जिला प्रशासन की लापरवाही:नमामि गंगे की विफलता के बाद जनसहयोग से मिली सफलता,मुंशीगंज में लोगों ने 5दिन में सईनदी को जलकुंभी से मुक्त कराया
नमामि गंगे की विफलता पर भारी पड़ा जनसहयोग: मुंशीगंज में स्थानीय लोगों ने 5 दिन के कड़े परिश्रम से सई नदी को जलकुंभी से कराया मुक्त एक ओर जहाँ केंद्र व प्रदेश सरकार नमामि गंगे और स्वच्छ भारत अभियान जैसी अतिमहत्वाकांक्षी योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार कर करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा रही हैं, वहीं ज़मीनी स्तर पर ये योजनाएँ मुँह चिढ़ाती नज़र आ रही हैं। ताज़ा और प्रत्यक्ष प्रमाण रायबरेली के मुंशीगंज स्थित सई नदी के तट पर देखने को मिला, जहाँ प्रशासन की अनदेखी के बाद आखिरकार जनता को स्वयं मोर्चा संभालना पड़ा। 2019 से जलकुंभी के जाल में जकड़ी थी सई नदी मुंशीगंज क्षेत्र से होकर गुजरने वाली सई नदी वर्ष 2019 से जलकुंभी की घनी परत से पूरी तरह पटी हुई थी। स्थिति यह हो गई थी कि नदी में पानी का स्वाभाविक बहाव पूरी तरह थम चुका था और सड़ांध व दुर्गंध के कारण पास से निकलने पर राहगीरों का जीना मुहाल हो गया था। स्थानीय निवासियों द्वारा शासन-प्रशासन से सफाई की कई बार गुहार लगाई गई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। 'सुनिया कथा रघुनाथ की' टीम ने उठाया बीड़ा सरकारी मशीनरी की निष्क्रियता को देखते हुए समाजसेवी संस्था 'सुनिया कथा रघुनाथ की' टीम ने नदी के पुनरुद्धार का संकल्प लिया। टीम के मुख्य देख-रेखकर्ता विवेक मिश्रा (जिलाध्यक्ष, संयुक्त व्यापार मंडल एवं जिलाध्यक्ष, अखिल भारतवर्षीय ब्राह्मण महासभा, रायबरेली) के नेतृत्व में एक विशेष सफाई अभियान चलाया गया। 5 दिनों के अथक प्रयास से मिली सफलता विवेक मिश्रा ने बताया कि 5 दिनों तक चले इस गहन सफाई अभियान में 5 कुशल मजदूरों तथा स्थानीय लोगों और युवाओं के अमूल्य सहयोग से नदी को जलकुंभी से पूरी तरह मुक्त करा दिया गया है। आज सई नदी एक बार फिर से स्वच्छ और प्रवाहमान नज़र आ रही है। सफाई अभियान के सफल समापन पर विवेक मिश्रा ने कहा कि "जनहित के मुद्दों को उठाना और जनसमस्याओं का स्थायी निराकरण करना हमारी टीम का नैतिक कर्तव्य है।"
उन्होंने पूर्व में किए गए सामाजिक कार्यों का उल्लेख करते हुए बताया कि इससे पूर्व भी उनकी टीम ने बालापुर अभ्यदाता मार्ग पर स्ट्रीट लाइटें लगवाने का कार्य किया था, जिससे रात में आवागमन सुगम हुआ। वहीं मनिका रोड की जर्जर और बदहाल स्थिति पर खुद गिट्टी व मिट्टी डलवाकर मार्ग को चलने योग्य बनाया था।
विवेक मिश्रा ने स्पष्ट किया कि प्रशासनिक उपेक्षा के बावजूद समाज सेवा का यह सिलसिला थमने वाला नहीं है और जनहित के ऐसे कार्य निरंतर जारी रहेंगे।
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