15 साल में जर्जर हुए स्कूल भवन,BSA ने मांगी रिपोर्ट:गोंडा में प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों की सूची तलब; लापरवाह अधिकारियों पर होगी कार्रवाई
गोंडा में प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक विद्यालयों के निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर अब सवाल उठने लगे हैं। जिले में हाल ही में हुई जांच के दौरान कई ऐसे सरकारी स्कूल सामने आए हैं,जिनके भवन निर्माण के सिर्फ 15 साल के भीतर ही पूरी तरह जर्जर और इस्तेमाल के लायक नहीं बचे हैं। इतनी कम अवधि में भवनों की खराब हालत को शिक्षा विभाग ने बहुत गंभीरता से लिया है। इस मामले में जल्दी कार्रवाई करते हुए बीएसए अमित कुमार सिंह ने आज शुक्रवार सुबह 9:00 बजे सभी बीईओ के साथ एक जरूरी ऑनलाइन बैठक की। बैठक के दौरान बीएसए ने सभी बीईओ से इन जर्जर भवनों के संबंध में पूरी रिपोर्ट मांगी है। पहले खंड शिक्षा अधिकारियों द्वारा इस बारे में अधूरी जानकारी भेजी गई थी, जिस पर बीएसए ने बैठक में नाराजगी जताई। लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों को सख्त कार्रवाई की चेतावनी देते हुए बीएसए ने निर्देश दिया कि वे अगले तीन दिनों के भीतर तय फॉर्मेट पर पूरी जानकारी अपडेट करते हुए कार्यालय को रिपोर्ट दें। बीएसए ने खास तौर पर हलधरमऊ, मनकापुर, इटियाथोक, कर्नलगंज, बेलसर, मुजेहना, छपिया, परसपुर, कटरा बाजार, रूपईडीह और नवाबगंज के खंड शिक्षा अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। जारी निर्देश के अनुसार, रिपोर्ट में सिर्फ भवनों की मौजूदा स्थिति ही नहीं, बल्कि निर्माण के समय जिम्मेदार रहे सभी प्रमुख व्यक्तियों का पूरा विवरण देना जरूरी है। इसमें निर्माण कार्य के दौरान तैनात रहे उस समय के प्रभारी शिक्षक का नाम व पदनाम, उस समय के ग्राम प्रधान का विवरण, स्कूल प्रबंध समिति (एसएमसी) के उस समय के अध्यक्ष की जानकारी और निर्माण अवधि में तैनात रहे उस समय के खंड शिक्षा अधिकारी का पूरा ब्योरा शामिल है। अधिकारियों का कहना है कि रिपोर्ट मिलने के बाद निर्माण में मानकों की अनदेखी और पैसों की गड़बड़ी करने वाले उस समय के जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी। बीएसए अमित कुमार सिंह ने बताया कि रिपोर्ट मिलने के बाद साफ हो पाएगा कि गोंडा में कितने भवन जर्जर हैं, फिर उन्हें गिराने की प्रक्रिया शुरू होगी।
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