गाजीपुर में 3.90 लाख का शौचालय बेकार:शुल्क वसूलने के बाद भी यात्रियों को सुविधाएं नहीं, बोरिंग से पानी नहीं, सोलर लाइट भी बंद
गाजीपुर के रौजा स्थित मोहम्मदाबाद अस्थायी बस स्टैंड पर जिला पंचायत वाहन खड़ा करने के नाम पर शुल्क तो वसूल रही है, लेकिन यात्रियों को बुनियादी सुविधाएं तक नहीं मिल रही हैं। करीब दो साल पहले 3 लाख 90 हजार 500 रुपये की लागत से बनाया गया शौचालय इस्तेमाल के लायक नहीं है। कहीं दरवाजा गायब है तो कहीं टोटियां नहीं हैं। आसपास झाड़ियां उगी हैं और गंदगी फैली है। पेयजल के लिए कराई गई बोरिंग से पानी नहीं निकलता और टंकियां खाली पड़ी हैं। परिसर में रोशनी के लिए लगाई गई सोलर लाइट भी काम नहीं कर रही है। ऐसे में रोजाना सफर करने वाले सैकड़ों यात्रियों और वाहन चालकों को परेशानी उठानी पड़ रही है। वाहन के हिसाब से शुल्क तय, सुविधाओं का पता नहीं रजदेपुर देहाती स्थित इस बस स्टैंड से भांवरकोल समेत आसपास के कई इलाकों के लिए सवारी वाहन चलते हैं। यहां टोटो से 15 रुपये, तीन पहिया वाहन से 20 रुपये, जीप और टैक्सी से 25 रुपये, मिनी बस से 30 रुपये और बड़ी बस से 35 रुपये शुल्क लिया जाता है। वाहन चालकों का कहना है कि नियमित रूप से शुल्क देने के बावजूद यात्रियों के बैठने, पेयजल, शौचालय और धूप-बारिश से बचाव की समुचित व्यवस्था नहीं है। प्रतीक्षालय या छायादार टिनशेड नहीं होने से लोगों को खुले आसमान के नीचे वाहनों का इंतजार करना पड़ता है। 3.90 लाख का शौचालय, फिर भी खुले में जाने की मजबूरी स्टैंड परिसर में यात्रियों की सुविधा के लिए 3 लाख 90 हजार 500 रुपये की लागत से शौचालय बनवाया गया था। निर्माण के दो साल से अधिक समय बीतने के बाद भी इसकी उपयोगिता सुनिश्चित नहीं हो सकी है। शौचालय में दरवाजा और टोटियां नहीं हैं। नियमित साफ-सफाई नहीं होने से आसपास झाड़ियां और गंदगी फैली हुई हैं। इस कारण यात्री इसका इस्तेमाल करने से कतराते हैं। महिला यात्रियों के लिए परेशानी और गंभीर है। शौचालय की बदहाली के चलते यात्रियों और वाहन चालकों को खुले स्थानों का सहारा लेना पड़ता है। बोरिंग, पानी की टंकी और सोलर लाइट भी बेकार वित्तीय वर्ष 2023-24 में जिला निधि योजना के तहत कायदायी संस्था के माध्यम से स्टैंड परिसर में प्रकाश और पेयजल की व्यवस्था कराई गई थी। इसके लिए बोरिंग, पानी की टंकी और सोलर लाइट लगाई गई, लेकिन वर्तमान में यात्रियों को इनका लाभ नहीं मिल रहा है। बोरिंग से पानी नहीं निकल रहा और टंकियां खाली पड़ी हैं। वाहन चालकों के मुताबिक, पीने के पानी के लिए परिसर में मौजूद कुआं ही एकमात्र सहारा बचा है, लेकिन उसका जलस्तर भी घट रहा है। रात में पर्याप्त रोशनी नहीं होने से यात्रियों की परेशानी बढ़ जाती है। 'हर बस से 25 रुपये देते हैं, लेकिन सुविधा कुछ नहीं' बस कंडक्टर ने बताया कि वाहन खड़ा करने के लिए नियमित रूप से शुल्क देना पड़ता है, लेकिन यात्रियों के इस्तेमाल के लिए शौचालय और पानी की व्यवस्था नहीं है। शौचालय बनने के बाद करीब एक महीने तक ही व्यवस्था चली, इसके बाद से वह उपयोग में नहीं है। बस चालक धन्नू ने बताया कि प्रति बस 25 रुपये शुल्क लिया जाता है। पहले कुछ व्यवस्था थी, लेकिन अब पानी के लिए भी परेशानी होती है। सबमर्सिबल पंप भी नहीं है। शौच के लिए खुले स्थान पर जाना पड़ता है। रोज शुल्क देने के बावजूद सुविधाएं नहीं मिलने से चालकों और यात्रियों को परेशानी उठानी पड़ रही है। 'हर महीने आते हैं, शौच के लिए कहां जाएं' बक्सर से आए यात्री शिवम वर्मा ने बताया कि वह हर महीने इस स्टैंड पर आते हैं। करीब दो साल से लगातार आने के बावजूद यहां सुविधाओं में सुधार नहीं दिखा। उन्होंने कहा कि शौच या पेशाब के लिए जाना हो तो कोई उचित जगह नहीं है। न पेयजल की व्यवस्था है और न ही शौचालय इस्तेमाल करने लायक है। यात्रियों के बैठने और धूप-बारिश से बचने के लिए भी कोई इंतजाम नहीं है। जिला पंचायत ने दिया निरीक्षण का आश्वासन मामले में जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी राजेश कुमार मालवीय ने कहा कि वह अगले दिन टीम भेजकर बस स्टैंड का निरीक्षण कराएंगे। अब देखना होगा कि निरीक्षण के बाद यात्रियों की मूलभूत सुविधाएं बहाल करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
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