गोरखपुर में खतरे के निशान से ऊपर बह रही राप्ती:2 दिन से घट रहा जलस्तर, निचले इलाकों में अब भी भरा पानी
गोरखपुर में राप्ती नदी के जलस्तर में पिछले दो दिनों से गिरावट दर्ज की जा रही है। इसके बावजूद रविवार सुबह बर्डघाट पर नदी खतरे के निशान से करीब 0.35 मीटर ऊपर बह रही थी। निचले इलाकों में जलभराव के कारण लोगों की परेशानी बनी हुई है। नेपाल और पहाड़ी क्षेत्रों में हो रही बारिश के चलते नदी का जलस्तर दोबारा बढ़ने की आशंका है। प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों और तटबंधों पर निगरानी बढ़ा दी है। राहत और बचाव टीमें भी अलर्ट पर हैं। राप्ती में मामूली गिरावट, रोहिनी का जलस्तर तेजी से घटा रविवार सुबह 8 बजे बर्डघाट पर राप्ती का जलस्तर 75.330 मीटर दर्ज किया गया। खतरे का निशान 74.98 मीटर है। शनिवार शाम 4 बजे से रविवार सुबह तक नदी का स्तर 0.020 मीटर घटा। वहीं, त्रिमुहानी घाट पर रोहिनी नदी का जलस्तर 80.82 मीटर रहा। यह खतरे के निशान 82.44 मीटर से 1.62 मीटर नीचे है। पिछले 12 घंटों में रोहिनी का जलस्तर 0.420 मीटर कम हुआ है। निचले इलाकों में फसलें डूबीं, आवाजाही प्रभावित राप्ती के उफान से शहर और ग्रामीण क्षेत्रों के कई निचले इलाकों में पानी भरा हुआ है। घरों के आसपास जलभराव के कारण लोगों को आने-जाने में दिक्कत हो रही है। खेतों में पानी भरने से फसलें डूब गई हैं। पशुपालकों को भी परेशानी उठानी पड़ रही है। कंट्रोल रूम सक्रिय, तटबंधों पर निगरानी जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी गौतम गुप्ता ने बताया कि राप्ती के जलस्तर में गिरावट राहत की बात है, लेकिन स्थिति अभी संवेदनशील है। नेपाल और पहाड़ी इलाकों में बारिश जारी रहने से नदी का जलस्तर फिर बढ़ सकता है। उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट है। कंट्रोल रूम 24 घंटे सक्रिय है और राहत-बचाव टीमें तैयार रखी गई हैं। संवेदनशील इलाकों में अधिकारियों की तैनाती की गई है। सिंचाई विभाग और इंजीनियरों की टीमें तटबंधों की निगरानी कर रही हैं। प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है।
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