CJP प्रोटेस्ट: नोटिस पर CJI नाराज, पूछा- 'मजिस्ट्रेट कैसे जारी कर सकते हैं'
कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन में शामिल होने के मामले में गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के छात्र अक्षत त्रिपाठी को ग्रेटर नोएडा के कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने नोटिस जारी किया था। इसमें पांच लाख रुपये का निजी मुचलका भरने को कहा गया था। बाद में नोटिस वापस ले लिया गया। मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली सर्वोच्च न्यायालय की पीठ ने इस कार्रवाई पर सख्त नाराजगी जताई। न्यायालय ने कहा कि जब छात्रों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई पर पहले ही रोक लगाई जा चुकी थी, तो मजिस्ट्रेट ऐसा नोटिस कैसे जारी कर सकते हैं। अब संबंधित मजिस्ट्रेट से इस मामले में स्पष्टीकरण मांगा जाएगा।
दि राइजिंग न्यूज | जम्मू-कश्मीर | 9 सितंबर 2026
कॉकरोच जनता पार्टी के विरोध प्रदर्शन से जुड़े मामले में एक छात्र को ग्रेटर नोएडा के कार्यकारी मजिस्ट्रेट की ओर से नोटिस जारी किए जाने पर सर्वोच्च न्यायालय ने कड़ी नाराजगी जताई है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने सवाल उठाया कि जब न्यायालय पहले ही छात्रों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगा चुका है, तो इसके बावजूद मजिस्ट्रेट की ओर से नोटिस कैसे जारी किया गया।न्यायालय को बताया गया कि यह नोटिस पुलिस के अनुरोध पर जारी किया गया था। हालांकि बाद में नोटिस वापस ले लिया गया, लेकिन न्यायालय के समक्ष इस बात पर आपत्ति जताई गई कि ऐसा कदम छात्रों के बीच डर पैदा करने वाला हो सकता है। अधिवक्ता ने कहा कि यह कार्रवाई सर्वोच्च न्यायालय के पहले के स्पष्ट निर्देश के विपरीत थी।
सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद जारी हुआ नोटिस
मामले की सुनवाई के दौरान पीठ को बताया गया कि एक सितंबर को सर्वोच्च न्यायालय ने छात्रों के खिलाफ दर्ज सभी प्राथमिकी में आगे की कार्रवाई पर रोक लगा दी थी। न्यायालय ने यह भी निर्देश दिया था कि छात्रों के खिलाफ किसी तरह की दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाए।इसके बावजूद गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के छात्र अक्षत त्रिपाठी को ग्रेटर नोएडा के कार्यकारी मजिस्ट्रेट की ओर से नोटिस जारी किया गया। नोटिस में छात्र से शांति बनाए रखने के लिए पांच लाख रुपये का निजी मुचलका भरने को कहा गया था। बाद में प्रशासन की ओर से इस नोटिस को वापस ले लिया गया।
सीजेआई सूर्यकांत ने पूछा- मजिस्ट्रेट ऐसा नोटिस कैसे जारी कर सकते हैं
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने मामले पर सख्त नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि मजिस्ट्रेट से इस संबंध में स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद ऐसा नोटिस किस आधार पर जारी किया गया।पीठ ने सवाल उठाया कि जब शीर्ष अदालत पहले ही छात्रों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दे चुकी थी, तो कार्यकारी मजिस्ट्रेट उस निर्देश के रहते इस तरह की कार्रवाई कैसे कर सकते हैं। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय का आदेश बिल्कुल स्पष्ट था।
तीन सदस्यीय पीठ के सामने उठा मामला
इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ कर रही थी। पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल थे।सुनवाई के दौरान अधिवक्ता ने न्यायालय को बताया कि संबंधित नोटिस अब वापस लिया जा चुका है। इसके बावजूद पीठ ने इस बात को गंभीरता से लिया कि न्यायालय के स्पष्ट निर्देश के बाद भी छात्र को नोटिस जारी किया गया। न्यायालय ने इस पूरे घटनाक्रम पर मजिस्ट्रेट से जवाब लेने की बात कही है।
क्या है पूरा मामला
मंगलवार को अधिकारियों ने बताया था कि गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के छात्र अक्षत त्रिपाठी को जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी की अगुवाई में हुए विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के मामले में नोटिस दिया गया था। यह नोटिस ग्रेटर नोएडा के कार्यकारी मजिस्ट्रेट की ओर से जारी किया गया था।नोटिस में छात्र से शांति बनाए रखने के लिए पांच लाख रुपये का निजी मुचलका भरने को कहा गया था। हालांकि बाद में इस आदेश को वापस ले लिया गया। इस कार्रवाई के सामने आने के बाद मामला सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंचा और सुनवाई के दौरान न्यायालय ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई।
एक सितंबर को सर्वोच्च न्यायालय ने क्या आदेश दिया था
सर्वोच्च न्यायालय ने एक सितंबर को संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत प्राप्त विशेष अधिकार का इस्तेमाल करते हुए छात्रों के खिलाफ दर्ज सभी प्राथमिकी में आगे की कार्रवाई पर रोक लगा दी थी। इस आदेश के बाद छात्रों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जानी थी।इससे पहले केंद्र सरकार की ओर से सर्वोच्च न्यायालय से इस मामले में अपने विशेष अधिकार का इस्तेमाल करने का अनुरोध किया गया था। न्यायालय के आदेश के बाद छात्रों को राहत मिली थी, लेकिन इसके बावजूद एक छात्र को नोटिस जारी किए जाने से नया विवाद खड़ा हो गया।
अब मजिस्ट्रेट से मांगा जाएगा स्पष्टीकरण
सर्वोच्च न्यायालय की नाराजगी के बाद अब संबंधित कार्यकारी मजिस्ट्रेट से नोटिस जारी करने को लेकर स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। न्यायालय यह जानना चाहता है कि जब छात्रों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई पर रोक का स्पष्ट आदेश मौजूद था, तब नोटिस जारी करने की जरूरत क्यों पड़ी।नोटिस वापस लिए जाने के बावजूद न्यायालय ने इसकी प्रक्रिया पर सवाल उठाया है। आने वाली सुनवाई में मजिस्ट्रेट की ओर से दिए जाने वाले स्पष्टीकरण से यह स्पष्ट हो सकता है कि नोटिस किस आधार पर जारी किया गया था और पुलिस के अनुरोध की इसमें क्या भूमिका थी।
महत्वपूर्ण बिंदु
- कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन से जुड़े मामले में छात्र को नोटिस जारी किया गया था।
- नोटिस ग्रेटर नोएडा के कार्यकारी मजिस्ट्रेट की ओर से जारी हुआ था।
- छात्र से पांच लाख रुपये का निजी मुचलका भरने को कहा गया था।
- सर्वोच्च न्यायालय ने एक सितंबर को छात्रों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगाई थी।
- नोटिस बाद में वापस ले लिया गया।
- मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने मजिस्ट्रेट की कार्रवाई पर नाराजगी जताई।
- न्यायालय ने मजिस्ट्रेट से स्पष्टीकरण मांगने की बात कही है।
- पीठ ने सवाल उठाया कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद ऐसा नोटिस कैसे जारी हुआ।
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