसके लिए ग्वालियर के तरण पुष्कर और अपने स्कूल के स्विमिंग पूल में नियमित प्रशिक्षण लेती हैं। खेल के साथ पढ़ाई का संतुलन बनाए रखते हुए लम्हा कक्षा 11वीं की छात्रा हैं। उनके पिता प्रशांत अरजरिया जीएसटी विभाग में स्टेट टैक्स ऑफिसर हैं। परिवार के सहयोग और कोच के मार्गदर्शन ने लम्हा को अपने लक्ष्य की ओर लगातार आगे बढ़ने का हौसला दिया है। बेटियों के सपनों को पंख देने वाली कहानी लम्हा के नाना ओमप्रकाश कौशिक कोंच के वरिष्ठ अधिवक्ता हैं। परिवार के लिए उनकी यह उपलब्धि गर्व का विषय है। लम्हा की कहानी उन अभिभावकों के लिए भी प्रेरणा है, जो बच्चों की प्रतिभा पहचानकर उन्हें आगे बढ़ने का अवसर देना चाहते हैं। डॉ. अमृता ने बेटी के सपने को अपना संकल्प बनाया और लम्हा ने मेहनत से उस संकल्प को उपलब्धियों में बदलना शुरू कर दिया। तीन स्वर्ण पदकों के साथ लम्हा ने यह संदेश दिया है कि प्रतिभा को सही मार्गदर्शन, निरंतर अभ्यास और परिवार का साथ मिले, तो बेटियां हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना सकती हैं।
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