अधिवक्ता के भाई पर हमला: HC से आरोपियों को राहत-नहीं:गोंडा में FIR रद्द करने और गिरफ्तारी की मांग से बचने वाली याचिका खारिज
गोंडा में अधिवक्ता शिवेंद्र मिश्रा के भाई सत्यम मिश्रा पर जानलेवा हमले के मामले में आरोपी अनिल ओझा, देवेंद्र ओझा और सुरेंद्र ओझा को बुधवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ से राहत नहीं मिली। जस्टिस रजनीश कुमार और जस्टिस बबीता रानी की पीठ ने तीनों की याचिकाएं खारिज कर दीं। बुधवार शाम करीब 6 बजे आई आदेश की प्रति से इसकी पुष्टि हुई। तीनों ने 30 सितंबर को FIR रद्द करने और गिरफ्तारी से राहत की मांग को लेकर याचिका दाखिल की थी। 25 सितंबर से फरार हैं तीनों आरोपी पुलिस के मुताबिक, 25 सितंबर को चाय पीने के दौरान सत्यम मिश्रा पर लाठी-डंडे और धारदार हथियार से हमला किया गया था। मामले में अनिल ओझा, देवेंद्र ओझा, सुरेंद्र ओझा, अमन ओझा और पांच अज्ञात लोगों पर हमला करने का आरोप है। हमले में सत्यम मिश्रा गंभीर रूप से घायल हुए थे। घटना के बाद से अनिल, देवेंद्र और सुरेंद्र फरार बताए जा रहे हैं। पुलिस की SOG और सर्विलांस टीम अब तक 50 से ज्यादा जगहों पर दबिश दे चुकी है। एक आरोपी पहले हो चुका गिरफ्तार मामले में 26 सितंबर को अमन ओझा को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। बाद में उसे जमानत मिल गई। अधिवक्ता शिवेंद्र मिश्रा ने कहा कि हाईकोर्ट से तीनों आरोपियों को राहत नहीं मिली है। उन्होंने पुलिस से जल्द गिरफ्तारी की मांग की है। उनका कहना है कि सत्यम की जान को अभी भी खतरा बना हुआ है। मेडिकल कॉलेज और लखनऊ में चला इलाज हमले में घायल सत्यम मिश्रा का तीन दिन तक गोंडा मेडिकल कॉलेज में इलाज चला। इसके बाद एक दिन लखनऊ में उपचार कराया गया। फिलहाल वह घर पर हैं। नगर कोतवाल बिंदेश्वरी मणि त्रिपाठी ने बताया कि आरोपियों को हाईकोर्ट से फिलहाल कोई राहत नहीं मिली है। पुलिस 25 सितंबर से ही उनकी गिरफ्तारी के प्रयास कर रही है। पुलिस का कहना है कि गोंडा से लेकर लखनऊ तक कई स्थानों पर दबिश दी जा चुकी है और गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी जारी है।
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