अंतरिक्ष में अगले 5 साल में जंग छिड़ सकती है:अमेरिका-चीन समेत कई देश तैयारी में जुटे; इससे इंटरनेट, बैंकिंग जैसी सुविधा पर असर पड़ेगा
अगले 5 साल में अंतरिक्ष में जंग छिड़ सकती है। विशेषज्ञों ने आशंका जताई है कि अमेरिका, ब्रिटेन, रूस और चीन जैसे देश एक-दूसरे की सैटेलाइट को निशाना बना सकते हैं। इंटरनेट, टीवी, मौसम की जानकारी और बैंकिंग जैसी कई सेवाएं सैटेलाइट पर निर्भर हैं। अगर युद्ध के दौरान सैटेलाइट को नुकसान पहुंचा, तो इन सेवाओं पर असर पड़ सकता है। विमानों और जहाजों को रास्ता पता करने में भी परेशानी हो सकती है। अंतरिक्ष में हथियारों की होड़ क्यों बढ़ रही है? चीन के 5 सैटेलाइट ने एक साथ अभ्यास किया अमेरिकी स्पेस फोर्स के मुताबिक, चीन के 5 सैटेलाइट अंतरिक्ष में एक-दूसरे के करीब आए और ऐसी गतिविधियां कीं, जिनका इस्तेमाल सैन्य कार्रवाई में हो सकता है। चीन ऐसी मशीनें बना रहा है, जो अंतरिक्ष में दूसरे सैटेलाइट को पकड़ सकती हैं या उनकी जगह से हटा सकती हैं। रूस के सैन्य सैटेलाइट भी दूसरे देशों के सैटेलाइट के करीब पहुंचकर उनकी निगरानी कर रहे हैं। ब्रिटेन ने अंतरिक्ष की सुरक्षा के लिए यूनिट बनाई ब्रिटेन की वायुसेना ने सितंबर में अपने सैटेलाइट की सुरक्षा के लिए एक विशेष इकाई बनाई। यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी भी अपनी योजनाओं में सुरक्षा और सेना से जुड़े इस्तेमाल पर ध्यान दे रही है। अमेरिका ने 2019 में अपनी अंतरिक्ष सेना बनाई थी। इसका काम अमेरिकी सैटेलाइट की सुरक्षा करना और अंतरिक्ष में दूसरे देशों की सैन्य गतिविधियों पर नजर रखना है। सैटेलाइट को रोकने के लिए नई तकनीक बन रही देश ऐसी तकनीक विकसित कर रहे हैं, जिनसे दूसरे सैटेलाइट का काम रोका जा सके। इनमें लेजर, रेडियो संकेतों को रोकने वाले उपकरण और अंतरिक्ष में दूसरे सैटेलाइट को पकड़ने वाली मशीनें शामिल हैं। कुछ देश सैटेलाइट को नष्ट करने वाली मिसाइलों का परीक्षण भी कर चुके हैं। इनमें शामिल हैं: अंतरिक्ष में हमला किस तरीके से हो सकता है जीपीएस के संकेत रोककर सैटेलाइट से आने वाले रेडियो संकेतों को रोका जा सकता है। इससे मोबाइल पर लोकेशन देखने, विमानों को रास्ता बताने और जहाजों की स्थिति पता करने वाली सेवाओं पर असर पड़ सकता है। रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान जीपीएस संकेतों में रुकावट की घटनाएं सामने आई हैं। गलत लोकेशन के संकेत भेजकर हमलावर नकली संकेत भेजकर किसी विमान, जहाज या दूसरे उपकरण को उसकी गलत लोकेशन बता सकता है। इसे स्पूफिंग कहते हैं। इससे नेविगेशन सिस्टम को गलत जानकारी मिल सकती है और सही रास्ता पहचानने में परेशानी हो सकती है। सैटेलाइट को चलाने वाले कंप्यूटर पर हमला करके सैटेलाइट को जमीन पर मौजूद केंद्रों से नियंत्रित किया जाता है। हैकर इन केंद्रों के कंप्यूटर सिस्टम पर हमला कर सकते हैं। इससे सैटेलाइट से संपर्क टूट सकता है, जरूरी जानकारी चोरी हो सकती है या उसका कामकाज प्रभावित हो सकता है। ------------------------- ये खबर भी पढ़ें… ट्रम्प ने इजराइलियों से कहा- नेतन्याहू को दोबारा प्रधानमंत्री बनाएं:किसी और को चुना तो ईरान के खिलाफ अमेरिका को अकेले लड़ना पड़ेगा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इजराइल के लोगों से प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को दोबारा प्रधानमंत्री चुनने की अपील की है। उन्होंने कहा कि बीबी नेतन्याहू आपको कभी निराश नहीं करेंगे। पूरी खबर यहां पढ़ें…
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)