सिंधु जल संधि सस्पेंड, जानें कब से दिखेगा इसका असर
दि राइजिंग न्यूज। 27 अप्रैल 2025 । 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 निर्दोष लोगों की मौत के बाद भारत ने बड़ा कदम उठाते हुए सिंधु जल संधि को स्थगित कर दिया। पाकिस्तान की 80% कृषि भूमि सिंधु के पानी पर निर्भर है। अब सवाल उठता है — भारत कब तक पाकिस्तान को पानी के लिए तरसा सकता है?
दि राइजिंग न्यूज। 27 अप्रैल 2025 ।
22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 28 निर्दोष लोगों की मौत के बाद भारत ने बड़ा कदम उठाते हुए सिंधु जल संधि को स्थगित कर दिया।
पाकिस्तान की 80% कृषि भूमि सिंधु के पानी पर निर्भर है। अब सवाल उठता है — भारत कब तक पाकिस्तान को पानी के लिए तरसा सकता है?
क्या भारत तुरंत पानी रोक सकता है?
फ़िलहाल भारत के पास सिंधु, झेलम और चिनाब जैसी पश्चिमी नदियों पर पानी को स्टोर या डायवर्ट करने की सीमित क्षमता है।
हालांकि, संधि निलंबित होने के बाद भारत अब बिना किसी पाकिस्तानी हस्तक्षेप के बड़े प्रोजेक्ट्स बना सकता है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि पाकिस्तान को मिलने वाला पानी पूरी तरह से रोकने में 5 से 10 साल लग सकते हैं, क्योंकि बांधों और जलाशयों के निर्माण में समय लगेगा।
अब क्या होगा पश्चिमी नदियों के पानी का?
अब भारत:
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नए स्टोरेज और डायवर्जन प्रोजेक्ट्स शुरू कर सकता है।
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पाकिस्तान को जल प्रवाह की जानकारी देना बंद कर सकता है।
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फ्लशिंग जैसे तकनीक से बांधों की लाइफ बढ़ा सकता है।
पाकिस्तान के लिए क्यों संकट का समय है?
सिंधु नदी सिस्टम पाकिस्तान की:
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93% पानी की जरूरत पूरी करता है।
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80% कृषि भूमि को सींचता है।
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GDP का 25% इसी पानी पर निर्भर है।
पाकिस्तान के नेताओं की बौखलाहट भी दिखती है। बिलावल भुट्टो ने धमकी दी थी — "या तो पानी बहेगा या खून।"
भारत की तीन-चरणीय योजना
भारत ने तीन स्तर पर काम शुरू कर दिया है:
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लघु अवधि: छोटे प्रोजेक्ट्स से पानी का आंशिक डायवर्जन।
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मध्यम अवधि: नए जलाशयों और हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स का निर्माण।
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दीर्घकालीन योजना: सिंधु नदी सिस्टम पर पूर्ण नियंत्रण के लिए मेगा प्रोजेक्ट्स।
उझ, पाकल दुल, कीरू, रतले, सवालकोट जैसे प्रोजेक्ट्स इस दिशा में भारत के रणनीतिक कदम हैं।
क्या भारत सिंधु जल संधि से बाहर निकल सकता है?
जी हाँ।
विएना कन्वेंशन ऑन लॉ ऑफ ट्रीटीज़, 1969 के अनुच्छेद 60 के तहत भारत, पाकिस्तान द्वारा लगातार संधि के उल्लंघन के आधार पर इसे पूरी तरह से खत्म कर सकता है।
नतीजा क्या होगा?
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पाकिस्तान पानी के लिए बुरी तरह तरसेगा, खासकर सूखे के मौसम में।
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भारत अपनी बढ़ती जल और ऊर्जा जरूरतों को बेहतर ढंग से पूरा कर सकेगा।
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सिंधु नदी सिस्टम पर भारत का रणनीतिक नियंत्रण और मजबूत होगा।