अविमुक्तेश्वरानंद के बाद रामभद्राचार्य का मामला सुर्खियों में:प्रयागराज में एक साल में दो बड़े धर्मगुरु कोर्ट में केस, चलेगी जांच
प्रयागराज कोर्ट में तुलसी पीठाधीश्वर स्वामी रामभद्राचार्य के खिलाफ परिवाद (केस) दाखिल हुआ है। मामले में स्वामी रामभद्राचार्य को नोटिस भी जारी हुई है। प्रयागराज में एक साल के अंदर धर्मगुरुओं पर परिवाद दाखिल करने का यह दूसरा बड़ा मामला है। इससे पहले आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ पॉक्सो कोर्ट में केस दाखिल किया था।
तब यह मामला सुर्खियों में आया था। स्पेशल कोर्ट से यह मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंचा तब जाकर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को राहत मिली थी। अब पीठाधीश्वर स्वामी रामभद्राचार्य पर केस दाखिल होने से मामला सुर्खियों में आ गया है। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पर केस करने वाले आशुतोष महाराज भी खुलकर मीडिया के सामने आने लगे थे, अब रामभद्राचार्य पर परिवाद दाखिल करने वाले सुरेश चंद्र उपाध्याय भी खुलकर अपनी बातें रख रहे हैं। ब्राह्मण समाज की उप जातियों को लेकर तीखी टिप्पियां करने वाले धर्मगुरु रामभद्राचार्य मामले की सुनवाई 12 अक्टूबर को होनी है। अब सबकी निगाहें हैं कि आगे क्या होगा, क्या शंकराचार्य सरीखा यह मामला निचली अदालत होते हुए हाईकोर्ट तक पहुंच सकता है। वाद दाखिल करने वाले उपाध्याय बोले संत रामभद्राचार्य ने ब्राह्मणों की उप जातियां जैसे उपाध्याय, पाठक, दीक्षित, तिगुनायत के खिलाफ नीच शब्द का इस्तेमाल किया। सोशल मीडिया वीडियो वायरल है। उनके बयान की वजह से हम लड़कियों की शादी नहीं कर पा रहे हैं। मैं पूछना चाहता हूं कि क्या वो पारिवारिक परिवेश में हैं, उनके लड़कियां हैं, वो शादी-ब्याह किए हैं, वो शादी-ब्याह की बात क्या कर रहे, उनसे क्या मतलब है। हमारी भावनाएं आहत हैं, हम लोग समाज में तिरस्कृत हो रहे हैं, हमारे बच्चे अपमानित हो रहे हैं। शंकराचार्य पर दर्ज हुआ था वाद आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ प्रयागराज की स्पेशल पॉक्सो कोर्ट में 8 फरवरी 2026 को वाद दाखिल किया था। आरोप लगाया था कि माघ मेले और महाकुंभ के दौरान शिविर व गुरुकुल की आड़ में नाबालिग बच्चों (बटुकों) का यौन उत्पीड़न और शोषण किया। सुनवाई के बाद कोर्ट के आदेश पर प्रयागराज के झूंसी थाने में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ FIR दर्ज हुई थी। जगद्गुरु रामभद्राचार्य पर वाद का पूरा मामला जानिये तुलसी पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामभद्राचार्य के खिलाफ प्रयागराज कोर्ट में केस चलेगा। रामभद्राचार्य के एक बयान के खिलाफ कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। बयान में जगद्गुरु ने कहा था- ऊंच कुल के ब्राह्मण अपनी बेटियां उपाध्याय, चौबे, त्रिगुणायत, दीक्षित और पाठकों को नहीं देते, क्योंकि हम इन्हें अधम मानतें हैं। याचिकाकर्ता ने कहा कि रामभद्राचार्य की लोग पूजा करते हैं। वृंदावन में भागवत कथा के दौरान दिए उनके बयान के बाद उपाध्याय समाज को लोग बुरी नजर से देखने लगे। लड़के-लड़कियों की शादी में रुकावट आने लगी है। रामभद्राचार्य के खिलाफ कार्रवाई जरूरी है। प्रयागराज जिला अदालत ने गुरुवार को जगद्गुरु रामभद्राचार्य को नोटिस जारी कर 12 अक्टूबर को कोर्ट में पेश होने के लिए कहा। जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने क्या कहा था, पढ़िए याचिकाकर्ता के मुताबिक, 3 फरवरी 2024 को वृंदावन में भागवत कथा के दौरान रामभद्राचार्य ने उपाध्याय समाज पर टिप्पणी की। उन्होंने कहा था, “जो नीच ब्राह्मणों….अधम ब्राह्मणों की चर्चा चलाई गई। हमारे यहां कुछ ब्राह्मण अच्छे नहीं माने जाते हैं। उनके यहां ऊंचे कुल के लोग अपनी बेटी नहीं देते हैं। उपाध्याय, चौबे, त्रिगुणायत, दीक्षित और पाठक को इसलिए अधम मानते हैं, क्योंकि इन्होंने विद्यार्थियों से पैसा लेकर पढ़ाया। इनके यहां हम बेटी नहीं देते और न इनके यहां से बेटी लेते हैं। हम विद्यार्थी का एक पैसा भी लेना गोमांस के बराबर समझते हैं। मैं सरयूपारीण ब्राह्मण हूं। पहले मैं ब्राह्मण हूं। वह भी वशिष्ठ गोत्रीय ब्राह्मण हूं। फिर साधु हूं, फिर संन्यासी हूं, फिर जगद्गुरु रामानंदाचार्य हूं। मुझे अपने ब्राह्मणत्व पर गर्व है।” याचिकाकर्ता बोले- बयान से बच्चों की शादी में रुकावट आई वाराणसी के रहने वाले याचिककर्ता सुरेश चंद्र उपाध्याय ने 14 सितंबर 2026 को प्रयागराज कोर्ट में याचिका दाखिल की। कहा- जगद्गुरु रामभद्राचार्य संत हैं, लोग उनकी पूजा करते हैं। भागवत कथा के दौरान दिए उनके बयान के बाद उपाध्याय समाज को लोग हेय दृष्टि से देखने लगे हैं। लड़के-लड़कियों की शादी में बाधा आने लगी है। याचिकाकर्ता इस सिलसिले में पुलिस कमिश्नर प्रयागराज से मिले थे, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद कोर्ट में याचिका दी।जगद्गुरु रामभद्राचार्य के खिलाफ कार्रवाई करना जरूरी है। कब-कब बयानों से चर्चा में रहे जगद्गुरु रामभद्राचार्य 24 अगस्त 2025: रामभद्राचार्य ने प्रेमानंद महाराज को लेकर कहा- वह उन्हें न विद्वान मानते हैं, न चमत्कारी। चुनौती दी कि प्रेमानंद महाराज उनके सामने संस्कृत का एक अक्षर बोलकर दिखाएं या उनके संस्कृत श्लोक का अर्थ समझाएं। कई संतों ने प्रेमानंद महाराज का समर्थन किया। बाद में रामभद्राचार्य ने सफाई दी कि उन्होंने प्रेमानंद महाराज के लिए वैसी टिप्पणी नहीं की थी। सितंबर 2025: पश्चिमी यूपी को लेकर रामभद्राचार्य ने कहा- यहां आकर लगता है मानो ये मिनी पाकिस्तान है। अब हमें मुखर होना है। हम ऐसा नहीं होने देंगे।’ बयान पर मुस्लिम धर्मगुरुओं ने आपत्ति जताई थी। नवंबर 2024: जयपुर में रामभद्राचार्य ने आरक्षण को लेकर कहा- सवर्ण वर्ग का बच्चा 100% अंक लाने के बावजूद जूता सिलाई करे और SC वर्ग का बच्चा 4% अंक लाकर कलेक्टर बन जाए। SC-ST समेत कई संगठनों ने इसका विरोध किया था। जनवरी 2024: रामकथा के दौरान रामभद्राचार्य ने कहा- जो भगवान राम को नहीं भजता, वह नीच है। दलित संगठनों ने आपत्ति जताई और पुलिस से SC/ST एक्ट के तहत कार्रवाई की मांग की। प्रयागराज कोर्ट ने 15 फरवरी 2024 को शिकायत पर कार्रवाई से इनकार कर दिया। फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई, लेकिन 8 अक्टूबर 2024 को हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी। अप्रैल 2023: आगरा में रामभद्राचार्य ने कहा था- ‘मरे मुलायम-कांशीराम, प्रेम से बोलो जय श्रीराम।’ सपा नेताओं ने इसका विरोध किया। इलाहाबाद हाईकोर्ट में FIR की मांग वाली याचिका दायर हुई। कोर्ट ने रामभद्राचार्य को नोटिस जारी कर जवाब मांगा। बाद में कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी। ……………………..
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बगैर पढ़े लिखे सब आज महर्षि वाल्मीकि और वेदव्यास बनना चाहते हैं। वे मेरी बात समझना नहीं चाहते। मेरी उपलब्धियों से उनको ईर्ष्या होती है तो मेरा दुष्प्रचार करते हैं। मैंने कभी किसी संत की निंदा नहीं की। हां, मैं विरोध करता हूं, जब कोई गलत करता है। जो कथा तो कर रहे हैं रामजी की और मौला अली- मौला अली कीर्तन करा रहे हैं, उनकी कथा कभी नहीं सुनना चाहिए। ह कहना है पद्म विभूषण जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य का। संत प्रेमानंदजी के संस्कृत ज्ञान पर सवाल उठाने वाले जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य की लोगों ने काफी आलोचना की। पढ़ें पूरी खबर
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