अमेरिका से काशी आया जैक्सन,अस्सी घाट पर किया अस्थि विसर्जन:बोला- नींद में बार-बार आते थे चाचा,फोन पर पढ़ा था काशी में पिंडदान का महत्व

Oct 04, 2026 - 08:48
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अमेरिका से काशी आया जैक्सन,अस्सी घाट पर किया अस्थि विसर्जन:बोला- नींद में बार-बार आते थे चाचा,फोन पर पढ़ा था काशी में पिंडदान का महत्व
मोक्ष की नगरी काशी में सनातन परंपरा और भावनाओं से जुड़ा एक अनोखा मामला सामने आया। अमेरिका के मिशिगन से श्रद्धालु जैक्सन अपने दिवंगत चाचा नेट की अस्थियां लेकर वाराणसी पहुंचे। यहां प्रसिद्ध अस्सी घाट पर उन्होंने चाचा की आत्मा की शांति के लिए विधि-विधान से अस्थि विसर्जन और पिंडदान कराया। धार्मिक अनुष्ठान के दौरान जैक्सन काफी भावुक नजर आए। बचपन से चाचा के साथ रहे, मौत के बाद भी रिश्ता नहीं टूटा जैक्सन ने बताया कि वह बचपन से अपने चाचा नेट के साथ रहे हैं। चाचा से उनका गहरा भावनात्मक जुड़ाव था। उनके निधन के बाद भी वह उन्हें लगातार याद करते रहे। जैक्सन के मुताबिक, चाचा की मृत्यु के बाद उन्हें अक्सर रात में सपने आते थे। वह बताते हैं कि नींद के दौरान चाचा के बार-बार दिखाई देने से वह परेशान रहने लगे थे। उन्होंने इस परेशानी का समाधान तलाशना शुरू किया। इसी दौरान उन्हें काशी और यहां होने वाले धार्मिक अनुष्ठानों से जुड़ा एक वीडियो देखने को मिला। वीडियो में काशी की धार्मिक मान्यताओं और अस्थि विसर्जन-पिंडदान के बारे में जानकारी मिली। इसके बाद उन्होंने तय किया कि वह अपने चाचा की अंतिम इच्छा पूरी करने के लिए खुद काशी जाएंगे। अस्सी घाट पर मंत्रोच्चार के बीच किया अस्थि विसर्जन जैक्सन चाचा की अस्थियां लेकर वाराणसी पहुंचे। अस्सी घाट पर तीर्थ पुरोहित राहुल पांडेय के आचार्यत्व में अस्थि विसर्जन और पिंडदान का अनुष्ठान कराया गया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच धार्मिक प्रक्रिया पूरी की गई। इसके बाद जैक्सन ने गंगा की पवित्र धारा में चाचा की अस्थियां प्रवाहित कीं। इस दौरान वह काफी भावुक हो गए। उन्होंने अपने चाचा की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की और पिंडदान की प्रक्रिया में भी श्रद्धापूर्वक हिस्सा लिया। पुरोहित बोले- काशी में पिंडदान की विशेष मान्यता तीर्थ पुरोहित राहुल पांडेय ने बताया कि सनातन परंपरा में काशी और गंगा का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार काशी में अस्थि विसर्जन और पिंडदान दिवंगत आत्मा की शांति और मोक्ष की कामना से किया जाता है। पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के लिए पिंडदान और तर्पण की परंपरा सदियों से चली आ रही है।

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