अमेरिका में अच्छी कमाई के लिए नामचीन डिग्री जरूरी नहीं:पिछड़े कॉलेजों के ग्रेजुएट भी हार्वर्ड जैसा कमा रहे, सैलरी औसतन 95 लाख सालाना

Sep 15, 2026 - 16:06
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अमेरिका में अच्छी कमाई के लिए नामचीन डिग्री जरूरी नहीं:पिछड़े कॉलेजों के ग्रेजुएट भी हार्वर्ड जैसा कमा रहे, सैलरी औसतन 95 लाख सालाना
अमेरिका की फोर्ब्स टॉप-500 कॉलेज रैंकिंग के मुताबिक सालाना 95 लाख रुपए से ज्यादा कमाई के लिए किसी ‘बड़े’ या ‘नामचीन’ कॉलेज की डिग्री जरूरी नहीं है। रैंकिंग में सबसे नीचे वाले कॉलेजों के ग्रेजुएट्स भी डिग्री लेने के 10 साल बाद औसतन 95 लाख रुपए से ज्यादा कमा रहे हैं। फोर्ब्स की लिस्ट में एमआईटी, प्रिंसटन और हार्वर्ड सबसे ऊपर हैं। इन कॉलेजों से पढ़ने वालों की 10 साल बाद कमाई 1.15 करोड़ रुपए से ज्यादा बताई गई है। वहीं, लिस्ट में 500वें नंबर पर ओहायो के ग्रामीण इलाके का निजी मेरिएटा कॉलेज है। यहां से पढ़ने वालों की 10 साल बाद औसत कमाई करीब 1 करोड़ रुपए है। रिपोर्ट के मुताबिक लिस्ट में लगभग हर कॉलेज के ग्रेजुएट्स की औसत कमाई 86 लाख रुपए से ज्यादा है। यानी कम मशहूर कॉलेजों से पढ़ने वालों की कमाई भी काफी अच्छी हो सकती है। कॉलेज चुनने में कमाई को आधार न बनाएं रिपोर्ट में कहा गया है कि कॉलेज चुनते समय सिर्फ कमाई को आधार नहीं बनाना चाहिए। ऊंची रैंक वाले कॉलेजों में पुराने छात्रों का मजबूत नेटवर्क और कॉलेज के नाम की पहचान जैसे फायदे मिलते हैं। पर ये फायदे 10 साल बाद की कमाई के आंकड़ों में सीधे नहीं दिखते। अमेरिका में बैचलर डिग्री पर औसतन 33 लाख कर्ज एजुकेशन डेटा इनिशिएटिव के मुताबिक पिछले 20 साल में कॉलेज की औसत लागत दोगुने से ज्यादा हो गई है। इसी वजह से अब एक बैचलर डिग्री के लिए औसतन 33 लाख रुपए से ज्यादा का कर्ज लेना पड़ रहा है। डिग्री सफलता की गारंटी नहीं: सीईओ कई बड़े कारोबारी भी मानते हैं कि डिग्री सफलता की पक्की गारंटी नहीं है। मेटा के सीईओ मार्क जकरबर्ग ने कहा कि कॉलेज लोगों से जुड़ने और रिश्ते बनाने में मदद करता है, लेकिन सवाल यह है कि क्या कॉलेज आज की नौकरियों के लिए युवाओं को तैयार कर रहा है?

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