अयोध्या में मां सिद्धिदात्री के दर्शन को उमड़ी भीड़:कामाख्या धाम में लगी लंबी कतारें, करीब एक हजार स्थानों पर भंडारा लगेगा

Oct 19, 2026 - 08:08
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अयोध्या में मां सिद्धिदात्री के दर्शन को उमड़ी भीड़:कामाख्या धाम में लगी लंबी कतारें, करीब एक हजार स्थानों पर भंडारा लगेगा
अयोध्या शारदीय नवरात्र के नौवें दिन सोमवार को मां सिद्धिदात्री की पूजा-अर्चना के लिए अयोध्या जिले के देवी मंदिरों और दुर्गा पूजा पंडालों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। भोर से ही भक्त माता रानी के दर्शन के लिए मंदिरों में पहुंचने लगे। जिले के प्रमुख शक्तिपीठ कामाख्या धाम में सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं। मंदिर परिसर माता रानी के जयकारों से गुंजायमान हो उठा। नवरात्र के अंतिम दिन जगह-जगह धार्मिक अनुष्ठान, पूजन और भंडारे की तैयारियां भी की गईं। मां जालपा देवी मंदिर, कामाख्या माता मंदिर, आदि शक्ति माता मंदिर, भिटरी माता मंदिर, ज्वाला देवी मंदिर और आदि काली माता मंदिर समेत विभिन्न देवी मंदिरों में श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। सैदपुर, बाबा बाजार, शुजागंज, रुदौली, सोहावल, कुमारगंज, अमानीगंज और बीकापुर सहित जिले के विभिन्न क्षेत्रों में भी भक्तों की आवाजाही बनी रही। कामाख्या धाम में अयोध्या के अलावा अमेठी, सुल्तानपुर, बाराबंकी, अंबेडकरनगर और गोंडा समेत आसपास के जनपदों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। भीड़ को देखते हुए प्रशासन की ओर से सुरक्षा व्यवस्था की गई है। मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है, ताकि श्रद्धालुओं को दर्शन के दौरान किसी प्रकार की परेशानी न हो। पंडित त्रिलोकी नाथ ने बताया कि मां सिद्धिदात्री नवदुर्गा का नौवां स्वरूप हैं। मान्यता है कि उनकी सच्चे मन से पूजा-अर्चना करने पर भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। देवी पुराण के अनुसार, मां सिद्धिदात्री ने भगवान शिव को सभी सिद्धियां प्रदान की थीं। देवी का स्वरूप लाल वस्त्रों से जुड़ा माना जाता है और पूजा में लाल वस्त्र धारण करना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, नवरात्र के अन्य दिनों में पूजा न कर पाने वाले श्रद्धालु भी नवमी पर मां सिद्धिदात्री की आराधना कर पुण्य फल प्राप्त कर सकते हैं। नवरात्र के समापन पर जिले में करीब एक हजार स्थानों पर भंडारे के आयोजन की तैयारी की गई है। सुबह से ही आयोजक प्रसाद और भोजन की व्यवस्था में जुटे रहे, ताकि माता रानी की पूजा और आरती के बाद श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया जा सके।

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