काशी में नमो बुक फेस्ट:मोदी पर 500+ किताबों का डेटाबेस, किताबों से ज्यादा नीतियों पर संवाद; लेखक-बुद्धिजीवी और युवा कर रहे सवाल-जवाब
वाराणसी के रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में चल रहे नमो बुक फेस्ट का आज दूसरा दिन है। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर लिखी 500 से ज्यादा किताबों का डिस्प्ले किया गया है। आयोजकों का कहना है कि इसका मकसद केवल पुस्तकें दिखाना या बेचना नहीं, बल्कि लेखकों, बुद्धिजीवियों और युवाओं के बीच संवाद कराना है। लोग विशेषज्ञों से सीधे सवाल पूछ रहे हैं और प्रधानमंत्री की नीतियों पर अलग-अलग नजरिए से चर्चा कर रहे हैं। 7 अक्टूबर से शुरू हुआ दो दिवसीय फेस्ट आज खत्म होगा। 500 से ज्यादा किताबों का डेटाबेस आयोजक युवराज पोखरना ने बताया कि उनकी टीम के पास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर लिखी 500 से ज्यादा किताबों का डेटाबेस है। इनमें अलग-अलग भाषाओं में लिखी किताबें शामिल हैं। उन्होंने बताया कि डेटाबेस में कुछ ऐसी किताबें भी हैं, जिन्हें स्वयं नरेंद्र मोदी ने लिखा है। इनमें ‘शक्ति पुंज’ और अपनी मां को गुजराती में लिखे पत्रों का संग्रह भी शामिल है। उन्होंने कहा कि रुद्राक्ष भवन में जगह सीमित होने के कारण पूरे संग्रह के बजाय चुनिंदा किताबों का डिस्प्ले लगाया गया है। जनवरी में दिल्ली से शुरू हुआ था फेस्ट युवराज पोखरना के मुताबिक, इस आयोजन का पहला संस्करण जनवरी 2026 में दिल्ली में किया गया था। वहां से मिले रिस्पॉन्स के बाद इसका दूसरा संस्करण काशी में आयोजित किया गया है। ‘किसी पार्टी विशेष का आयोजन नहीं’ युवराज पोखरना ने कहा कि यह किसी राजनीतिक दल या पार्टी विशेष का आयोजन नहीं है। उनके मुताबिक अलग-अलग समूह मिलकर इस प्रयास को आगे बढ़ा रहे हैं। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री पर लिखे साहित्य को एक जगह लाने और उस पर चर्चा करने का उद्देश्य लोगों को अलग-अलग विचारों से परिचित कराना है। किताब खरीदने से ज्यादा सवाल-जवाब पर जोर फेस्ट में आने वाले लोग केवल किताबें देखने या खरीदने तक सीमित नहीं हैं। यहां लेखक और विशेषज्ञ अलग-अलग विषयों पर चर्चा कर रहे हैं। दर्शक उनसे सीधे सवाल भी पूछ सकते हैं। युवराज पोखरना के मुताबिक प्रधानमंत्री की आर्थिक नीतियों जैसे विषयों पर अलग-अलग लोगों की अलग-अलग राय हो सकती है। इसलिए कोशिश है कि लोग आएं, चर्चा करें, सवाल पूछें और नीतियों को अलग-अलग नजरिए से समझें। पीएमसीसी डायरेक्टर बोले- काशी के बाद देशभर में ले जाएंगे पीएमसीसी के डायरेक्टर अशोक श्रीवास्तव ने बताया कि जनवरी में दिल्ली में हुए पहले संस्करण में स्कूल और कॉलेज के छात्रों की अच्छी भागीदारी रही थी। वहां प्रधानमंत्री की किताबों और नीतियों पर चर्चा के साथ बच्चों को लेखन से जोड़ने की कोशिश भी की गई। उन्होंने कहा कि दिल्ली के बाद आयोजन को देश के दूसरे हिस्सों में ले जाने की योजना बनाई गई और इसी क्रम में काशी में दूसरा संस्करण आयोजित किया गया। उन्होंने बताया कि 7 और 8 अक्टूबर की तारीख इसलिए चुनी गई क्योंकि इसी अवधि में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शासन के 25 वर्ष पूरे होने का अवसर आया। उनका कहना है कि आयोजन का एक उद्देश्य युवाओं को किताबों से जोड़ना भी है। लेखक बोले - मोदी ने क्राइसिस को बहुत अच्छे से मैनेज किया लेखक दीपक उपाध्याय ने अपनी किताब ‘नमो द क्राइसिस मैनेजर’ के बारे में बताया कि इसमें नरेंद्र मोदी के पिछले 25 वर्षों के सार्वजनिक जीवन में संकटों से निपटने के तरीके पर चर्चा की गई है। उन्होंने भुज भूकंप, सूखा, जम्मू-कश्मीर की बाढ़ और कोरोना महामारी जैसे उदाहरणों का उल्लेख किया। ‘विश्वकर्मा मोदी’ में मोदी के योजनाओं के असर का मूल्यांकन लेखक डॉ. पवन विजय ने बताया कि उनकी किताब ‘विश्वकर्मा मोदी’ में प्रधानमंत्री की योजनाओं का समाज पर पड़े असर का मूल्यांकन किया गया है। उन्होंने शौचालय, उज्ज्वला और आवास योजनाओं को प्रमुख उदाहरण बताते हुए कहा कि इनका असर समाज के अंतिम पायदान पर खड़े लोगों तक पहुंचा। पाठक बोले- पीएम की आर्थिक नीतियों पर लिखी किताब पसंद आई फेस्ट देखने पहुंचे नील विठ्ठलानी ने प्रधानमंत्री की आर्थिक नीतियों पर लिखी किताबों में रुचि दिखाई। उन्होंने बताया कि उन्हें पीएम की आर्थिक नीतियां पसंद आई। गुजरात से आने वाले नील ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि पढ़ाई के दौरान उन्हें छात्रवृत्ति मिली और सोलर पैनल से जुड़ी योजनाओं का भी अनुभव रहा। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं का उनकी जिंदगी पर सीधा असर पड़ा।
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