2 दिन में 4.28 करोड़ का ट्रांजक्शन:डिजिटल अरेस्ट गैंग मेंबर के खाते का स्टेटमेंट देख अफसर भी दंग, जांच में खुला रैकेट का राज

Oct 06, 2026 - 06:09
0
2 दिन में 4.28 करोड़ का ट्रांजक्शन:डिजिटल अरेस्ट गैंग मेंबर के खाते का स्टेटमेंट देख अफसर भी दंग, जांच में खुला रैकेट का राज
प्रयागराज में गिरफ्तार डिजिटल अरेस्ट गैंग की जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। पुलिस की पड़ताल में सामने आया कि गिरफ्तार आरोपी आयुष अवस्थी के बैंक खाते से 7 और 8 सितंबर यानी महज दो दिनों में 4 करोड़ 28 लाख रुपये का ट्रांजैक्शन हुआ। इसी रकम में पूर्व महिला सीएमएस से डिजिटल अरेस्ट के जरिए ठगे गए 1 करोड़ 78 लाख रुपये में से 48.50 लाख रुपये भी शामिल थे। खाते में दो दिन के भीतर करोड़ों का लेन-देन सामने आने के बाद पुलिस अफसरों ने जांच का दायरा बढ़ाया तो ठगी के इस नेटवर्क की कड़ियां यूपी से निकलकर महाराष्ट्र, उत्तराखंड और तमिलनाडु तक जुड़ती चली गईं। 48.50 लाख के ट्रांजैक्शन से खुली बड़ी कड़ी एसआरएन की पूर्व महिला सीएमएस से डिजिटल अरेस्ट के जरिए 1.78 करोड़ रुपये ठगे जाने के मामले की जांच में पुलिस ने सबसे पहले ठगी की रकम के फंड फ्लो को खंगाला। इसी दौरान आयुष अवस्थी के बैंक खाते की जांच की गई। पुलिस को पता चला कि 7 और 8 सितंबर को अकेले इस खाते से 4.28 करोड़ रुपये का लेन-देन हुआ था। इसमें प्रयागराज की पीड़िता से ठगी गई रकम में से 48.50 लाख रुपये भी पहुंचे थे। एक खाते में महज दो दिन में इतने बड़े अमाउंट के ट्रांजैक्शन ने जांच की दिशा बदल दी। इसके बाद पुलिस ने खाते से जुड़े दूसरे लेन-देन, KYC, मोबाइल नंबरों की CDR और CAF की जांच शुरू की। रकम के एक खाते से दूसरे खाते में जाने की कड़ियां जोड़ी गईं तो पता चला कि यह सिर्फ प्रयागराज की वारदात तक सीमित मामला नहीं है। होटल में पुलिस स्टेशन का सेटअप पूछताछ और जांच में गैंग के साइबर ठगी करने के तरीके का भी खुलासा हुआ है। पुलिस के मुताबिक आरोपी महंगे होटलों में कमरे बुक करते थे। इसके बाद कमरे में ऐसा सेटअप तैयार किया जाता था, जिससे सामने वाले व्यक्ति को वह पुलिस स्टेशन या किसी जांच एजेंसी का कार्यालय नजर आए। इसके लिए एआई का सहारा भी लिया जाता था। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक इसी बैकग्राउंड के सामने बैठकर आरोपी खुद को पुलिस, सीबीआई या दूसरी जांच एजेंसी का अधिकारी बताते थे। वीडियो कॉल के दौरान पीड़ित को ड्रग्स के पार्सल, पोर्न वेबसाइट की वॉच हिस्ट्री या किसी अन्य आपराधिक मामले में फंसने का डर दिखाया जाता था। इसके बाद गिरफ्तारी, जेल और परिवार को बर्बाद करने की धमकी देकर पीड़ित को मानसिक दबाव में लिया जाता था। इसी तरीके से उसे डिजिटल अरेस्ट का भरोसा दिलाकर रकम अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर कराई जाती थी। 10 फीसदी कमीशन के लिए खाते को बनाया ठगी का रास्ता पुलिस पूछताछ में आयुष अवस्थी ने अपने दो साथियों के नाम बताए हैं। पुलिस के मुताबिक आयुष को साइबर ठगी की रकम अपने खाते में मंगाने के बदले 10 फीसदी कमीशन देने का लालच दिया गया था। जांच में सामने आया कि आयुष की मुलाकात निशांत त्रिवेदी के जरिए पीलीभीत निवासी राजन शुक्ला से हुई थी। इसके बाद तीनों मुंबई पहुंचे और वहीं से गैंग के अन्य सदस्यों के साथ मिलकर साइबर ठगी की रकम को अलग-अलग खातों में डायवर्ट करने का काम किया गया। यूपी से महाराष्ट्र, उत्तराखंड और तमिलनाडु तक नेटवर्क पुलिस की अब तक की जांच में इस नेटवर्क के तार उत्तर प्रदेश के अलावा महाराष्ट्र, उत्तराखंड और तमिलनाडु से जुड़े मिले हैं। इन राज्यों में भी गैंग ने लोगों को साइबर फ्रॉड और डिजिटल अरेस्ट का शिकार बनाया। उत्तराखंड में इस गैंग के खिलाफ साइबर ठगी का मुकदमा दर्ज होने की जानकारी भी जांच में सामने आई है। पुलिस अब दूसरे राज्यों में हुई वारदातों और आयुष के खाते में हुए लेन-देन का मिलान कर रही है। दो फरार आरोपियों के पकड़े जाने पर खुलेंगे और राज पुलिस ने मामले में लखीमपुर खीरी के निशांत त्रिवेदी और पीलीभीत के राजन शुक्ला को वांछित किया है। दोनों की गिरफ्तारी के लिए टीमें लगाई गई हैं। अधिकारियों का कहना है कि दोनों आरोपियों के पकड़े जाने के बाद गैंग के दूसरे सदस्यों, होटल में बनाए जाने वाले सेटअप, इस्तेमाल किए गए बैंक खातों और अलग-अलग राज्यों में हुई साइबर ठगी की घटनाओं के बारे में और जानकारी सामने आ सकती है। फिलहाल पुलिस की जांच का सबसे बड़ा सवाल यही है कि दो दिनों में आयुष के खाते से गुजरे 4.28 करोड़ रुपये की पूरी रकम आखिर किन-किन खातों में गई और इस रकम के पीछे कितने लोग जुड़े हैं। पुलिस अब इसी फंड फ्लो को आधार बनाकर पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ रही है।

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Wow Wow 0
Sad Sad 0
Angry Angry 0

Comments (0)

User