16 जिलों में 19 नवंबर से चलेगा फाइलेरिया अभियान:दवा खाने से इनकार करने वालों को जागरूक करेंगे सामुदायिक प्रतिनिधि
फाइलेरिया के खिलाफ जंग में अब समुदाय की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि लोगों को दवा खाने के लिए प्रेरित करने और उनके मन में मौजूद आशंकाओं को दूर करके ही इस पर नियंत्रण पाया जा सकता है। 16 जिलों में 19 अक्टूबर से विशेष अभियान चलाने की तैयारी है। अभियान से पहले मंगलवार को लखनऊ में राज्य स्तरीय बैठक में फाइलेरिया से प्रभावित लोगों समेत विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधियों ने अभियान को प्रभावी बनाने पर मंथन किया। बैठक में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (सीएचओ), पेशेंट स्टेकहोल्डर प्लेटफॉर्म (पीएसपी) के सदस्यों, ग्राम प्रधानों, कोटेदारों, स्वयं सहायता समूहों, शिक्षकों और युवा स्वयंसेवकों ने हिस्सा लिया। इस दौरान दवा सेवन को लेकर लोगों का भरोसा बढ़ाने और जमीनी स्तर पर जागरूकता अभियान मजबूत करने की रणनीति पर चर्चा हुई। दवा बांटना ही नहीं, लोगों को जागरूक करना भी जरूरी महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य डॉ. पवन कुमार अरुण ने कहा कि फाइलेरिया उन्मूलन के लिए केवल दवा वितरित करना पर्याप्त नहीं है। लोगों को दवा सेवन और बीमारी से बचाव के महत्व के बारे में जागरूक करना भी जरूरी है। क्षेत्रीय निदेशक, केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण डॉ. जुल्फिकार अहमद ने फ्रंटलाइन वर्कर्स की भूमिका को अहम बताया। उन्होंने कहा कि नीतियां बनाने का काम अधिकारी करते हैं, लेकिन इन योजनाओं को समुदाय तक पहुंचाने और लोगों को उनसे जोड़ने में फ्रंटलाइन वर्कर्स की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। राज्य फाइलेरिया अधिकारी डॉ. ए.के. चौधरी ने कहा कि दवा के संभावित दुष्प्रभावों का डर, बीमारी के प्रति जागरूकता की कमी, गलत धारणाएं, कामकाज की व्यस्तता और प्रवास जैसे कारणों से कई लोग दवा खाने से बचते हैं। ऐसे में स्थानीय परिस्थितियों को समझकर लोगों से लगातार संवाद करना और उनकी आशंकाओं का समाधान करना जरूरी है। उन्होंने बताया कि पीएसपी के सदस्य दवा लेने से इनकार करने वाले परिवारों की पहचान करते हैं। इसके बाद दवा नहीं लेने की वजह समझकर उन्हें सेवन के लिए प्रेरित करते हैं। इस प्लेटफॉर्म में समाज के विभिन्न वर्गों और विभागों के प्रतिनिधि शामिल हैं, जो लोगों का भरोसा बढ़ाने में मदद करते हैं। फाइलेरिया के खिलाफ योगदान देने वाले 36 लोग सम्मानित एमडीए अभियान में योगदान देने वाले 36 सामुदायिक नेतृत्वकर्ताओं को सम्मानित किया गया। इनमें फाइलेरिया चैंपियन, सीएचओ, आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, एएनएम, ग्राम प्रधान, कोटेदार, पीएसपी सदस्य, शिक्षक और युवा स्वयंसेवक शामिल रहे। कानपुर के जिला मलेरिया अधिकारी ए.के. सिंह ने कहा कि गांवों में पीएसपी के सदस्य फाइलेरिया रोधी दवा का सेवन बढ़ाने के साथ रुग्णता प्रबंधन एवं दिव्यांगता उपचार (एमएमडीपी) प्रशिक्षण में भी सक्रिय भूमिका निभाते हैं। 98% लोगों ने दवा खाई, सामुदायिक भागीदारी से मिली मदद बाराबंकी के टीपाहार आयुष्मान आरोग्य मंदिर की सीएचओ नेहा वर्मा ने बताया कि समुदाय और मरीजों को साथ लेकर काम करने से दवा सेवन बढ़ाने में मदद मिली। फरवरी में एमडीए अभियान के दौरान संबंधित लोगों के साथ मिलकर रणनीति बनाई गई थी। इसके परिणामस्वरूप करीब 98% लोगों ने दवा का सेवन किया। लखनऊ के माल की कोटेदार संगीता यादव ने बताया कि उन्होंने एमडीए अभियान के बारे में पहले सुना था, लेकिन पीएसपी के माध्यम से खुद इससे जुड़ीं। अब वह लोगों को फाइलेरिया के प्रति जागरूक करने और दवा सेवन के लिए प्रेरित करने का काम कर रही हैं। कानपुर के करीब 70 वर्षीय फाइलेरिया चैंपियन महेंद्र कुमार ने कहा, “मैं लोगों को फाइलेरिया रोधी दवा खाने के लिए इसलिए प्रेरित करता हूं, ताकि उन्हें वह सब न झेलना पड़े जो मैंने अपनी जिंदगी में झेला है।” उन्होंने कहा कि लोगों को जागरूक करने के लिए जहां भी बुलाया जाता है, वहां जाते हैं। उनका लक्ष्य अपने गांव, जिले और प्रदेश को फाइलेरिया मुक्त बनाना है। कई विभागों और संस्थाओं के प्रतिनिधि शामिल हुए बैठक में संचारी रोग निदेशक डॉ. रेखा रानी, संयुक्त निदेशक मलेरिया डॉ. विकास सिंघल, विभिन्न जिलों के संचारी रोग नोडल अधिकारी और जिला मलेरिया अधिकारी शामिल हुए। पंचायती राज, खाद्य एवं रसद और शिक्षा विभाग के प्रतिनिधियों के साथ विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ), जीएचएस, पाथ, प्रोजेक्ट कंसर्न इंटरनेशनल (पीसीआई) और सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च (सीफार) के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)