गोरखपुर में नदियां खतरे के निशान से काफी नीचे आईं:निचले इलाकों में अब भी भरा पानी, लोगों को पूरी राहत का इंतजार
गोरखपुर में बाढ़ का असर अब कम होने लगा है। राप्ती और रोहिन नदियों का जलस्तर घटने से बाढ़ प्रभावित इलाकों के लोगों को राहत मिली है। हालांकि, कई गांवों और निचले इलाकों में अब भी पानी भरा हुआ है। इससे लोगों को घरों से बाहर निकलने, रास्तों से आने-जाने और रोजमर्रा के काम करने में परेशानी हो रही है। नदियों का पानी घटने से हालात सुधरने की उम्मीद बढ़ी है, लेकिन प्रभावित इलाकों में अभी जनजीवन पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाया है। राप्ती नदी का जलस्तर फिलहाल 73.100 मीटर दर्ज किया गया है। इसका खतरे का निशान 74.98 मीटर है। इस तरह राप्ती नदी का पानी खतरे के निशान से 1.88 मीटर नीचे है। वहीं, रोहिन नदी का जलस्तर 78.660 मीटर दर्ज किया गया है, जबकि इसका खतरे का निशान 82.44 मीटर है। यानी रोहिन नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 3.78 मीटर नीचे पहुंच गया है। दोनों नदियों का पानी घटने से बाढ़ का खतरा कम हुआ है और लोगों को राहत मिलने की उम्मीद बढ़ी है। नेपाल में बारिश के बाद बिगड़े थे हालात नेपाल और पहाड़ी इलाकों में हुई बारिश के बाद नदियों में पानी बढ़ गया था। इसका असर गोरखपुर के कई गांवों और निचले इलाकों में देखने को मिला। कई जगह पानी बस्तियों तक पहुंच गया था, जिससे लोगों को आने-जाने और जरूरी काम करने में परेशानी हुई। अब नदियों का जलस्तर कम होने से हालात धीरे-धीरे सुधरने की उम्मीद है। निचले इलाकों में अब भी भरा है पानी नदियों का पानी कम होने के बावजूद कई गांवों में जलभराव की समस्या बनी हुई है। घरों के आसपास पानी जमा होने और रास्तों पर जलभराव के कारण लोगों को परेशानी हो रही है। ऐसे में केवल नदियों का जलस्तर घटना ही काफी नहीं है, बल्कि प्रभावित इलाकों से जमा पानी निकलना भी जरूरी है। पानी निकलने के बाद ही लोगों को राहत मिलेगी और रोजमर्रा के काम पहले की तरह शुरू हो सकेंगे। प्रशासन की निगरानी जरूरी
बाढ़ का असर कम होने के बाद भी प्रभावित इलाकों में सतर्कता बरतना जरूरी है। नदियों के किनारे और तटबंधों पर नजर रखनी होगी, ताकि पानी बढ़ने की स्थिति में समय रहते कदम उठाए जा सकें। लोगों को भी नदी के किनारे जाने और पानी से भरे जोखिम वाले स्थानों पर जाने से बचना चाहिए। बारिश बढ़ा सकती है फिर परेशानी
गोरखपुर में बाढ़ की स्थिति नेपाल और पहाड़ी इलाकों में होने वाली बारिश पर भी निर्भर करती है। अगर वहां दोबारा तेज बारिश होती है, तो राप्ती और रोहिन नदियों का जलस्तर फिर बढ़ सकता है। इससे निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की परेशानी बढ़ने की आशंका है। फिलहाल दोनों नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से नीचे है। इससे राहत जरूर मिली है, लेकिन प्रभावित गांवों से पानी पूरी तरह निकलने और हालात सामान्य होने तक लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है।
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