ARTO को धमकाने वाले 18 दिन से गैरहाजिर:निलंबन के साथ मुख्यालय से अटैच फिर भी नहीं की रिपोर्ट, 3 तो 10 साल से जमे
प्रयागराज में परिवहन विभाग के ARTO आनंद प्रताप राव को घेरकर गाली-गलौज करने और जान से मारने की धमकी देने के मामले में नया खुलासा हुआ है। आरोपित चारों कर्मचारी निलंबित होने के बाद यानी 18 दिन से गैरहाजिर चल रहे। उन्हें एक अक्टूबर को निलंबित कर मुख्यालय से अटैच किया गया था, लेकिन किसी ने वहां रिपोर्ट नहीं की। इसके बावजूद वे प्रयागराज में ही मौजूद रहे। आरोप है कि इसी दौरान उन्होंने अपने ही विभाग के उच्च अधिकारी को घेरकर धमकाया। पुलिस ने चारों की तलाश शुरू कर दी है। अवैध वसूली की शिकायत पर हुआ था एक्शन ARTO आनंद प्रताप राव के मुताबिक, चारों कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनहीनता, अवैध वसूली और भ्रष्टाचार से जुड़ी शिकायतें शासन तक पहुंची थीं। इन शिकायतों के आधार पर परिवहन आयुक्त, उत्तर प्रदेश ने एक अक्टूबर को उन्हें निलंबित कर दिया था। निलंबन के बाद चारों को मुख्यालय से अटैच किया गया था और वहां रिपोर्ट करना था, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। कार्रवाई से नाराज होकर निशाना बनाया आरोप है कि मुख्यालय में रिपोर्ट करने के बजाय चारों प्रयागराज में ही घूमते रहे। इसी बीच 16 अक्टूबर को एलनगंज में ARTO आनंद प्रताप राव को घेरने और धमकाने की घटना सामने आई। विभागीय अधिकारी का आरोप है कि कर्मचारी निलंबन की कार्रवाई से नाराज थे और इसी वजह से उन्हें निशाना बनाया। निलंबन के खिलाफ याचिका हुई है खारिज आनंद प्रताप राव के मुताबिक, चारों कर्मचारियों ने निलंबन के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी, लेकिन उनकी याचिका खारिज हो गई। इसके बाद आरोपित उनसे नाराज हो गए। अधिकारी का आरोप है कि चारों ने उन्हें मुकदमे की पैरवी बंद करने के लिए दबाव में लेने की कोशिश की। 16 अक्टूबर की शाम करीब चार बजे ARTO अपने सहकर्मी प्रवर्तन अधिकारी राजीव कुमार के एलनगंज स्थित आवास से सरकारी काम के सिलसिले में फील्ड पर निकल रहे थे। इसी दौरान चारों ने उनकी गाड़ी घेर ली। आरोप है कि उनके साथ गाली-गलौज की गई और गाड़ी के शीशे पर लात मारी गई। पत्नी-बच्चों को उठवाने, जान से मारने को धमकाया मामले में निलंबित प्रवर्तन सिपाही पंकज सिंह, अनिल प्रताप सिंह, प्रवर्तन पर्यवेक्षक शीतला प्रसाद यादव और प्रवर्तन चालक जनार्दन शर्मा के नाम सामने आए हैं। ARTO की तहरीर के मुताबिक, पंकज सिंह ने उन्हें निलंबन के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए विवाद किया। आरोप है कि चारों ने उनकी पत्नी और बच्चों को लखनऊ स्थित घर से उठवा लेने, नौकरी नहीं करने देने और जान से मारने की धमकी दी। उन्हें यह भी कहा गया कि सड़क पर चेकिंग के लिए निकलते समय सोच लें कि घर लौट भी पाएंगे या नहीं। ARTO का कहना है कि सरकारी दायित्व निभाते समय इस तरह घेरकर धमकाया जाना उनकी सुरक्षा के साथ विभागीय कामकाज के लिए भी गंभीर चिंता का विषय है। एक जिले में अधिकतम 7 साल तैनाती इस मामले में चारों कर्मचारियों की प्रयागराज में लंबे समय से तैनाती का मुद्दा भी सामने आया है। जानकारी के मुताबिक, जिस संवर्ग से ये कर्मचारी आते हैं, उसमें एक जिले में तैनाती की अधिकतम अवधि सात साल बताई जा रही है। इसके बावजूद तीन कर्मचारी 10 साल से अधिक समय से प्रयागराज में तैनात हैं। इसके अलावा, कुछ कर्मचारियों का गृह जिला भी प्रयागराज बताया जा रहा है। आरोप है कि प्रवर्तन दल में तैनाती के नियमों के अनुसार उन्हें अपने गृह जिले के साथ-साथ गृह मंडल में भी तैनाती नहीं मिलनी चाहिए। ऐसे में इन कर्मचारियों की लंबे समय से जिले में तैनाती और स्थानांतरण संबंधी नियमों के पालन को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। पुलिस कर रही आरोपितों की तलाश कर्नलगंज पुलिस ने ARTO की तहरीर के आधार पर चारों कर्मचारियों के खिलाफ FIR दर्ज की है। थाना प्रभारी ज्ञानेश्वर मिश्रा ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है और आरोपितों की तलाश की जा रही है।
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