जिनपिंग अमेरिका पहुंचे, तोपों की सलामी, फाइटर जेट्स उड़े:ट्रम्प प्रोटोकॉल तोड़कर एयरपोर्ट रिसीव करने गए, व्हाइट हाउस में आज स्टेट डिनर
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग गुरुवार सुबह अमेरिका पहुंचे। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प प्रोटोकॉल तोड़कर खुद जॉइंट बेस एंड्रयूज एयरपोर्ट गए और उनका स्वागत किया। ट्रम्प के साथ फर्स्ट लेडी मेलानिया ट्रम्प भी मौजूद थीं। शी के साथ उनकी पत्नी पेंग लियुआन भी अमेरिका पहुंची हैं। आज जिनपिंग का व्हाइट हाउस में औपचारिक स्वागत होगा। इस दौरान सैन्य विमान फ्लाईओवर करेंगे और करीब 500 अमेरिकी सैन्यकर्मी समारोह में शामिल होंगे। इसके बाद ट्रम्प और शी के बीच द्विपक्षीय बातचीत होगी। इसमें व्यापार, टैरिफ, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ताइवान और रूस से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हो सकती है। रात में ट्रम्प व्हाइट हाउस में शी जिनपिंग और पेंग लियुआन के सम्मान में स्टेट डिनर देंगे। अमेरिका पहुंचे जिनपिंग, 5 तस्वीरें… स्टेट डिनर- विदेशी राष्ट्राध्यक्ष को दिया जाने वाला खास सम्मान व्हाइट हाउस में होने वाला स्टेट डिनर सिर्फ राजकीय भोज नहीं होता। यह अमेरिका की ओर से किसी विदेशी राष्ट्राध्यक्ष को दिया जाने वाला खास सम्मान है। यह सिर्फ खाने-पीने का कार्यक्रम नहीं है। इसके जरिए अमेरिका दूसरे देश के साथ अपने रिश्तों की अहमियत भी दिखाता है। इसलिए किसी विदेशी नेता को स्टेट डिनर देना अपने आप में खास माना जाता है। भारत के दो प्रधानमंत्रियों को यह सम्मान मिला अमेरिका में विदेशी नेताओं की मेजबानी की यह परंपरा काफी पुरानी है। 1874 में हवाई के राजा कलाकौआ अमेरिका आने वाले पहले विदेशी राष्ट्राध्यक्ष थे। भारत से अब तक 2 प्रधानमंत्रियों को यह सम्मान मिला है। सबसे पहले बराक ओबामा ने तत्कालीन पीएम मनमोहन सिंह को 2009 में स्टेट डिनर दिया था। ओबामा प्रशासन का यह पहला आधिकारी स्टेट डिनर था। इसके बाद जो बाइडेन ने PM मोदी के सम्मान में स्टेट डिनर आयोजित किया था। ट्रम्प-जिनपिंग के बीच 4 अहम मुद्दों पर बातचीत 1. टैरिफ ट्रूस 2 महीने बढ़ी अमेरिका और चीन के बीच सबसे बड़ा मुद्दा ट्रेड और टैरिफ है। ट्रम्प के टैरिफ के जवाब में चीन ने भी अमेरिकी सामान पर टैक्स बढ़ाए थे। अब दोनों देश टैरिफ कम करने की कोशिश कर रहे हैं। करीब 30-30 अरब डॉलर के सामान पर टैरिफ घटाने और ऊर्जा व कृषि उत्पादों पर टैक्स कम करने को लेकर बातचीत चल रही है। दोनों देशों के बीच टैरिफ कम रखने की मौजूदा सहमति 10 नवंबर को खत्म हो रही है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट के मुताबिक, इसे अब 10 जनवरी तक बढ़ाने पर सहमति बनी है। 2. AI पर पहली बार बातचीत AI अब अमेरिका और चीन के बीच तकनीकी मुकाबले का बड़ा मुद्दा बन गया है। दोनों देशों के बीच विवाद इस बात को लेकर है कि AI की सबसे ताकतवर तकनीक और मॉडल किसके पास रहेंगे और उनका इस्तेमाल कितना सुरक्षित होगा। अमेरिका को चिंता है कि उसकी AI तकनीक और मॉडल चीन तक पहुंच सकते हैं। इसलिए अमेरिका ने चीन को AI चिप और दूसरी जरूरी तकनीक देने पर कई तरह की पाबंदियां लगाई हैं। अमेरिका चीन की AI कंपनियों को लेकर भी सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं जताता रहा है। वहीं, चीन इन पाबंदियों का विरोध करता है। उसका कहना है कि अमेरिका तकनीक के इस्तेमाल और व्यापार में रुकावट डाल रहा है। न्यूयॉर्क में हुई बातचीत में दोनों देशों ने AI पर अलग से बातचीत शुरू करने पर सहमति जताई है। अमेरिका ने यह भी प्रस्ताव दिया है कि दोनों देश AI से जुड़े ऐसे सुरक्षा मामलों की जानकारी एक-दूसरे को दें, जिनसे राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा हो सकता है। 3. ताइवान का मुद्दा चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है, जबकि अमेरिका ताइवान की सुरक्षा में मदद करता है। चीन चाहता है कि अमेरिका ताइवान से दूरी बनाए रखे और उसे सैन्य मदद न दे। ताइवान एशिया के समुद्री रास्तों और सेमीकंडक्टर चिप की सप्लाई के लिहाज से भी बेहद अहम है। यही वजह है कि शी के लिए अमेरिकी समर्थन कम कराना और ट्रम्प के लिए चीन के साथ तनाव बढ़ाए बिना ताइवान को लेकर अपनी नीति बनाए रखना इस बातचीत का अहम हिस्सा हो सकता है। हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि बैठक में ताइवान को लेकर कोई बड़ा फैसला या समझौता होगा या नहीं। 4. रूस से तेल खरीद का मुद्दा अमेरिका ने ट्रम्प को रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार दिया है। भारत और चीन भी इसके दायरे में आ सकते हैं। चीन रूस से बड़ी मात्रा में तेल और गैस खरीदता है। वह रूस के साथ अपने कारोबार में अमेरिका जैसे तीसरे देशों के दखल का लगातार विरोध करता रहा है। ऐसे में रूस से ऊर्जा खरीद को लेकर अमेरिकी दबाव ट्रम्प और शी की बातचीत में बड़ा मुद्दा बन सकता है। जिनपिंग ट्रम्प से बार-बार क्यों मिल रहे हैं? एक्सपर्ट्स के मुताबिक, जिनपिंग अमेरिका के साथ रिश्ते बिगड़ने से बचने के लिए ट्रम्प से सीधे बातचीत जारी रखना चाहते हैं। गुरुवार की मुलाकात एक साल से भी कम समय में दोनों नेताओं की तीसरी मुलाकात होगी। इन बैठकों में अब तक कोई बड़ा समझौता नहीं हुआ है, लेकिन दोनों नेताओं के बीच बातचीत जारी है। इस साल 2 और मौके पर दोनों की मुलाकात हो सकती है। नवंबर में चीन के शेनझेन में APEC समिट और दिसंबर में अमेरिका के मियामी में G20 समिट के दौरान भी दोनों की मुलाकात हो सकती है। APEC समिट में ट्रम्प, जिनपिंग और पुतिन की त्रिपक्षीय बैठक भी हो सकती है। 1 साल के अंदर दो बार मिल चुके दोनों नेता… ------------------- यह खबर भी पढ़ें… रिपोर्ट- ट्रम्प को भरोसा, जिनपिंग से अपनी बात मनवा लेंगे: चीनी राष्ट्रपति निजी रिश्तों से ज्यादा देशहित को देते हैं तरजीह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प 24 सितंबर को चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मिलेंगे। ट्रम्प को भरोसा है कि शी के साथ उनके अच्छे निजी रिश्ते बातचीत में अमेरिका के काम आएंगे। पूरी खबर यहां पढ़ें…
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