बलिया के देवी मंदिरों में शारदीय नवरात्र पर उमड़ी भीड़:भोर से ही दर्शन-पूजन के लिए पहुंचे श्रद्धालु, बोले- माता रानी ने सब कुछ दिया
बलिया में शारदीय नवरात्र के तीसरे दिन मंगलवार को जिले के नगरीय और ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित देवी मंदिरों में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। श्रद्धालु भोर की पहली किरण निकलने से पहले ही मंदिरों की ओर निकल पड़े और पूजन-अर्चन में जुट गए। जय माता दी और जय मां दुर्गे के जयकारों से मंदिर परिसर और आसपास का वातावरण भक्तिमय बना रहा। जिले के प्रमुख मंदिरों सहित विभिन्न क्षेत्रों में स्थित देवी मंदिरों को आकर्षक ढंग से सजाया गया है। कहीं प्राकृतिक फूलों से तो कहीं रंग-बिरंगी झालरों से मंदिरों को सजाया गया है। मां मंगला भवानी मंदिर, उचेड़ा स्थित मां भवानी मंदिर, शंकरपुर स्थित मां शांकरी भवानी मंदिर, ब्रह्माइन स्थित मां ब्रह्माणी देवी मंदिर, खरीद स्थित माता मंदिर, सिकंदरपुर स्थित जल्पा-कल्पा देवी मंदिर, गायघाट स्थित मां पचरूखा देवी मंदिर, पचदेवी मंदिर, कपूरी स्थित मां कपिलेश्वरी भवानी मंदिर, जिला मुख्यालय स्थित मां दुर्गा मंदिर, शोभनाथपुर स्थित मां भगवती मंदिर, दुर्जनपुर स्थित मां काली मंदिर, रेवती स्थित मां दुर्गा मंदिर और काली माता मंदिर, बांसडीह स्थित मां दुर्गा मंदिर तथा सहतवार स्थित मां दुर्गा मंदिर में सुबह से ही भक्तों की भीड़ जुटने लगी। मां शांकरी भवानी मंदिर का पुराणों में उल्लेख जिला मुख्यालय से करीब पांच किलोमीटर दूर बलिया-बांसडीह मुख्य मार्ग के किनारे स्थित मां शांकरी भवानी मंदिर में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन-पूजन के लिए पहुंच रहे हैं। मार्कण्डेय पुराण के अनुसार, देवी प्रतिमा की स्थापना चैत्रवंश में जन्मे राजा सुरथ ने की थी। बताया जाता है कि राजा सुरथ का समस्त भूमंडल पर अधिकार था, लेकिन शत्रुओं के साथ हुए संग्राम में उन्हें पराजय का सामना करना पड़ा। इसके बाद राजा राजमहल छोड़कर वन में चले गए। वन में राजा सुरथ ने मेधा ऋषि का आश्रम देखा, जहां हिंसक जीव भी शांति से रहते थे। राजा ने मुनि के दर्शन कर उन्हें अपना कष्ट बताया। इस पर मेधा ऋषि ने उन्हें देवी की शरण में जाने की सलाह दी। इसके बाद राजा सुरथ जगदंबा के दर्शन के लिए ताल के किनारे रहकर तपस्या करने लगे। वर्षों बाद देवी ने उन्हें दर्शन देकर उनकी अभिलाषा पूरी की और राजा को उनका राज्य वापस मिल गया। मान्यता है कि जिस ताल के किनारे राजा ने तपस्या की थी, वह उन्हीं के नाम पर सुरहाताल के रूप में प्रसिद्ध हुआ। वहीं, दुर्गा सप्तशती में देवी का उल्लेख "कर्ण मूले तू शांकरी" के रूप में मिलता है। श्रद्धालुओं ने कहा- माता रानी की कृपा अपरंपार मां शांकरी भवानी मंदिर में दर्शन-पूजन करने पहुंचे श्रद्धालुओं ने माता रानी की महिमा का बखान किया। बैरिया से दर्शन करने पहुंचे सुभाष प्रसाद गुप्ता ने कहा कि वह निर्धन थे, लेकिन माता की कृपा से उन्हें सुखमय जीवन मिला है। उन्होंने बताया कि माता रानी के दर्शन के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं और उनकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। सुभाष प्रसाद गुप्ता ने कहा, "यह मत पूछिए कि क्या मिला है, बल्कि यह पूछिए कि माता रानी ने क्या नहीं दिया है। माता रानी ने सब कुछ दिया है।" मंजू देवी ने कहा कि माता का दिव्य स्वरूप है और ऐसा दिव्य स्वरूप कम देखने को मिलता है। उन्होंने विश्वास जताया कि माता रानी सभी भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करती हैं। वहीं, रविन्द्र कुमार ने कहा कि माता रानी सभी कष्टों को दूर कर सुख-समृद्धि प्रदान करती हैं। व्यवस्था संभालने में जुटे वालेंटियर मंदिरों में उमड़ रही भीड़ के बीच श्रद्धालुओं को दर्शन-पूजन में परेशानी न हो, इसके लिए वालेंटियर लगाए गए हैं। विभिन्न देवी मंदिरों के प्रांगण और आसपास चुनरी, प्रसाद, फूलों सहित पूजन सामग्री की दुकानें भी सजी हुई हैं। श्रद्धालु मंदिरों में पूजन-अर्चन के साथ प्रसाद और अन्य सामग्री की खरीदारी कर रहे हैं।
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