गन्ना-भुगतान ब्याज की मांग वाली रिट पर भाकियू की आपत्ति:रिट दायर करने वाले के खिलाफ कार्रवाई की मांग, जिलाध्यक्ष ने किया खंडन
शामली में गन्ने के बकाया भुगतान और देरी पर ब्याज की मांग को लेकर चल रहे किसान आंदोलन के बीच इलाहाबाद हाईकोर्ट में दायर एक रिट को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। रिट में 13 किसानों के नाम शामिल होने की बात सामने आई है। इनमें भाकियू के दो कार्यकर्ताओं के नाम होने का दावा किया गया। शुक्रवार शाम 5 बजे जिला अध्यक्ष आशीष चौधरी ने प्रेसवार्ता कर दोनों कार्यकर्ताओं को मीडिया के सामने पेश किया। उन्होंने रिट से उनका कोई संबंध नहीं होने की बात कही और रिट दायर करने वाले सतीश मिश्रा के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। सोशल मीडिया पोस्ट वायरल होने के बाद उठा मामला भाकियू के अनुसार, गुरुवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट वायरल हुई थी। इसमें गन्ने के बकाया भुगतान पर ब्याज नहीं लेने के संबंध में इलाहाबाद हाईकोर्ट में रिट दायर किए जाने की जानकारी दी गई थी। पोस्ट में 13 किसानों के नाम शामिल होने की बात कही गई। इनमें संगठन के दो कार्यकर्ताओं के नाम होने की जानकारी सामने आने पर दोनों कार्यकर्ता जिला अध्यक्ष के पास पहुंचे। धरना-प्रदर्शन के बीच नाम आने पर जताई आपत्ति प्रेसवार्ता में जिला अध्यक्ष ने दोनों कार्यकर्ताओं को मीडिया के सामने पेश कर रिट से उनका संबंध होने का खंडन किया। उन्होंने कहा कि भाकियू के कार्यकर्ता पिछले कई दिनों से कलेक्ट्रेट में गन्ने के बकाया भुगतान और देरी पर ब्याज देने की मांग को लेकर धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। ऐसे में संगठन के कार्यकर्ताओं के नाम से रिट दायर होने की जानकारी से किसानों में भ्रम की स्थिति पैदा हुई है। डीएम और एसपी से मिलकर कार्रवाई की मांग करेंगे भाकियू जिला अध्यक्ष और संबंधित किसानों का कहना है कि उन्होंने गन्ने के बकाया भुगतान पर ब्याज नहीं लेने के लिए कोई हलफनामा या शिकायत नहीं दी है। उन्होंने रिट दायर करने वाले सतीश मिश्रा के खिलाफ जिलाधिकारी और शामली एसपी से मिलकर कानूनी कार्रवाई की मांग करने की बात कही। उनका आरोप है कि मिल कर्मचारियों ने मिलकर यह षड्यंत्र रचा है। हालांकि, इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। जांच के बाद स्थिति स्पष्ट होने की बात जिला अध्यक्ष आशीष चौधरी ने कहा कि यह मामला प्रदेश के करीब 50 लाख किसानों से जुड़ा है। किसानों के हितों को प्रभावित करने वाले ऐसे मामले में तथ्यों की जांच होनी चाहिए और जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं, संबंधित किसान ने बताया कि मामला सामने आने के बाद उनके घर पर लोगों का आना-जाना लगा हुआ है और फोन पर भी शिकायतें मिल रही हैं। उन्होंने रिट से किसी भी तरह का संबंध होने से इनकार करते हुए जांच और कार्रवाई की मांग की। फिलहाल, भाकियू ने रिट में नाम शामिल होने को लेकर अपना पक्ष रखा है। रिट की वास्तविक सामग्री, उसमें शामिल सभी किसानों के नाम और संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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