तीन मंत्रियों के बाद अब किसकी बारी? भाजपा में बड़े बदलाव के संकेत
राज्यसभा चुनाव के बीच भाजपा ने उत्तर प्रदेश से आठ नए उम्मीदवारों के नाम घोषित किए हैं। हरदीप सिंह पुरी और बी.एल. वर्मा को दोबारा टिकट नहीं मिलने से उनके मंत्री पद पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। वहीं पंकज चौधरी को लेकर ‘एक व्यक्ति, एक पद’ की चर्चा तेज है। नवंबर 2026 तक केंद्र सरकार में कई मंत्रियों और मंत्रालयों में बदलाव की संभावना जताई जा रही है।
दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 6 अक्टूबर 2026
भाजपा ने उत्तर प्रदेश से राज्यसभा चुनाव के लिए आठ उम्मीदवारों के नाम घोषित किए हैं। सूची में धर्मपाल सिंह, राधाकांत ओझा, प्रकाश पाल, विद्यासागर सोनकर, गोपी कृष्ण पांडेय, प्रियंका सिंह रावत, राम प्रताप सिंह चौहान और श्रुति गंगवार को जगह मिली है। वहीं केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी और केंद्रीय उपभोक्ता मामले राज्य मंत्री बी.एल. वर्मा को दोबारा उम्मीदवार नहीं बनाया गया है। ऐसे में दोनों मंत्रियों के पद और भविष्य को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है।
राज्यसभा सदस्यता खत्म होने पर मंत्री पद पर क्या असर पड़ता है
संविधान के अनुच्छेद 75 के अनुसार, कोई व्यक्ति सांसद न होते हुए भी मंत्री बन सकता है, लेकिन उसे छह महीने के भीतर संसद के किसी सदन का सदस्य बनना जरूरी है। यदि छह महीने की अवधि में वह लोकसभा या राज्यसभा का सदस्य नहीं बनता है, तो उसका मंत्री पद समाप्त हो जाता है। यही संवैधानिक व्यवस्था राज्यसभा का कार्यकाल खत्म होने वाले मंत्रियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनती है। इसी वजह से राज्यसभा का टिकट न मिलने के बाद मंत्रियों के अगले कदम पर नजर रहती है।
जॉर्ज कुरियन का इस्तीफा
जॉर्ज कुरियन का राज्यसभा कार्यकाल 21 जून 2026 को समाप्त हो गया था। भाजपा ने उन्हें दोबारा राज्यसभा का उम्मीदवार नहीं बनाया, जिसके बाद उन्हें मंत्री पद छोड़ना पड़ा। कुरियन मोदी सरकार में अल्पसंख्यक मामलों और मत्स्य पालन राज्य मंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। उन्हें 2024 में मंत्रिमंडल में शामिल किया गया था और पार्टी की ओर से केरल में ईसाई समुदाय तक पहुंच बढ़ाने के लिए भी उनका इस्तेमाल किया गया था।
रवनीत सिंह बिट्टू भी हुए बाहर
रवनीत सिंह बिट्टू का राज्यसभा कार्यकाल भी 21 जून 2026 को समाप्त हुआ था। भाजपा ने उन्हें राजस्थान से दोबारा राज्यसभा भेजने का फैसला नहीं किया। इसके बाद 24 जुलाई 2026 को उन्होंने केंद्रीय मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। राजनीतिक चर्चा है कि भाजपा उन्हें पंजाब की राजनीति में बड़ी जिम्मेदारी दे सकती है और वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में उनका इस्तेमाल संगठन को मजबूत करने के लिए किया जा सकता है।
धर्मेंद्र प्रधान का मामला अलग
धर्मेंद्र प्रधान का मामला जॉर्ज कुरियन और रवनीत सिंह बिट्टू से अलग रहा। उन्होंने जुलाई 2025 में नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं और छात्रों के विरोध के बीच शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दिया था। उनका इस्तीफा राज्यसभा सदस्यता खत्म होने की वजह से नहीं हुआ था। उनके जाने के बाद शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी फिलहाल दूसरे मंत्री को अतिरिक्त रूप से दी गई है।
अब हरदीप सिंह पुरी पर नजर
केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी का राज्यसभा कार्यकाल 25 नवंबर 2026 को समाप्त होने वाला है। भाजपा ने उत्तर प्रदेश से जारी राज्यसभा उम्मीदवारों की सूची में उन्हें जगह नहीं दी है। ऐसे में उनके सामने दोबारा संसद पहुंचने का रास्ता तलाशने की चुनौती होगी। यदि वह निर्धारित समय के भीतर संसद के किसी सदन के सदस्य नहीं बनते हैं, तो संवैधानिक नियमों के कारण उन्हें मंत्री पद छोड़ना पड़ सकता है।पुरी वर्ष 2017 से केंद्र सरकार में मंत्री हैं और मोदी सरकार में सिख समुदाय के प्रमुख चेहरों में गिने जाते हैं। उनके पास लोकसभा का कोई अपना निर्वाचन क्षेत्र नहीं है। ऐसे में आने वाले समय में भाजपा उनके लिए क्या राजनीतिक भूमिका तय करती है, इस पर सभी की नजर रहेगी।
बी.एल. वर्मा के सामने भी यही चुनौती
केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण राज्य मंत्री बी.एल. वर्मा का राज्यसभा कार्यकाल भी 25 नवंबर 2026 को समाप्त हो रहा है। भाजपा ने उन्हें भी उत्तर प्रदेश से दोबारा राज्यसभा उम्मीदवार नहीं बनाया है। वर्मा पार्टी के प्रमुख पिछड़ा वर्ग चेहरों में माने जाते हैं, लेकिन इस बार उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के लिए नए चेहरों को मौका दिया गया है।यदि वर्मा नवंबर के बाद संसद के किसी सदन के सदस्य नहीं बनते हैं, तो उन्हें भी मंत्री पद छोड़ना पड़ सकता है। इसलिए अगले कुछ सप्ताह उनके राजनीतिक भविष्य के लिहाज से महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। भाजपा उन्हें संगठन में कोई नई जिम्मेदारी देती है या किसी दूसरे रास्ते से संसद भेजती है, यह आने वाले समय में साफ होगा।
पंकज चौधरी को लेकर भी बढ़ी चर्चा
वित्त राज्य मंत्री और उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी की स्थिति बाकी दोनों मंत्रियों से अलग है। वह महाराजगंज से लोकसभा सांसद हैं, इसलिए उनके मामले में राज्यसभा का कार्यकाल खत्म होने जैसी संवैधानिक बाध्यता नहीं है। हालांकि, उनके सामने ‘एक व्यक्ति, एक पद’ की राजनीतिक चर्चा जरूर खड़ी हो गई है। वह दिसंबर 2025 से उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष के साथ-साथ केंद्रीय मंत्री की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं।वर्ष 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा संगठन में पंकज चौधरी की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। पार्टी के भीतर यह चर्चा है कि उन्हें संगठन के काम के लिए अधिक समय देने के उद्देश्य से मंत्री पद से मुक्त किया जा सकता है। हालांकि, अंतिम फैसला भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व करेगा। मंत्रिमंडल में संभावित फेरबदल के दौरान इस मुद्दे पर फैसला होने की संभावना जताई जा रही है।
‘एक व्यक्ति, एक पद’ का क्या मतलब है
भाजपा में ‘एक व्यक्ति, एक पद’ की नीति को संगठनात्मक संतुलन से जोड़कर देखा जाता है। इसका उद्देश्य यह माना जाता है कि किसी एक नेता के पास एक साथ बहुत अधिक महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां न रहें और संगठन में दूसरे नेताओं को भी अवसर मिले। हालांकि, भाजपा में यह व्यवस्था हर स्थिति में एक समान तरीके से लागू नहीं हुई है। अलग-अलग समय पर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने संगठन और सरकार में एक साथ जिम्मेदारियां संभाली हैं।पंकज चौधरी के मामले में भी यही सवाल उठ रहा है कि क्या वह प्रदेश भाजपा अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री दोनों जिम्मेदारियां आगे भी निभाते रहेंगे। वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए पार्टी संगठन को मजबूत करने के लिए उन्हें पूरी तरह संगठन की जिम्मेदारी दी जा सकती है। यदि ऐसा होता है, तो केंद्र सरकार में एक और बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
नवंबर तक बदल सकता है मोदी मंत्रिमंडल का गणित
हरदीप सिंह पुरी और बी.एल. वर्मा को राज्यसभा का दोबारा टिकट नहीं मिलने के बाद नवंबर 2026 के बाद मंत्रिमंडल में बदलाव की संभावना बढ़ गई है। पहले ही धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद शिक्षा मंत्रालय में बदलाव हो चुका है। यदि पुरी और वर्मा भी संसद के किसी सदन के सदस्य नहीं बनते हैं, तो उन्हें मंत्री पद छोड़ना पड़ सकता है।ऐसे में नवंबर 2026 तक केंद्र सरकार में तीन से चार मंत्रालयों में नए चेहरे दिखाई दे सकते हैं। इसके साथ ही पंकज चौधरी की भूमिका में बदलाव होता है या नहीं, यह भी महत्वपूर्ण होगा। राज्यसभा चुनाव और आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा का यह पूरा राजनीतिक गणित आने वाले महीनों में राष्ट्रीय राजनीति पर असर डाल सकता है।
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