भारतीय किसान यूनियन टिकैत ने दिया धरना:किसानों की समस्याओं को लेकर 27 अक्टूबर को ललौली में महापंचायत का ऐलान

Oct 15, 2026 - 15:55
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भारतीय किसान यूनियन टिकैत ने दिया धरना:किसानों की समस्याओं को लेकर 27 अक्टूबर को ललौली में महापंचायत का ऐलान
फतेहपुर में भारतीय किसान यूनियन टिकैत (बीकेयू) ब्लॉक भिटौरा के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने क्षेत्र के किसानों की ज्वलंत समस्याओं और प्रशासनिक उपेक्षा के विरोध में उप जिलाधिकारी सदर को गुरुवार के दिन ढाई बजे ज्ञापन सौंपा। इस मौके पर राष्ट्रीय संगठन मंत्री राजेन्द्र सिंह मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। मुख्य अतिथि ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि किसानों की समस्याओं का अविलंब समाधान नहीं किया गया तो आगामी 27 अक्टूबर 2026 को सदर तहसील परिसर में एक विशाल किसान महापंचायत आयोजित की जाएगी। इसके अलावा,आगामी 17 अक्टूबर को बिंदकी के ललौली चौराहे पर भी किसान पंचायत की जाएगी। भारतीय किसान यूनियन के प्रतिनिधियों ने अवगत कराया कि आगामी 27 अक्टूबर 2026 को असोथर क्षेत्र के किसानों एवं भिटौरा ब्लॉक के किसानों की समस्याओं के निस्तारण के लिए उप जिलाधिकारी सदर की उपस्थिति में तहसील परिसर में एक महापंचायत का आयोजन किया जाएगा। यूनियन के सभी वरिष्ठ पदाधिकारी व किसान साथी एकत्रित होकर अपनी मांगों को रखेंगे और प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन सौंपेंगे। ​किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि क्षेत्र में खाद (डीएपी,यूरिया आदि)की भारी किल्लत बनी हुई है। इसके साथ ही,बाजारों में नकली एवं घटिया कीटनाशक दवाइयां व बीज बेचे जा रहे हैं, जिससे किसानों की फसलें बर्बाद हो रही हैं। ज्ञापन में मांग की गई है कि सहकारी समितियों और केंद्रों पर पर्याप्त मात्रा में खाद की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए और नकली दवाइयां व बीज बेचने वाले दुकानदारों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।उन्होंने बताया कि 17 अक्टूबर 2026 को बिंदकी तहसील अंतर्गत ललौली चौराहे पर किसानों की एक विशाल पंचायत आयोजित होगी,जिसमें स्थानीय समस्याओं पर रणनीति बनाई जाएगी। ​धरना में ​राजेन्द्र सिंह (राष्ट्रीय संगठन मंत्री) ​राजेन्द्र सिंह यादव (युवा तहसील अध्यक्ष, सदर) ​प्रमोद कुमार साहू (जिला सचिव) ​रामानंद मौर्य, राम सुमेर (ब्लॉक अध्यक्ष, भिटौरा) अंजना जिला उपाध्यक्ष, महिला मोर्चा)​ शोभा, धर्मेंद्र कुमार मौर्या किसान नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते प्रशासन ने किसानों की खाद-बीज और अन्य समस्याओं का निस्तारण नहीं किया तो किसान उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।

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