बुलंदशहर यूरिया तस्करी केस में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला:इफको यूरिया कालाबाजारी मामले में चार आरोपियों पर रासुका निरस्त
बुलंदशहर में बहुचर्चित इफको यूरिया कालाबाजारी और तस्करी मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जिला प्रशासन और पुलिस को बड़ा झटका दिया है। अदालत ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए चार आरोपियों हारुन, रामेंद्र सिंह उर्फ गुड्डू, यश राघव और हरेंद्र प्रताप पर लगाए गए राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका/एनएसए) को निरस्त कर दिया है और उन्हें तुरंत रिहा करने के आदेश दिए हैं। यह पूरा मामला पिछले साल 10 मई का है, जब अनूपशहर पुलिस और कृषि विभाग की संयुक्त टीम ने सटीक सूचना के आधार पर कार्रवाई की थी। रविवार की छुट्टी का फायदा उठाकर बुलंदशहर के पीसीएफ गोदाम से सरकारी खाद की एक बड़ी खेप चोरी-छिपे सीमा पार भेजी जा रही थी। कृषि विभाग की टीम ने गंगा पुल के पास घेराबंदी कर लाखों रुपये कीमत की 1575 बोरी इफको यूरिया से लदे तीन ट्रकों को जब्त कर लिया था। इस दौरान मौके से मुख्य तस्कर हारुन खान को भी धर दबोचा गया था। मामले की जांच में विभागीय मिलीभगत और बड़े भ्रष्टाचार का पर्दाफाश हुआ था। अधिकारियों के खातों में पैसे ट्रांसफर किए आरोपी हारुन खान के मोबाइल की जांच करने पर चौंकाने वाले खुलासे हुए। उसने पूछताछ में स्वीकार किया कि सरकारी यूरिया को गोदाम से बाहर निकालने के लिए उसने पीसीएफ के कर्मचारियों को भारी रिश्वत दी थी। मोबाइल की ट्रांजैक्शन हिस्ट्री से विभागीय अधिकारियों के खातों में पैसे ट्रांसफर किए जाने के पुख्ता सबूत भी मिले थे। इस अवैध नेटवर्क का दायरा बुलंदशहर के अलावा संभल और रामपुर जिलों तक फैला हुआ था। तस्कर कम कीमत मिलने वाले सरकारी कोटे के यूरिया को ऊंचे दामों में कालाबाजारियों को बेचते थे। घटना की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने मास्टरमाइंड समेत अन्य आरोपियों पर रासुका (NSA) की सख्त कार्रवाई की थी। 10 आरोपियों पर गैंगस्टर एक्ट के तहत शिकंजा इसके साथ ही, पीसीएफ जिला प्रबंधक, भंडार नायक और लेखाकार सहित कुल 10 आरोपियों पर गैंगस्टर एक्ट के तहत भी शिकंजा कसा गया था। हाईकोर्ट के इस ताजा फैसले से जहां प्रशासन की कार्रवाई को बड़ा झटका लगा है, वहीं मामले में कानूनी दांवपेच और तेज हो गए हैं।
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