कानपुर में मजार की दीवार गिरी, मलबे में मिला शिवलिंग:माता गौरी की प्रतिमा के भी अवशेष मिले, ग्रामीणों का दावा- मुगलकाल में बनी थी

Oct 08, 2026 - 11:21
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कानपुर में मजार की दीवार गिरी, मलबे में मिला शिवलिंग:माता गौरी की प्रतिमा के भी अवशेष मिले, ग्रामीणों का दावा- मुगलकाल में बनी थी
कानपुर में गुरुवार सुबह पुरानी दीवार ढह गई। मलबा हटाने के दौरान पत्थर का शिवलिंग और माता गौरा जैसी प्रतिमा के कुछ अवशेष मिले। जानकारी मिलते ही ग्रामीण मौके पर पहुंचे और अवशेषों को मलबे से निकालकर अलग रख दिया। ग्रामीणों ने अवशेषों पर पुष्प चढ़ाकर पूजा-अर्चना शुरू कर दी। इसके बाद मौके पर लोगों की भीड़ जुट गई। ग्रामीण इस जगह को मजार के नाम से जानते थे। दीवार के पास एक पुराना चबूतरा भी बना हुआ है। घटना सजेती थाना क्षेत्र के दहिलर गांव की है। राविश, चूना और ककई ईंटों से बनी थी मजार ग्रामीणों के मुताबिक, मजार की दीवार करीब डेढ़ मीटर मोटी थी। इसका निर्माण राविश, चूना और ककई ईंटों से हुआ था। मजार करीब दो बिस्वा जमीन में बनी थी और चारों तरफ दीवार थी। तीन तरफ की दीवार पहले ही ढह चुकी थी। ग्रामीण इसे पंच बीर बाबा की मजार बताते हैं। उनका कहना है कि इसका निर्माण मुगल शासनकाल में हुआ था और यह करीब एक हजार साल पुरानी है। मजार के अंदर एक चबूतरा बना था। करीब 25 साल पहले यहां मुस्लिम समुदाय के लोग बैठक करते थे। देखरेख के अभाव में मजार धीरे-धीरे खंडहर में बदल गई। दीवार के मलबे में मिले पत्थर गुरुवार सुबह बची हुई दीवार भी अचानक ढह गई। मलबा हटाने पर नीचे पत्थर का शिवलिंग और माता गौरा जैसी प्रतिमा के कुछ पत्थर मिले। ग्रामीणों ने इन्हें सावधानी से बाहर निकाला और अलग स्थान पर रख दिया। इसके बाद वहां पूजा-अर्चना शुरू कर दी गई। अवशेष मिलने की जानकारी फैलने के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। लोग पुराने स्थल और मिले पत्थरों को लेकर चर्चा करते रहे। हालांकि, मजार की वास्तविक उम्र और मिले अवशेष कितने पुराने हैं, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। इनके ऐतिहासिक महत्व और प्राचीनता की जानकारी जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

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