कांग्रेस के लंच में अखिलेश नहीं पहुंचे:दिल्ली के प्रदर्शन में ‘दो लड़कों की जोड़ी’ में ट्यूनिंग क्यों नहीं दिखी

Oct 11, 2026 - 05:49
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कांग्रेस के लंच में अखिलेश नहीं पहुंचे:दिल्ली के प्रदर्शन में ‘दो लड़कों की जोड़ी’ में ट्यूनिंग क्यों नहीं दिखी
दिल्ली में मुख्य सूचना आयुक्त के खिलाफ कांग्रेस-सपा का प्रदर्शन तेज हो गया है। कहने के लिए प्रदर्शन ‘इंडिया गठबंधन’ में शामिल सभी घटक दलों का है। लेकिन, मुख्य किरदार में कांग्रेस ही नजर आ रही है। सपा शुरुआत में तो सड़क पर उतरी, लेकिन फिर दिलचस्पी कम दिखाई। अखिलेश ने वजह बताई कि उन्हें फीवर था। लेकिन, माना जा रहा है कि वो कांग्रेस नेताओं की हालिया बयानबाजी से नाराज हैं। कांग्रेस के बुलावे पर भी 30 सितंबर को दिल्ली में हुए लंच में सपा का कोई सांसद शामिल नहीं हुआ। कांग्रेस की तरफ से सफाई में कहा गया कि न्योता ही लेट भेजा था। ये सिर्फ एक संकेत है। ऐसी तीन और घटनाएं सामने आईं, जिनसे दूरियां बढ़ने का इशारा मिल रहा है- दरअसल, संसद में 90 सांसदों के साथ विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी कांग्रेस है, जबकि सपा 37 सांसदों के साथ दूसरे पायदान पर आती है। इस वक्त इंडिया गठबंधन में अखिलेश यादव सबसे मजबूत चेहरा हैं। क्योंकि, इंडिया गठबंधन में शामिल आप 3 सीट और आरजेडी 4 सीट पर सिमट गईं। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की टीएमसी ने 29 सीटें जीती हैं, लेकिन सांसद संभाल नहीं सकी। ऐसे में दिल्ली में जब प्रदर्शन शुरू हुए, तो दोनों पार्टियों के नेताओं पर सबकी नजर रहना स्वाभाविक था। फिर चाहे सड़क पर अखिलेश और राहुल गांधी का मूवमेंट हो या बैठक और लंच पार्टी। कांग्रेस शुरू से जता रही है कि वो नेशनल पार्टी है, फैसले भी वैसे ही होंगे। वहीं, अखिलेश भी कई बार दोहरा चुके हैं कि बात सीट की नहीं, जीत की है…। इसके जवाब में कांग्रेस सांसद इमरान मसूद का कहना था कि जब सीट ही नहीं रहेगी, तो जीत कैसे होगी? अब 3 स्टेप में दोनों पार्टियों के बीच बढ़ती खटास को समझते हैं… 1. इंडिया गठबंधन की बैठक का दिन अखिलेश ने शामिल होने से मना किया 30 सितंबर को दिल्ली में इंडिया गठबंधन की बैठक बुलाई गई थी। ये निर्णय 26 सितंबर को ही हो गया था। लेकिन, अखिलेश यादव ने 28 सितंबर को इस बैठक में जाने से मना कर दिया। पार्टी की तरफ से इसका कारण राज्यसभा के लिए उम्मीदवारों का लखनऊ में नामांकन बताया गया। कांग्रेस का मानना था कि राज्यसभा के लिए नामांकन का पहला दिन था, इसे आगे बढ़ाया जा सकता था। हालांकि, सपा ने अपने प्रतिनिधि के तौर पर इस बैठक में शामिल होने के लिए 2 सांसदों को भेजा। इनमें मुजफ्फरनगर से सांसद और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव हरेंद्र मलिक और रामपुर से सांसद मौलाना मोहिबुल्ला नदवी शामिल थे। इस दिन फैसला हो गया था कि 6 अक्टूबर को इंडिया अलायंस के सांसद दिल्ली में संसद भवन से भारत निर्वाचन आयोग के दफ्तर तक मार्च करेंगे। 2. प्रदर्शन का दिन अखिलेश को मालूम नहीं, राहुल-प्रियंका आकाशवाणी पहुंचे 6 अक्टूबर को पैदल मार्च शुरू हुआ, तो अखिलेश यादव और सपा के सभी सांसद संसद भवन पहुंच गए। वहां से अखिलेश यादव राहुल गांधी के साथ भारत निर्वाचन आयोग के लिए निकले भी। साथ में सभी सांसद भी शामिल थे। लेकिन, यहां सपा और कांग्रेस के बीच तालमेल नजर नहीं आया। निर्वाचन आयोग तक पहुंचने से रोका गया तो क्या करना है, यह दूसरे दलों के नेताओं को पता ही नहीं था। पुलिस ने जहां रोका, अखिलेश वहीं धरने पर बैठ गए। वहीं, राहुल गांधी और प्रियंका आकाशवाणी जाकर धरने पर बैठ गए। विपक्ष के दूसरे नेताओं को इसकी कानोंकान खबर ही नहीं लगी। बताया जाता है कि इसे लेकर सपा सुप्रीमो नाराज भी हो गए। 3. खड़गे के लंच का दिन सपा गायब रही, कहा गया बुलावा लेट भेजा 7 अक्टूबर को कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने इंडिया गठबंधन के सांसदों को लंच पर बुलाया। लेकिन, इसमें सपा शामिल नहीं हुई। इसे लेकर जब मीडिया में सवाल उठे तो कांग्रेस के मीडिया प्रभारी और महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर सफाई दी। उन्होंने एक्स पर लिखा- आज के लंच के लिए INDIA गठबंधन के सभी दलों को आमंत्रित किया गया था। लेकिन, लंच का फैसला कल देर रात लिया गया और उसी समय इसकी जानकारी दी गई। इसलिए स्वाभाविक था कि कुछ दलों के प्रतिनिधि इसमें शामिल नहीं हो सके। कुछ मीडिया संस्थानों में इसे लेकर बेवजह टिप्पणी की जा रही है। इंडिया गठबंधन के सभी दल वोट चोरी, SIR और परिसीमन के खिलाफ एकजुट हैं। पूरी मजबूती से एक-दूसरे के साथ खड़े हैं। बढ़ती दूरियों की 3 और वजह भी बताई जा रहीं… 1. यूपी में कांग्रेस सम्मानजनक सीट मांग रही यूपी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और सपा के बीच सीट शेयरिंग को लेकर खींचतान चल रही है। यूपी प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम पहले 200, फिर 150 सीट तक मांगते रहे। अब इमरान मसूद ने सम्मानजनक सीट देने के लिए कहा। इसका मतलब हर जिले में 1 और अमेठी, सहारनपुर, रायबरेली में एक से ज्यादा सीटें हैं। सपा के अंदर यह चर्चा है कि जब कांग्रेस के पास विधान परिषद की 11 सीटों पर कैंडिडेट नहीं हैं, तो अच्छे कैंडिडेट कहां से आएंगे? 2. राज्यसभा उम्मीदवार के लिए कांग्रेस से राय न करना राज्यसभा चुनाव में सपा ने बिजनेसमैन और रिलायंस इंडस्ट्रीज के निदेशक धनराज परिमल नाथवानी को प्रत्याशी बना दिया। धनराज के पिता परिमल नाथवानी भाजपा के समर्थन से कांग्रेस के प्रत्याशी को हराकर झारखंड में राज्यसभा का चुनाव जीते थे। बताया जा रहा है कि इसके लिए राहुल गांधी को लूप में नहीं लिया गया। 3. इमरान को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया जाना बीते कुछ महीनों से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद सीधे अखिलेश यादव पर हमलावर रहे हैं। पहले यह माना जाता रहा कि इमरान की यह व्यक्तिगत राय है। लेकिन, जब कांग्रेस ने इमरान को यूपी का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया तो सपा के नेताओं को यह लगा कि इमरान की बयानबाजी पार्टी के इशारे पर थी। अखिलेश ने कहा- स्वास्थ्य साथ नहीं दे रहा… 6 अक्टूबर को चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन में राहुल गांधी बैरिकेडिंग पर खड़े हो गए थे। लखनऊ आने पर जब अखिलेश यादव को याद दिलाया गया कि आप पिछले प्रदर्शन में बैरिकेडिंग पर खड़े हो गए थे, तब अखिलेश ने कहा कि मेरा स्वास्थ्य साथ नहीं दे रहा है। वहीं, खड़गे के लंच में शामिल नहीं होने पर जब पूछा गया तो उनका कहना था कि अभी तो लंच डिप्लोमेसी है, आगे डिनर भी होगा। उन्होंने यह भी कहा कि इंडिया गठबंधन की सूरत बहुत जल्दी साफ हो जाएगी। राजनीति के जानकार क्या सोचते हैं ‘गठबंधन कांग्रेस और सपा, दोनों के लिए मजबूरी’ वरिष्ठ पत्रकार और कांग्रेस को करीब से जानने वाले हिसाम सिद्दीकी कहते हैं- राहुल की बैठक में अखिलेश के न जाने, आंदोलन के दौरान तालमेल न होने और लंच में सपा के शामिल न होने की बात उतनी बड़ी नहीं है। चुनाव से पहले ये सब चलता रहेगा। सपा-कांग्रेस गठबंधन पर इन चीजों का कोई असर नहीं पड़ेगा। कांग्रेस और सपा, दोनों के लिए गठबंधन करना मजबूरी है। क्योंकि, राष्ट्रीय स्तर पर इंडिया गठबंधन में कांग्रेस के बाद सपा सबसे बड़ी पार्टी है। अगर सपा ही इसमें से निकल गई तो गठबंधन कहां बचेगा? ‘अखिलेश यादव अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे’ सपा को करीब से जानने वाले वरिष्ठ पत्रकार योगेश मिश्रा कहते हैं- अखिलेश यादव अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं। इसके लिए उन्हें कांग्रेस के साथ जाना ही पड़ेगा। यह सच है कि दोनों दलों के बीच बीते कुछ दिनों में दूरियां दिख रही हैं। लेकिन, यूपी में बीजेपी से पार पाने के लिए उन्हें कांग्रेस का साथ जरूरी है। --------------------------- यह खबर भी पढ़ें- अखिलेश 55-60 सीट से ज्यादा छोड़ने को तैयार नहीं, कांग्रेस छोटे दलों के सहारे दबाव बना रही यूपी विधानसभा चुनाव- 2027 के लिए सपा और कांग्रेस के बीच सीट शेयरिंग का मामला उलझता जा रहा है। कांग्रेस इस मसले को इसी अक्टूबर महीने में सुलझा लेना चाहती है। पार्टी के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष और सांसद इमरान मसूद पहली बार अपना सुर नरम करते 'सम्मानजनक सीटों' की मांग कर रहे हैं। पढ़िए स्टोरी…

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