दुनियाभर में डीजल की किल्लत! क्या दिवाली के बाद बढ़ेंगे दाम

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, दुनियाभर में डीजल का भंडार तेजी से घट रहा है और इसकी कमी वर्ष 2027 तक जारी रह सकती है। पश्चिम एशिया में युद्ध, तेल शोधन कारखानों पर हमलों और होर्मुज जलडमरूमध्य से आपूर्ति में बाधाओं ने संकट बढ़ाया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में भारी उछाल देखा गया है। हालांकि, भारत में दिवाली के बाद डीजल महंगा होने की अभी निश्चित पुष्टि नहीं है।

Oct 15, 2026 - 15:02
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दुनियाभर में डीजल की किल्लत! क्या दिवाली के बाद बढ़ेंगे दाम

दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 15 अक्टूबर 2026

दुनियाभर में डीजल की बढ़ती किल्लत ने ऊर्जा बाजार की चिंता बढ़ा दी है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, डीजल की आपूर्ति और मांग के बीच असंतुलन लंबे समय तक बना रह सकता है। हालात ऐसे हैं कि वर्ष के जिस समय तेल का भंडार बढ़ना चाहिए, उसी दौरान उसमें गिरावट दर्ज की जा रही है। इससे आने वाले महीनों में डीजल की उपलब्धता प्रभावित होने और कीमतों पर दबाव बढ़ने की आशंका है।

वर्ष 2027 तक जारी रह सकता है डीजल का संकट

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी की मासिक तेल बाजार रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि डीजल की कमी वर्ष 2027 तक बनी रह सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, दुनियाभर में डीजल के भंडारण केंद्रों में जमा ईंधन तेजी से घट रहा है। यदि मांग के अनुपात में आपूर्ति नहीं बढ़ी, तो कई देशों के बाजारों में संकट और गहरा सकता है। इसका असर परिवहन, माल ढुलाई, कृषि और उद्योगों जैसे क्षेत्रों पर भी पड़ने की आशंका है।

मांग और आपूर्ति के बीच बिगड़ा संतुलन

पेरिस स्थित अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी का कहना है कि वर्ष के अंत तक तेल शोधन कारखानों में उत्पादन बढ़ने के बावजूद आपूर्ति की स्थिति में बड़ा सुधार होना मुश्किल है। पश्चिम एशिया से तैयार पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात में पर्याप्त बढ़ोतरी नहीं हुई, तो बाजार में मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बनाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ऐसे में डीजल की उपलब्धता सीमित रहने का खतरा बना रहेगा। आपूर्ति में लगातार रुकावट आने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों पर भी दबाव बढ़ सकता है।

अमेरिका और यूरोप में डीजल की कीमतों में भारी उछाल

रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले महीने यूरोप और अमेरिका में डीजल की थोक कीमतें लगभग 220 डॉलर प्रति बैरल के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई थीं। सिंगापुर में भी इसकी कीमत 200 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चली गई थी। बाद में कीमतों में कुछ नरमी जरूर आई, लेकिन वे अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध शुरू होने से पहले के स्तर की तुलना में लगभग दोगुनी बनी हुई हैं। इससे स्पष्ट है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन की आपूर्ति से जुड़ी परेशानियां अभी पूरी तरह दूर नहीं हुई हैं।

अमेरिका में खुदरा कीमतें छह डॉलर प्रति गैलन के पार

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के अनुसार, सितंबर में अमेरिका में डीजल की खुदरा कीमत पहली बार छह डॉलर प्रति गैलन से ऊपर पहुंच गई। रिपोर्ट में बताया गया है कि ईरान के साथ युद्ध शुरू होने के बाद से अमेरिका में डीजल की कीमतों में लगभग 70 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। ईंधन महंगा होने से परिवहन और माल ढुलाई की लागत बढ़ सकती है। इसका असर वस्तुओं की आपूर्ति और आम उपभोक्ताओं के खर्च पर भी पड़ सकता है।

पश्चिम एशिया में तनाव से प्रभावित हुई तेल की आपूर्ति

डीजल संकट के पीछे पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव एक प्रमुख कारण बताया जा रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध तथा खाड़ी क्षेत्र में बिगड़ते हालात के कारण कच्चे तेल और तैयार पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात में रुकावट आई है। रिपोर्ट में क्षेत्र की तेल शोधन सुविधाओं और तेल परिवहन से जुड़े ढांचे पर हमलों के प्रभाव का भी उल्लेख किया गया है। इन घटनाओं के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचने वाले ईंधन की मात्रा प्रभावित हुई है।

होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधाओं ने बढ़ाई चिंता

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है। इस मार्ग से होने वाली आपूर्ति में रुकावट आने पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और तेल शोधन कारखानों पर हमलों ने इस चिंता को और बढ़ा दिया है। यदि परिवहन मार्गों और निर्यात व्यवस्था में जल्द सुधार नहीं हुआ, तो डीजल की आपूर्ति पर दबाव लंबे समय तक बना रह सकता है।

सरकारी भंडार से तेल जारी करने के बाद भी बढ़ी चिंता

डीजल की कीमतों को नियंत्रित रखने और बाजार में आपूर्ति बनाए रखने के लिए अमेरिका सहित कई देशों ने अपने सरकारी तेल भंडार से बड़ी मात्रा में तेल जारी किया है। हालांकि, लगातार मांग और आपूर्ति में बनी बाधाओं के कारण इन भंडारों पर भी दबाव बढ़ने लगा है। यदि सरकारी भंडार में उपलब्ध तेल की मात्रा घटती रही और बाहर से आपूर्ति सामान्य नहीं हुई, तो संकट से निपटना और कठिन हो सकता है। ऐसे में आने वाले महीनों में अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार की स्थिति पर सभी की नजर रहेगी।

क्या दिवाली के बाद भारत में भी महंगा हो सकता है डीजल

अंतरराष्ट्रीय बाजार में डीजल की कीमतों में तेजी और आपूर्ति की कमी से भारत जैसे बड़े ईंधन उपभोक्ता देश पर भी दबाव पड़ सकता है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी की रिपोर्ट के आधार पर भारत में दिवाली के बाद डीजल की कीमतें बढ़ने की निश्चित घोषणा नहीं की जा सकती। देश में खुदरा कीमतों पर कच्चे तेल की लागत, रुपये की विनिमय दर, करों और सरकारी नीतियों सहित कई कारकों का प्रभाव पड़ता है। इसलिए भारत में डीजल के दाम बढ़ेंगे या नहीं, यह आने वाले समय में संबंधित परिस्थितियों और आधिकारिक निर्णयों पर निर्भर करेगा।

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