आगरा के GIC मैदान पर होगा सपा का दलित सम्मेलन:पश्चिम यूपी के इस सम्मेलन से दम दिखाएगी सपा, अखिलेश यादव आएंगे

Oct 14, 2026 - 13:11
0
आगरा के GIC मैदान पर होगा सपा का दलित सम्मेलन:पश्चिम यूपी के इस सम्मेलन से दम दिखाएगी सपा, अखिलेश यादव आएंगे
समाजवादी पार्टी (सपा) अपने PDA के दांव को और मजबूत करने में जुटी है। 15 नवंबर को पश्चिम यूपी का आगरा के GIC मैदान पर पहला दलित सम्मेलन होने जा रहा है। इस सम्मेलन के लिए सपा ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। पार्टी पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं को सम्मेलन से संबंधित जिम्मेदारियां सौंपी जा रही हैं। सपा सांसद व पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव रामजीलाल सुमन का कहना है, पश्चिमी उत्तर प्रदेश का यह सबसे बड़ा दलित सम्मेलन होगा। आगरा दलित समाज की राजनीतिक चेतना और संघर्ष की महत्वपूर्ण भूमि है। अब विस्तार से पढ़ते हैं... 2027 का विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है, राजनीतिक सरगर्मी उतनी ही तेज होती जा रही हैं। दलितों का गढ़ का कहे जाने वाले आगरा में सपा अपनी जड़ें और मजबूत करना चाहती है। इसको देखते हुए पार्टी दीपावली बाद आगरा में दलित महासम्मेलन करने जा रही है। इस सम्मेलन में आगरा ही नहीं, आसपास के कई जिलों से दलित समाज के लोग आएंगे। ये पश्चिम यूपी का सम्मेलन होगा। दरअसल, सपा PDA (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) पर फोकस कर रही है। इस सम्मेलन में सपा प्रमुख अखिलेश यादव भी आएंगे। आगरा ही क्यों चुना? आगरा को दलितों का गढ़ कहा जाता है। यहां वैसे तो सपा ज्यादा मजबूत स्थिति में नहीं रही। मगर, 2022 के चुनाव में बसपा के कमजोर होने के साथ ही सपा को ताकत मिली। अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पिछले विधानसभा चुनाव में सपा प्रत्याशी अधिकांश सीटों पर बसपा प्रत्याशियों से आगे रहे थे। हालांकि जिले की सभी 9 सीटों पर भाजपा ने जीत हासिल की थी। 2022 के चुनाव में सपा+रालोद की स्थिति 2017 के चुनाव में आगरा में सपा+कांग्रेस की स्थिति सिर्फ दो बार मिली जीत आगरा में कुल नौ विधानसभा सीटें हैं। इनमें से किसी भी सीट पर सपा अब तक अपने सियासी समीकरण मजबूत नहीं कर सकी है। 1993 और 2012 के विधानसभा चुनाव को छोड़ दें, तो पार्टी को किसी अन्य चुनाव में यहां जीत नहीं मिली। 2012 में बाह विधानसभा सीट से अरिदमन सिंह की जीत में उनकी व्यक्तिगत छवि और मजबूत पारिवारिक राजनीतिक पृष्ठभूमि की अहम भूमिका रही। अरिदमन सिंह इससे पहले दो बार भाजपा और तीन बार जनता दल के टिकट पर लगातार विधायक चुने जा चुके थे। ऐसे में उनकी व्यक्तिगत पकड़ को सपा की जीत का प्रमुख आधार माना गया। सपा का गठन 4 अक्टूबर 1992 को हुआ। इसके बाद से ये पार्टी 7 विधानसभा चुनाव में मैदान में उतर चुकी है। 2022 में रालोद और 2017 में कांग्रेस गठबंधन के साथ चुनाव लड़ा। पिछले विधानसभा चुनाव में सपा की स्थिति में थोड़ा सुधार हुआ। इससे पहले पार्टी प्रत्याशी आगरा में 3 और 4 नंबर पर जूझते नजर आए। 2022 के चुनाव में जरूर 5 सीटों पर दूसरे नंबर पर रही। पिछले दो चुनावों में भाजपा को आगरा की 9 सीटों पर प्रचंड जीत हासिल हुई। ऐसे में भाजपा प्रत्याशियों को विरोधी दलों के प्रत्याशी टक्कर देते नजर नहीं आए। हालांकि सपा ने अपनी स्थिति में सुधार करते हुए जिले की अधिकतर सीटों पर बसपा को धकेल पर तीसरे नंबर पर भेजकर खुद को दूसरे नंबर पर खड़ा किया। आगरा में सपा की स्थिति 2022 के चुनाव में सपा+रालोद की स्थिति

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Wow Wow 0
Sad Sad 0
Angry Angry 0

Comments (0)

User